कोलकाता के शैक्षणिक संस्थानों के आसपास खुले आम बिक रहे है तम्बाकू उत्पाद



●☆● हो रहा केाटपा का उल्लंघन

कोलकाता, 03 नवम्बर। शहर के 67 प्रतिशत शैक्षणिक संस्थानों के आसपास तंबाकू उत्पादों की सरेआम बिक्री कर कोटपा (सिगरेट एंव अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम 2003) का उल्लंघन किया जा रहा है। यह जानकारी संबध हैल्थ फांउडेशन (एसएचएफ) की और से सितंबर 2017 में शिक्षण संस्थानों पर कराये गए सर्वे में सामने आई है।

जबकि केाटपा की धारा-4 के तहत सार्वजनिक स्थलों व धारा 6 के अनुसार किसी भी शैक्षणिक संस्थान के 100 गज के दायरे में, और 18 साल से कम उम्र के किसी भी व्यक्ति को सिगरेट और अन्य तम्बाकू उत्पादों की बिक्री नहीं की जा सकती।

संबंध हेल्थ फाउंडेशन (एसएचएफ) के ट्रस्टी संजय सेठ ने बताया कि शिक्षण संस्थानों के आसपास तंबाकू उत्पादों की बिक्री व उसका प्रयोग वर्जित होता है, जबकि इन्ही स्थानों पर सबसे अधिक एसे उत्पादों की बिक्र व प्रयोग होता है। इसके लिए कलकता शहर में इस कोटपा अधिनियम की धारा 6 के अनुपालन की स्थिति का मूल्यांकन करने के लिए संबंध हेल्थ फाउंडेशन द्वारा सितम्बर 2017 में एक पिक्टोरियल सर्वे किया गया। इस सर्वे में कोलकता के उत्तरी ,दक्षिणी, पूर्वी और पश्चिमी क्षेत्रों में स्थित 25 सरकारी व गैर सरकारी शैक्षणिक संस्थानों को शामिल किया गया था। इस सर्वे में 25 शैक्षणिक संस्थानों में 21 स्कूल और 4 कॉलेज थे। सर्वे में जो परिणाम सामने आया है वह बहुत ही चिंताजनक है। इस सर्वे में शामिल किए गए स्कूलों में से 67 प्रतशित के परिसरों के 100 गज के दायरे में तम्बाकू एवं तम्बाकू उत्पाद बेचने की दुकाने थीं। इनमें से 17 स्कूलों में 47 प्रतिशत स्कूल भवनों से केवल 16-25 गज की दूरी पर तम्बाकू उत्पाद बेचे जा रहे थे। इसके अतिरिक्त 57 प्रतिशत स्कूल परिसरों के 100 गज के दायरे के भीतर ही तम्बाकू उत्पादों को बेचने की दुकानें थीं। इस कारण कम उम्र के छात्रों को तम्बाकू जैसी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पदार्थ आसानी से उपलब्ध था।

उन्होने बताया कि सिगरेट एवं अन्य तम्बाकू उत्पाद अधिनियम (कोटपा) की धारा-4 और 6 के प्रावधानों के अनुसार शैक्षणिक संस्थानों के बाहर तम्बाकू विरोधी बोर्ड का प्रदर्शन करना अनिवार्य है, लेकिन सर्वे में शामिल किए गए इन संस्थानों में किसी के भी परिसर के बाहर ऐसे अनिवार्य बोर्ड नहीं दिखाई दिए।

●☆● कलकता शहर में शिक्षण संस्थाअेां के आसपास दूरी के अनुसार स्थिति

● 15 से 25 गज के भीतर
● 26 से 45 गज के भीतर
● 46 से 55 गज के भीतर
● 55 से 100 गज के भीतर

इस सर्वे में मुख्य रुप से 17 शैक्षणिक संस्थानों के सर्वे में पाया गया कि 68 प्रतिशत स्कूल परिसरों के 100 गज के दायरे में तम्बाकू की दुकानें हैं वहीं 17 में से 8 स्कूल परिसरों के केवल 16-25 गज की दूरी के भीतर तम्बाकू की दुकानें अव्यवस्थित थीं। यह कुल सर्वे किए गए संस्थानों का 47 प्रतिशत है। अन्य 4 स्कूल परिसरों से तम्बाकू की दुकानें 26-45 गज के दायरे में पाई गईं। इस तरह 26- 45 गज के दायरे में 23 प्रतिशत तम्बाकू की दुकानें पाई गईं जबकि 24 प्रतिशत तम्बाकू की दुकानें स्कूल भवनों से 46-55 गज के दायरे में पाई गईं। सर्वे में शामिल किए गए सभी स्कूलों और कालेजों के बाहर सिगरेट एवं अन्य तम्बाकू उत्पाद अधिनियम ( सीओटीपीए) की धारा-4 और 6 के प्रावधानों के अनुसार शैक्षणिक संस्थानों के बाहर लगाया जाने वाला अनिवार्य तम्बाकू विरोधी बोर्ड नहीं था।

विक्टिम ऑफ टोबेको विक्टिमस के स्टेट पैट्रन व नारायणा सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल के कैंसर सर्जन डा• सौरव दत्ता ने कहा “यह बहुत ही गंभीर और चिंताजनक है कि हर दिन बहुत बड़ी संख्या में तम्बाकू सेवन के शिकार मरीज अस्पताल में इलाज के लिए आते हैं। इनमें से अधिकतर नौजवान होते हैं। संबंध हेल्थ फाउंडेशन द्वारा कराए गए सर्वे में सिगरेट एवं अन्य तम्बाकू उत्पाद अधिनियम ( सीओटीपीए) की धारा-4 और 6 के प्रावधानों के उल्लंघन की ओर ध्यान आकृष्ट कराने की मैं सराहना करता हूं। सर्वे के परिणामों ने बहुत ही प्रासांगिक सवाल उठाए हैं कि क्या हमारे बच्चे स्कूलों और आसपास के क्षेत्रों में खतरनाक तम्बाकू से सुरक्षित हैं।”

डा• सौरव दत्ता बतातें है कि सर्वे के निष्कर्षों के आधार पर यह स्पष्ट है कि शैक्षणिक संस्थानों को नौजवानों व बच्चों के लिए सुरक्षित बनाने के लिए पश्चिम बंगाल की सरकार को इस दिशा में शीघ्र हस्तक्षेप करने की जरूरत है। सरकार ने पहले ही इस महामारी को रोकने के लिए सक्रिय उपाए किए हैं। इस संबंध में हाल ही में एक अधिसूचना जारी की गई है। इसके सफलतापूर्वक क्रियान्वयन के लिए सभी हितधारकों को एकजुट होकर काम करने की जरूरत है। तभी हम हमारी आने वाली पीढ़ी को इससे बचा पांएगे। वे बतातें है कि हमारे देश में हर दिन 5500 बच्चे तम्बाकू का सेवन शुरू करते हैं वंही पश्चिम बंगाल में प्रतिदिन 438 बच्चे तम्बाकू का सेवन प्रारंभ करते हैं।

●☆● राष्ट्रीय स्तर पर स्थिति

ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे (गैटस) के 2016-17 के आंकड़ों के अनुसार भारत में 26.7 करोड़ लोग किसी न किसी रुप में तम्बाकू का सेवन करते हैं। हर पांचवां वयस्क व्यक्ति (19.5 करोड़) धूम्ररहित तम्बाकू का सेवन करता है और हर दसवां वयस्क व्यक्ति (10.0 करोड़) धूम्रपान करता है।

इसी तरह पश्चिम बंगाल में 2.5 करोड़ वयस्क लोग (15 साल से अधिक उम्र के लोग) तम्बाकू का सेवन करते हैं। इनमें से 1.4 करोड़ लोग सिगरेट, बिड़ी आदि का सेवन करते हैं। राज्य में हर साल करीब 1.5 लाख लोग तम्बाकू सेवन से संबंधित बीमारियों के कारण अकाल मौत के शिकार होते हैं। यह चिंतानक आंकड़ा है और सभी संबंधित हितधारकों को, कम से कम बच्चों को तम्बाकू के सेवन से बचाने को सुनिश्चित करना चाहिए। इसके लिए हमें सबसे पहले शैक्षणिक संस्थानों से पहल करनी चाहिए और उन्हें आवश्यक रूप से तम्बाकू मुक्त बनाना चाहिए।

संबध हैल्थ फांउडेशन (एसएचएफ) के पश्चिमी बंगाल के प्रोजेक्ट मैनेजर सप्तऋषि हाजरा ने कहा “कलकाता के शैक्षणिक संस्थानों के आसपास सिगरेट एवं अन्य तम्बाकू उत्पाद अधिनियम (सीओटीपीए) के प्रावधानों के उल्लंघन के मद्देनजर हम सबको मिलकर सीओटीपीए के प्रावधानों को लागू कराने के लिए तेजी से काम करना चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इस अधिनियम का अनुपालन प्रभावी रुप से हो। कम से कम इस कानून के तहत आवश्यक तम्बाकू विरोधी साइनबोर्ड तो हर शैक्षणिक संस्थानों के बाहर और भीतर अवश्य ही लगाए जाएं। हमारी भावी पीढ़ी की सुरक्षा के लिए सभी शैक्षणिक संस्थानों को आवश्यक रूप से तम्बाकू मुक्त घोषित किया जाना चाहिए।”

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