जिम्मेदार अफसरों की कमी भी बड़ी वजह है बिहार के पिछड़ने की



--अभिजीत पाण्डेय (ब्यूरो),
पटना-बिहार, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

बिहार सरकार के पास महत्वपूर्ण विभागों का जिम्मा संभालने और आपदा की स्थिति से व्यवस्था को उबारने के लिए काबिल अफसरों की घोर कमी है।

राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग के आंकड़े भी इस बात की पुष्टि करते हैं। राज्य सरकार के अधीन इस वक्त कुल 42 विभाग हैं, इन्हें 33 कैबिनेट मंत्री मिलकर देखते हैं। मगर इन विभागों को हेड करने के लिए राज्य सरकार के पास बमुश्किल 13 प्रधान सचिव स्तर के अधिकारी हैं। ऐसे में ज्यादातर विभागों को सेक्रेटरी स्तर के अधिकारी ही हेड कर रहे हैं। जबकि कायदे से हर विभाग को संभालने के लिए प्रधान सचिव स्तर का अधिकारी होना चाहिए। कम से कम उन महत्वपूर्ण विभागों में तो होना ही चाहिए जिनके पास बड़ी जिम्मेदारी है।

ऐसा नहीं है कि बिहार में सीनियर अधिकारियों की कमी है और इस वजह से ऐसी दिक्कत पेश आ रही है। राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग के ही आंकड़े कहते हैं कि राज्य के 33 वरीय अधिकारी जो प्रधान सचिव स्तर की जिम्मेदारी संभाल सकते थे, वे लंबे समय से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं। अगर वे अधिकारी बिहार में होते तो हर विभाग में कम से कम एक प्रधान सचिव तो होता ही। कोरोना जैसे संकटकाल में सरकार को महत्वपूर्ण पदों पर बिठाने के लिए लोगों की कमी नहीं होती। यह अपने आप में अजीब स्थिति है, क्योंकि अमूमन ऐसा माना जाता है कि अगर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी न मिले तो अधिकारी अपने राज्य में किसी विभाग का प्रधान सचिव बनना अधिक पसंद करते हैं। मगर बिहार के मामले में ज्यादातर अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति लेकर दिल्ली चले जाना पसंद करते हैं। क्योंकि उन्हें लगता है बिहार में जिम्मेदारी संभालना बड़ा रिस्की काम है। इसलिए भी ऐसी धारणा बन रही है।

ऐसे माहौल में ज्यादातर अधिकारी या तो केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर चले जाना पसंद करते हैं या बिहार में ही किसी महत्वहीन विभाग में रहकर समय काट लेना चाहते हैं। जिम्मेदारी न लेना यहां के अधिकारियों के लिए सेफ गेम हो गया है।

आखिरकार इस लीडरशिप क्राइसिस का असर सरकार के काम-काज पर दिखता है। पहले से ही बदहाल राज्य बिहार तेजी से आगे नहीं बढ़ पा रहा। थोड़ी सी चुनौती आने पर असहाय नजर आने लगता है। रूटीन आपदाओं में भी यहां का इंफ्रास्ट्रक्चर भरभरा कर गिर जाता है। ऐसे में यही लगता है कि सिर्फ संसाधनों की कमी ही नहीं, जिम्मेदार अफसरों का अभाव भी बिहार के पिछड़ते रहने की एक बड़ी वजह है।

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