--संजय पाठक,
वाराणसी-उत्तर प्रदेश, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
● मजबूरी बयां करने में छलक गई गणेश की आंखे
15 साल सियासती चाल बाजी के शिकार हुए गणेश गिरी को अब उम्मीद होने लगी है कि जल्द ही बरसात में उनके परिवार को अब रात भर जाग के नही बिताना पड़ेगा। पेड़ के नीचे चूल्हा जलाकर भोजन पकाने से अब छुटकारा हो सकेगा। सोशल मीडिया पर गणेश गिरी के जीवन की दुश्वारियों का खबर वायरल हुआ तो 5वें दिन वाराणसी लायंस क्लब की ओर से मौका मुआयना करने आये मुकेश पाठक ने परिवार को हर तरह की सुविधा देने का वादा किया। बात चीत के दौरान एक दौर ऐसा भी आया जब मंदिर के पुजारी गणेश गिरी के आंखों में आंसू भर आये।
कुछ देर की खामोशी मानो चीखते हुए कहने लगी हो कि...
बेबसी की दीवाल बरसात के संघ घुलने लगा है।
हर वो शख्श मेरा ही था, जो मुझे भूलने लगा है।
ज्ञात हो कि गणेश गिरी इस मंदिर पर अपने परिवार के तीसरी पीढ़ी के पुजारी है।
देश के प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र, बाबा विश्वनाथ की नगरी में काशी पंचक्रोशी परिक्रमा क्षेत्र के शिव मंदिर के पुजारी गणेश गिरी एक अदद छत के लिए मोहताज़ हो चुके है। 8 बाई 5 के रसोई में पूरी रात परिवार के 6 लोग बैठ कर कैसे बिताते होंगे? इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। इसके लिए स्थानीय स्तर पर ग्रामीणों द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से पुजारी के लिए मदत की अपील एक अभियान का रूप लेने लगा है।
फिलहाल लायंस क्लब की ओर से आया प्रस्ताव कब तक आकार लेगा, ये तो सिर्फ वक्त को पता है। सर्वाधिक लज्जा जनक बात ये है कि राजातालाब क्षेत्र के असवारी गांव में निर्मित प्राचीन शिव मंदिर के इस पुजारी को पीने के लिए पानी की कोई स्थाई व्यवस्था आज तक बन पाई है, जबकि गांव में सैकड़ो की संख्या में संपन्न लोग रहते है।
प्रति वर्ष शिवरात्रि को इस शिवमंदिर पर लगाने वाले मेले और पहलवानी की जोर आजमाइश वाले दंगल की गवाही तीन पीढ़ी देने को तैयार है, मगर किसी को पुजारी की दुर्दशा पर उफ तक न निकल पाया।