चिकित्सकों का मरीजों के स्वास्थ्य के लिए स्वस्थ संवाद जरूरी - प्रो• आर• के• मिश्र



--- हरेन्द्र शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार, वाराणसी।

●☆● बीएचयू भोजपुरी अध्ययन केंद्र में "फिर वही दिन" का "प्रदर्शन, सिनेमा और लोककला" विषयक संवाद

वाराणसी : वैश्वीकरण के इस दौर में विज्ञान ने तो प्रगति की है लेकिन मानवीय मूल्यों का क्षरण हुआ है। समाज के लोगों को स्वस्थ्य रखने के लिए चिकित्सकों का स्वस्थ व्यवहार जरुरी है। यह बात शुक्रवार को काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के भोजपुरी अध्ययन केन्द्र एवं बीएचयू चिकित्सा विज्ञान संस्थान के न्यूरोलाजी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित "सिनेमा और लोककला" विषयक परिचर्चा एवं लकवा जनजागरुकता के लिए निर्मित फीचर फिल्म "फिर वही दिन" के प्रदर्शन के अवसर पर मुख्य अतिथि गोरखपुर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो• आर• के• मिश्र ने कही।

उन्होंने कहा कि औषधीय प्रगति के साथ चिकित्सक मरीजों से स्वस्थ संवाद नही कर पा रहे हैं।यही कारण है कि रोगों के प्रति लोगों में आज भी अंधविश्वास है। इसके कारण अकारण ही लोग परेशान हो रहे हैं। लकवा रोग के लिए यह फ़िल्म इस दिशा में अभिनव प्रयास है। अंधविश्वास उन्मूलन की दिशा में ऐसे फिल्मों के साथ समाज में जाने की जरूरत है।

अध्यक्षता करते हुए प्रो• उमेश चंद्र द्विवेदी ने कहा कि ऐसी सामाजिक फिल्में अन्धविश्वास पर आघात करती हैं जिनके प्रदर्शन से समाज में लकवा को लेकर वैज्ञनिक सोच का विकास होगा।

फ़िल्म के निर्माता प्रो• विजयनाथ मिश्र ने कहा कि लकवा जानलेवा बीमारी नहीं है। बस समय रहते डॉक्टर की परामर्श की जरूरत होती हैं। यह फ़िल्म इसी दिशा में एक प्रयास है। अपने अनुभवों को साझा करते उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को नशे से बचते हुए उन्हें नियमित दिनचर्या से जोड़ने की जरूरत है जिससे वे तनाव मुक्त रहें। उन्होंने बताया कि अल्फ्रेड नोबल जैसे लोग इस बीमारी के शिकार रहे। इस अवसर पर उन्होंने चिकित्सक व मरीज के बीच बढ़ती दूरियों को कम करने की जरूरत पर बल दिया।

अतिथियों का स्वागत करते हुए समन्वयक प्रो• श्रीप्रकाश शुक्ल ने कहा कि साहित्य का न्यूरोलॉजीकल डिसऑर्डर से गहरा नाता है। कल्पना शीलता और पलकों की गति जब रुक जाती है तब आदमी में पक्षाघात की संभावनाएँ बढ़ जाती हैं और एक लेखक भी तभी ठहर जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन साहित्य व चिकित्सा को नजदीक लाने का माध्यम हैं। न्यूरोलॉजी विभाग के डा• अभिषेक पाठक ने कहा कि यह फ़िल्म सामाजिक जागरूकता की दिशा में मील का पत्थर है। डा• आर• एंन• चौरसिया ने फ़िल्म संबंधित अपने अनुभवों को साझा करते कहा कि इस खतरनाक बीमारी से मुक्ति के लिए नियमित व्यायाम और तनाव मुक्त रहने की कोशिश करनी चाहिए।

केंद्र के समन्वयक प्रो• शुक्ल द्वारा प्रो• विजय नाथ मिश्र को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। संचालन प्रो• चंपा सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन डा• शिल्पा सिंह ने दिया। खचाखच भरे सभागार में प्रो• श्रीनिवास पांडेय, प्रो• राधेश्याम राय, प्रो• वशिष्ठ द्विवेदी, प्रो• सदाशिव द्विवेदी, इनरव्हील क्लब उदया वाराणसी की अध्यक्ष तनू शुक्ला, डा• नरेंद्र आचार्य, प्रो• एन• के• अग्रवाल, प्रो• अखिलेश कुमार, प्रो• वी• के• सिंह आदि मौजूद रहे।

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