--विजया पाठक, (एडिटर - जगत विजन)
कोलकाता-पश्चिम बंगाल, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
■ क्या बंगाल में टीएमसी को पछाड़ भगवा झंडा बुलंद करने में कामयाबी दिला पाएंगे कैलाश विजयवर्गीय
पश्चिम बंगाल में इन दिनों राजनीतिक सरगर्मी काफी तेज है। एक तरफ राजनीतिक पार्टियां मंच से लेकर गली मोहल्ले तक भाषण के माध्यम से एक दूसरे पर तीखा प्रहार कर रही है। वहीं, दूसरी ओर इन राजनैतिक दलों से जुड़े कार्यकर्ता सड़कों पर एक दूसरे का स्वागत पत्थर, लाठी, डंडे और लात-घूसो से कर रहे है। परिणाम चाहे जो हो लेकिन एक तो तय है कि बंगाल का राजनीतिक समीकरण बहुत जल्दी बदलने जा रहा है। इसकी एक बड़ी वजह है बंगाल के अंदर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी आईएमआईएम की आमद है।
बेशक यह पार्टी विधानसभा चुनाव में जितनी भी सीटें जीते लेकिन वोटों का समीकरण कहीं न कहीं इस पार्टी के आने से बिगड़ने वाला है। इस बात से बंगाल के दोनों प्रमुख पार्टी तृणमूल कांग्रेस और भाजपा अच्छी तरह से परिचित है। यही वजह है कि भाजपा ने एक बार फिर महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को पश्चिम बंगाल के चुनाव प्रभारी की जिम्मेदारी दी है। इसमें कोई दोहराय नहीं कि कैलाश विजयवर्गीय पार्टी को यहां पिछले चुनाव की तुलना में इस बार बेहतर सीटें उपलब्ध करवाने में कोई कोर-कसर छोड़ेंगे। लेकिन यह बात बहुत अच्छे से समझ लेना चाहिए कि पश्चिम बंगाल का सिंहासन प्राप्त करना इतना आसान भी नहीं है। टीएमसी नेताओं द्वारा विजयवर्गीय की क्षमता को कम आंकना एक बड़ी गलती हो सकती है। क्योंकि जिन्होंने वर्ष 2014 में हरियाणा में उस समय बहुमत वाली सरकार बनाने में कामयाबी हासिल की थी जिस समय वहां भाजपा ने सीएम पद का उम्मीदवार चुनाव के दौरान घोषित नहीं किया था। कैलाश विजयवर्गीय की इस कामयाबी को देखते हुए भाजपा ने उन्हें केंद्र में महासचिव की जिम्मेदारी देने का फैसला किया था। कुल मिलाकर बंगाल में भाजपा का झंडा बुलंद करने की प्रमुख जिम्मेदारी अब विजयवर्गीय पर है। औवेसी की पार्टी के आने से बीजेपी को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है और पार्टी यहां दो तिहाई बहुमत से सफलता अर्जित कर सरकार बनाएगी। कैलाश विजयवर्गीय का यह उत्साह क्या बंगाल में पहली मर्तवा भगवा झंडा बुलंद करने में कामयाब हो पाएंगे यह बड़ा सवाल है। जिसका जवाब आने वाले कुछ महीनों में स्वतः मालूम हो जाएगा।
जानकारी के अनुसार एआईएमआईएम के यहां चुनाव लड़ने से समीकरण यकीनन बदल सकता है। 'मिशन पश्चिम बंगाल' के लिए एआईएमआईएम ने राज्य में 23 जिलों में से 22 में अपनी यूनिट बनाई हैं। वहीं, देखा जाए तो एआईएमआईएम और टीएमसी के बीच पिछले साल नवंबर में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के खिलाफ रैली में ममता बनर्जी पर परोक्ष रूप से निशाना साधने के बाद से ही दोनों पार्टियों के बीच जंग शुरू हो गई थी, जो अब चुनावी मैदान तक पहुंच गई है। हालांकि टीएमसी की ओर से देखा जाए तो ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी टीएमसी के लिए कमजोर कड़ी दिखाई जान पड़ते है। क्योंकि अभिषेक के व्यवहार से स्थानीय लोग बहुत संतुष्ट दिखाई नहीं पड़ते और उन पर पहले से ही भ्रष्टाचार और दंगे उकसाने जैसे कड़े आरोप लगे हुए है जिससे कहीं न कहीं पार्टी की छवि धूमिल होती दिखाई जान पड़ती है।