ज़िंदगी वक़्त की रफ़्तार से कट जाती है



--अभिजीत पाण्डेय (ब्यूरो),
पटना-बिहार, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

● "विन्यास साहित्य मंच" के ऑनलाइन काव्य संध्या में बही काव्य रसधार

"पिछले कई महीनों से ऑनलाइन काव्य गोष्ठियों/मुशायरों ने जिस प्रकार देश-विदेश के साहित्यकारों को करीब आने का मौका दिया है, वह सही मायनों में नवीनतम तकनीकों की वजह से ही संभव हो पा रहा है। सोशल डिस्टेन्सिंग के इस काल में सोशल मीडिया ने जो साहित्यकारों को मंच उपलब्ध करवाए हैं, उससे साहित्य एक नए मुकाम को हासिल करने की तरफ अग्रसर है।" यह बातें साहित्यिक संस्था विन्यास साहित्य मंच द्वारा आयोजित ऑनलाइन काव्य संध्या की अध्यक्षता करते हुये पटना के वरिष्ठ शायर घनश्याम ने कहीं।

काव्य संध्या में देशभर के चर्चित कवि-कवयित्रियों ने एक से बढ़कर एक रचनाओं का पाठ किया। कार्यक्रम में गजरौला (उत्तर प्रदेश) से डॉ. मधु चतुर्वेदी, सागर (मध्य प्रदेश) से अशोक मिजाज 'बद्र', आसनसोल (पश्चिम बंगाल) से निगार आरा, कोलकाता (पश्चिम बंगाल) से एकलव्य केसरी के अलावा बिहार के मुंगेर से अनिरुद्ध सिन्हा, मुजफ्फरपुर से डॉ. पंकज कर्ण, पटना से संजय कुमार कुन्दन, नीलांशु रंजन, डॉ. नसर आलम नसर, आराधना प्रसाद, सुनंदा केसरी और मो. नसीम अख्तर ने अपनी गज़लों-नज़मों की बेहतरीन प्रस्तुतियों से समा बांध दिया।

कार्यक्रम का संचालन नई दिल्ली से युवा साहित्यकार चैतन्य चन्दन ने किया। लगभग दो घंटे तक चले इस कार्यक्रम में श्रोता के रूप में भी अनेक सुप्रतिष्ठित कवि और साहित्यकार जुड़े रहे।

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