वाराणसी-उत्तर प्रदेश,
इंडिया इनसाइड न्यूज़।
■ बीएचयू के पूर्व चीफ प्राक्टर वरिष्ठ समाजशास्त्री प्रो• अरविंद जोशी ने कहा "कोरोना के इस समय में सामाजिक ताने बाने को बिखरने से बचाने के लिए घाटवाक की अद्भुत परिकल्पना"
काशी अपूर्वानुमेय है। अनुमेय है। त्रिकाल है। इसी कड़ी में अंतरराष्ट्रीय काशी घाटवाक विश्वविद्यालय के तत्वावधान में आज की तिथि 10 प्लस 10 बराबर 20 की तिथि के निमित्त महाश्मशान मणिकर्णिका घाट के ठीक सामने अवस्थिति विशाल रेत के टीले पर एक अनौपचारिक आयोजन किया गया जो काशी में ही संभव हुआ।
कार्यक्रम के सूत्रधार बीएचयू सर सुन्दरलाल अस्पताल के पूर्व चिकित्सा अधीक्षक एवं प्रसिद्ध न्यूरो चिकित्सक प्रो• विजयनाथ मिश्र ने इस अवसर को संकट में सर्जना के निर्माण से जोड़ते हुए कहा कि साहित्य, संगीत व विचार के इस संगम से न केवल घाटवाकर की प्रतिरोधी क्षमता विकसित होगी बल्कि जो लोग भी पर्यावरण की नैसर्गिक आभा से जुड़ेंगे, सभी लाभान्वित होंगे। उन्होंने गंगा के पानी से कोरोना के इलाज की संभावना पर भी अपनी बात रखी और कहा कि काशी आज की दस तारीख को अपनी विरासत व सांस्कृतिक परंपरा के रूप में मना रही है।
इस ऐतिहासिक अवसर पर बोलते हुए बीएचयू के पूर्व चीफ प्राक्टर वरिष्ठ समाजशास्त्री प्रो• अरविंद जोशी ने कहा कि कोरोना के इस समय में सामाजिक ताने बाने को बिखरने से बचाने के लिए घाटवाक का यह आयोजन महत्वपूर्ण है। एक ऐसे समय में जब पूरी दुनिया दस- बीस के चक्कर में पड़ी है काशीघाट के लोग दस दस बीस के आत्मीय आयोजन कर रहे हैं। उन्होने कहा कि कोरोना की तरह घाटवाक के लोग भी म्यूटेट करते हैं।
बीएचयू भोजपुरी अध्ययन केन्द्र के समन्वयक एंव वरिष्ठ साहित्यकार प्रो• श्रीप्रकाश शुक्ल ने विश्वविद्यालय के मानद कुलपति प्रो• विजयनाथ मिश्र द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम की सराहना करते कहा कि एक ऐसे समय में जहां कोरोना के कारण लोग नौ- दो ग्यारह हो रहे हैं, घाटवाक के लोग दस - दस - बीस की विश्वसनीयता को बचाने के लिए रेत पर यह महत्वपूर्ण आयोजन कर रहे हैं। इसे उन्होंने मनुष्य की प्रतिरोधी क्षमता को बढ़ाने वाला बताया और कहा कि यह तिथि हमारी सहज मानवीय उपस्थिति को सदैव याद दिलाती रहेगी।
इस अवसर पर ताना बाना समूह के देवेंद्र दास, कृष्णा यादव व गौरव मिश्र के द्वारा कबीर का मशहूर भजन मन लागा मेरो यार फकीरी में... प्रस्तुत किया। जिसे उपस्थित सभी घाट वाकर ने पसंद किया। उन लोगों ने इस अवसर पर साधो ये मुर्दों का गांव भी प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर लोक कलाकार अष्टभुजा मिश्र ने भी एक भोजपुरी गीत प्रस्तुत किया जिसके बोल थे - जहिया ससिया के डोर टूट जइहें न।
वहीं वरिष्ठ पत्रकार हरेंद्र शुक्ल, शिव विश्वकर्मा, शैलेश तिवारी, अरविंद सिंह आदि उपस्थित रहे। उद्यम सिंह सेवा समिति के संयोजक उदय सिह ने आभार व्यक्त किया।