बिहार : सीटी स्कैन मशीन प्रदेश के 11 जिलों में न तो सरकारी और न ही प्राइवेट में उपलब्ध



--अभिजीत पाण्डेय (ब्यूरो),
पटना-बिहार, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

हादसे में सिर पर लगी चोट से सबसे ज्यादा जान जाती है। बिहार में भी यही हो रहा है, लेकिन बहुत ज्यादा। कारण यह कि सिर पर लगी चोट की जांच सीटी स्कैन मशीन से होती है और प्रदेश के 11 जिलों में यह न तो सरकारी और न ही प्राइवेट में उपलब्ध है। ऐसी चोट का इलाज न्यूरो सर्जन करते हैं, लेकिन पटना के अलावा 3 जिलों भागलपुर, दरभंगा और गया के सरकारी अस्पताल में ही न्यूरो सर्जन हैं। प्राइवेट भी बेगूसराय में 3 और पूर्णिया में दो डॉक्टर न्यूरो सर्जन हैं। बाकी 32 जिलों में सिर की चोट का इलाज नहीं।

सड़क हादसों में 91.53% मृत्यु-दर वाले सीवान के साथ 80% से ज्यादा मृत्यु-दर वाले किशनगंज, गोपालगंज, खगड़िया, समस्तीपुर, अरवल, सुपौल और सहरसा भी ऐसे ही जिले हैं। सीवान में प्राइवेट सीटी स्कैन है, पर जानलेवा हादसों में आगे रहने वाले अरवल, सुपौल, जमुई आदि में वह भी नहीं। इसी सूची में ऊपर के जिलों किशनगंज, गोपालगंज, खगड़िया आदि में ऐसे सीटी स्कैन सेंटर हैं, जहां किस्मत से जांच हो पाती है। स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के वर्ष 2019 के आंकड़ों ने भी यही दिखाया।

● जांच-इलाज की सुविधा वाले जिलों में मृत्यु-दर कम, फिर भी 50% से कम कहीं नहीं

स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एससीआरबी) के 2019 के आंकड़े बताते हैं कि बिहार के 38 जिलों और दो पुलिस जिलों में से कोई एक भी ऐसा नहीं, जहां सड़क हादसों में 50 प्रतिशत से कम मृत्यु-दर हो। 50 से 60 फीसदी मृत्यु-दर वाले जिले भी सिर्फ शिवहर और पटना ही हैं। 12 जिलों भभुआ, जहानाबाद, मोतिहारी, सीतामढ़ी, दरभंगा, मधुबनी, कटिहार, भागलपुर, बांका, नवगछिया, मुंगेर और बेगूसराय में हादसों में 60 से 70 फीसदी घायलों की मौत हो गई। सबसे ज्यादा 18 जिले में 70 से 80 फीसदी मृृत्यु-दर है- नालंदा, भोजपुर, बक्सर, रोहतास, गया, नवादा, औरंगाबाद, सारण, बगहा, बेतिया, मुजफ्फरपुर, वैशाली, मधेपुरा, पूर्णिया, अररिया, शेखपुरा, लखीसराय और जमुई। हादसे में 80 से 90 फीसदी मृत्यु-दर वाले सात जिले- अरवल, गोपालगंज, समस्तीपुर, सहरसा, सुपौल, किशनगंज और खगड़िया रहे।

संजय कुमार, प्रधान सचिव स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि प्रदेश के नौ शहरों में ट्रामा सेंटर बनाने की योजना है। यहां सड़क हादसों के शिकार लोगों के इलाज की बेहतर व्यवस्था होगी। इस सेंटर में दूसरे चिकित्सकों के साथ-साथ न्यूरो चिकित्सक भी तैनात होंगे। सीटी स्कैन आदि की भी सुविधा होगी।

● एक घंटे में इलाज जरूरी, स्पेशलिस्ट डॉक्टर और सीटी स्कैनिंग पहला टास्क

बिहार के सबसे बड़े न्यूरो सर्जन और पीएमसीएच के न्यूरो विभागाध्यक्ष डॉ• अरुण कुमार अग्रवाल कहते हैं कि ट्रॉमा या हैमरेज के केस में तो जरूरत पड़ती ही है, ब्रेन स्ट्रोक या इंटरनल हेमरेज में भी सीटी स्कैन जरूरी है। जांच नहीं हो, तब भी एक्सपर्ट रहें तो लक्षण को समझकर जान बचाने के लिए तुरंत दवा दें। केस मेजर है तो हायर सेंटर तुरंत भेजना चाहिए और पेशेंट कॉमा में है तो उसे तत्काल आईसीयू में रखना जरूरी है। किसी भी हालत में एक घंटे के अंदर इलाज शुरू करना ही आइडियल स्थिति है।

ताजा समाचार

  India Inside News


National Report



Image Gallery
Budget Advertisementt