--विजया पाठक (एडिटर - जगत विजन),
कोलकाता-पश्चिम बंगाल, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
पश्चिम बंगाल की राजनीति हर दिन एक इबारत लिखती जा रही है। विधानसभा चुनाव के ठीक पहले इस तरह से राजनीति का जो स्वरुप देखने को मिल रहा है वो समझ के परे है। कभी तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता भाजपा के कार्यकर्ताओं के साथ मार पीट करते है तो कभी उनकी रैली में आंसू गैस के गोले और लाठियां बरसाई जाती है। लेकिन गुरुवार को तो हद हो गई जब ममता बनर्जी के इशारे पर नाचने वाले समर्थकों ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे• पी• नड्डा के काफिले को रोक कर उन पर पत्थर बाजी शुरु कर दी। निश्चिततौर पर इस पूरे घटना क्रम में ममता सर्मथकों का साथ रोहिंग्या प्रवासी भी दे रहे है। क्योंकि ममता सरकार इन दिनों इन रोहिंग्या प्रवासियों की हमदर्द बनी हुई है। हमदर्द बनना भी स्वभाविक है आखिर वोट बैंक का जो सवाल है।
दरअसल टीएमसी खुद यह बहुत बेहतर ढंग से समझ चुकी है कि इस बार विधानसभा तक पहुंचने की राह आसान नहीं है। पहले बीजेपी और फिर औवेसी की पार्टी का बंगाल में पदार्पण कहीं न कहीं उन्हें चुनाव हारने का भय महसूस करा रहा है। इसलिए अब टीएमसी पूरी तरह से रोहिंग्याओं के साथ मिलकर इस चुनाव को साधने की कोशिश कर रही है। लेकिन ऐसा करके ममता कहीं न कहीं प्रदेश और देश की राष्ट्रीयता को तो खतरे में डाल ही रही है साथ ही आतंकवादियों को अपने घर में पनपने का मौका दे रही है। टीएमसी नेताओं को एक बात सीधेतौर पर समझ लेना चाहिए चुनाव काबिलियत और विश्वास से जीता जाता है न कि इस तरह से आतंकवादियों को घर में पालने से। खेर एक चिंता का विषय देश की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। क्योंकि सबसे ज्यादा रोहिंग्याओं की संख्या पश्चिम बंगाल में ही है। इस बात को खुद बंगाल में बीजेपी के अध्यक्ष दिलीप घोष ने माना है।
उन्होंने अपने एक बयान में स्पष्ट किया है कि भारत में कुल दो करोड़ मुसलमान घुसपैठिए मौजूद हैं जिसमें से एक करोड़ पश्चिम बंगाल में ही हैं। यह आंकड़े सोचने पर मजबूर करते है क्योंकि इन्हीं लोगों से देश की अस्मिता को खतरा होता है। लेकिन ममता सरकार सबकुछ जानते समझते हुए भी नसमझ बनी हुई और वोट बैंक की राजनीति करने के लिए देश की सुरक्षा से खिलवाड़ कर रही है। पिछले दिनों रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर देश में उठ रहे सुरक्षा के सवालों पर इंटेलिजेंस एजेंसियों ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले में 35 से ज्यादा संगठन करीब 40,000 रोहिंग्या मुसलमानों को बसाने की साजिश कर चुके हैं। इतना ही नहीं 35 से ज्यादा ऐसे संगठन हैं जो इन रोहिंग्या मुसलमानों को बसाने के लिए देश भर से पैसे इकट्ठा कर रहे हैं। इस बात की जानकारी स्वयं ममता बनर्जी सहित उनकी सरकार को भी है लेकिन फिर भी सत्ता में बने रहने के लिए ममता बनर्जी किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार है। जबकि इन घुसपैठियों को न तो हिंदुस्तान से प्रेम होता है और ना ही इनके अंदर देशभक्ति का जोश। देखने वाली बात यह होगी कि क्या ममता सरकार इन घुसपैठियों के साथ मिलकर अपनी सत्ता बचाने में कामयाब हो पाएगी और अगर ऐसा होता है तो कहीं न कहीं राज्य और राष्ट्र को डुबो देने की शुरुआत ममता के इस एक कदम से ही होगी।