हावड़ा-प• बंगाल,
इंडिया इनसाइड न्यूज़।
हर वर्ष की भांति इस बार भी संस्था संकल्प टुडे व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण हवड़ा के संयुक्त प्रयास से हवड़ा स्टेशन परिसर मे राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस का पालन किया गया। इस मौके पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण हावड़ा की सचिव न्यायाधीश संघमित्रा चटर्जी, रेलवे मजिस्ट्रेट शौरभ नंदी, अस्सिटेंट सेक्युरीटी कमीश्नर हवड़ा स्टेशन, जीआरपी रेलवे प्लेटफार्म प्रभारी, आरपीएफ पुलिस स्टेशन प्रभारी, अधिवक्ता याशमिन खातुन व डाक्टर अमित बनर्जी उपस्थित रहें। समस्त नागरिकों के लिए उचित, निष्पक्ष और न्याय प्रक्रिया सुनिश्चित करने हेतु जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से 9 नवंबर को राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस मनाया जाता है।
इस मौके पर रेलवे मजिस्ट्रेट शौरभ नंदी ने कहा है कि हम सबको संविधान व कानून की जानकारी रखनी चाहिए। वहीं संस्था संकल्प टुडे के सचिव इम्तियाज भारतीय ने कहा कि विधिक जागरूकता अभियान चलाना हमारी संस्था की प्राथमिकता है। हम हवड़ा स्टेशन में ये कार्यक्रम रखते हैं क्योंकि इस जागरूकता के दूरगामी क्षेत्रों तक संदेश पहुंचने में हवड़ा स्टेशन का सहायोग सराहनीय होता है और परिणाम अच्छे देखने को मिलता है। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ• सी• पी• वर्मा, मोहम्मद मुस्तफा, महेन्द्र सिंघानिया का सहायोग सराहनीय रहा।
राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस की शुरुआत पहली बार 1995 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा समाज के गरीब और कमजोर वर्गों को सहायता और समर्थन प्रदान करने के लिये की गई थी।
■ राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण का गठन विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के अंतर्गत समाज के कमजोर वर्गों को नि:शुल्क कानूनी सेवाएँ प्रदान करने के लिये और विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान के लिये लोक अदालतों का आयोजन करने के उद्देश्य से किया गया है।
भारत के मुख्य न्यायाधीश इसके मुख्य संरक्षक होते हैं और भारत के सर्वोच्च न्यायालय का द्वितीय वरिष्ठ न्यायाधीश प्राधिकरण का कार्यकारी अध्यक्ष होता है। संविधान के अनुच्छेद 39ए अवसर की समानता के आधार पर न्याय को बढ़ावा देने के लिये समाज के गरीब और कमजोर वर्गों को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करने का प्रावधान करता है। अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 22 (1), विधि के समक्ष समानता सुनिश्चित करने के लिये राज्य को बाध्य करता है।