सोनभद्र-उत्तर प्रदेश,
इंडिया इनसाइड न्यूज़।
■ सोनभद्र के किसानों को वैज्ञानिक खेती करने एवं आर्थिक आत्मनिर्भर बनने पर दिया जोर
भारत सरकार के जैव प्रोद्योगिकी विभाग द्वारा वित्तपोषित एवं फॉर्ड फाउंडेशन व आई.सी.ए.आर. - आई.आई.वी.आर. की ओर से संचालित बॉयोटेक-किसान परियोजना के लिए चयनित चार आकांक्षी जिलों में से एक सोनभद्र का काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एवं फॉर्ड फाउंडेशन अध्यक्ष प्रोफेसर पंजाब सिंह के निर्देश पर फाउंडेशन के सदस्यों ने 14 दिसम्बर 2020 को जमीनी स्तर पर निरीक्षण किया। इस दौरान कृषि विज्ञान संस्थान, बीएचयू के पूर्व निदेशक प्रोफेसर शिवराज सिंह, भारतीय सब्जी अनुसंधान केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ• नीरज सिंह, काशी हिंदू विश्वविद्यालय के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं परियोजना के सह अन्वेषक डॉ• संतोष कुमार सिंह, फॉर्ड फाउंडेशन के ट्रस्टी डॉ• उमेश सिंह, काशी हिंदू विश्वविद्यालय के जन सम्पर्क अधिकारी प्रोफेसर राजेश सिंह, राजेश्वरी रिसर्च फाउंडेशन के सचिव डॉ• विनोद कुमार सिंह सहित अन्य लोगों ने किसानों से तकनीकी खेती करने एवं अपनाने पर जोर दिया।
टीम ने सर्वप्रथम सोनभद्र के गौरही गांव का निरीक्षण किया। इस अवसर पर फॉर्ड फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रोफेसर पंजाब सिंह एवं कृषि विज्ञान संस्थान, बीएचयू के पूर्व निदेशक प्रोफेसर शिवराज सिंह ने विद्यापति, बाबूलाल, सतेंद्र, उषा देवी आदि किसानों से ऑनलाइन बात कर उनकी समस्याओं, बीज की गुणवत्ता, उत्पादन और बाज़ार आदि मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की।
ततपश्चात सिद्धि गांव में आयोजित किसान संगोष्ठी को ऑनलाइन सम्बोधित करते हुए प्रोफेसर पंजाब सिंह ने कहा कि किसानों को अधिक से अधिक लाभ दिलाने के लिए आज हम प्रयासरत हैं। इसके लिए कुछ जिलों के चयनित गांवो के किसानों को प्रशिक्षित कर उन्हें हम एक प्लेटफॉर्म पर लाने का प्रयास कर रहे हैं। ताकि उन्हें अपनी उपज का अच्छा लाभ मिल सके। इस लिए एफपीओ का एक संघ बनाने की तरफ़ अग्रसर है।
प्रोफेसर शिवराज सिंह ने कहा कि आज किसानों में जागरूकता की काफी कमी है। किसान कैसे जागरूक हों, इसके लिए हम पूरा प्रयास कर रहे हैं ताकि वे नयी तकनीक, नवाचार और योजनाओं से परिचित हो सकें।
भारतीय सब्जी अनुसंधान केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ• नीरज सिंह ने कहा कि आज हमें अपनी सोच बदलने की जरुरत है। इसके लिए किसान नही कृषि उद्यमी होना पड़ेगा। इसमें एफपीओ बहुत बड़ी भूमिका अदा कर सकते हैं। गौरतलब है कि इस कार्यक्रम के अंर्तगत वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं और खेतों के बीच सीधे संबंध की स्थापना पर कार्य किया जा रहा है।
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं बॉयोटेक किसान परियोजना के सह अन्वेषक डॉ• संतोष कुमार सिंह ने कहा कि सभी आकांक्षी जिलों में वैज्ञानिक जाकर किसानों को जागरूक करते हैं। ताकि वह नयी तकनीक एवं उन्नत शील विचारों के जरिए किसानों को खेती में उनकी लागत का अच्छा मूल्य मिल सके। उन्होंने कृषक उत्पादक संगठनों (एफ़.पी.ओ.) द्वारा किसानो का क्लस्टर बनाकर कृषि उत्पाद के निर्यात को बढ़ावा देने की बात कही।
फॉर्ड फाउंडेशन के ट्रस्टी एवं काशी हिंदू विश्वविद्यालय के जन सम्पर्क अधिकारी प्रोफेसर राजेश सिंह ने कहा कि किसानों को परंपरागत खेती करने के साथ ही इस परियोजना के माध्यम से नई तकनीक को अपनाने पर जोर देना है।
फॉर्ड फाउंडेशन के ट्रस्टी डॉ• उमेश सिंह ने कहा कि किसानों के उत्थान के लिए फाउंडेशन सतत प्रयासरत है उन्होंने कहा कि अच्छा काम करने वाले किसानों को फेलोशिप भी दी जाएगी।
इस अवसर पर एफपीओ उमा महेश्वर फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी एवं किसान कल्याण समिति के विनोद कुमार पांडेय, यंग प्रोफेशनल मधुकर पटेल, आदर्श, अमित विश्वास आदि लोग उपस्थित थे।