मुकुल के कारण सोशल मीडिया में हो रही है भाजपा की खिंचाई



रंजीत लुधियानवी, वरिष्ठ पत्रकार, कोलकाता।

नोटबंदी, जीएसटी के बाद मोदी विरोधियों को मुकुल के तौर पर एक बड़ा मुद्दा मिल गया है। तृणमूल कांग्रेस के पूर्व नेता मुकुल राय को लेकर जहां भाजपा में शामिल किए जाने को लेकर सोशल मीडिया पर नरेंद्र मोदी और अमित शाह की अच्छी खासी किरकिरी हो रही है। लोगों की ओर से सवाल पूछे जा रहे हैं कि भ्रष्टाचार मुक्त भारत का निर्माण करने का क्या यही सुगम रास्ता है ?

प्रधानमंत्री और भाजपा अध्यक्ष से लोग इस बारे में सवाल कर रहे हैं। उनका सवाल है कि क्या भाजपा में शामिल होकर मुकुल राय अब भ्रष्टाचार के आरोप से मुक्त हो गए हैं ? कई लोगों की ओर से पश्चिम बंगाल में परिवर्तन लाने के मुकुल के बयान का खासा मजाक उड़ाया गया है।

मुकुल के भाजपा में शामिल होने के बाद से ही ट्वीट करते हुए सोशल मीडिया पर खासे सक्रिय मुहेश लांगा ने लिखा कि नारायण राणे के बाद और एक विवादित नेता भाजपा में शामिल हुए हैं। भ्रष्टाचार का मुकाबला करने का यह अच्छा रास्ता है।
जबकि स्वाति चतुर्वेदी ने लिखा है कि मोदी और शाह भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ना चाहते हैं - राणे, मुकुल को भाजपा में लेकर। यही भारतीय राजनीति को स्वच्छ करने की नई आटोमैटिक मशीन है। अंशुमाल सेल ने लिखा है कि भाजपा में शामिल होने के बाद मुकुल अब राष्ट्ररवादी और देश प्रेमी हैं। इसलिए इस भ्रष्टाचार के सारे आरोपों से आज मुक्त हो गए। जय टिप्पनी का कहा है कि भाजपा के सबसे बड़े सहयोगी दल सीबीआइ की मदद से मुकुल भाजपा में शामिल हुए हैं। अब अचानक ही सीबीआइ को शारदा कांड में मुकुल के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिलेगा। जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कटघरे में खड़ा करते हुए नरेंद्र नाथ मिश्र लिखते हैं कि मित्रों, मुकुल एक बहुत सच्चा व्यक्ति है। उनके खिलाफ शारदा और नारद कांड में शामिल रहने के आरोप बहुत पुरानी बातें हैं। मेहरबानी करके वे फाइलें डिलिट कर दीजिए।

गौरतलब है कि नारायण राणे या सुखराम के भाजपा में शामिल होने पर भाजपा के खिलाफ सोशल मीडिया में इस तरह विरोध की आंधी नहीं दिखाई दी थी। लेकिन मुकुल के भाजपा में शामिल होने पर भाजपा की जमकर किरकिरी हो रही है।
भाजपा के कुछ लोगों का मानना है कि भाजपा विरोधी अभियान में तृणमूल कांग्रेस का हाथ है। हालांकि दूसरी ओर, कुछ लोगों का कहना है कि मोदी-शाह समर्थक कई भाजपा नेता भी मुकुल को लिए जाने के समर्थन में नहीं हैं। कुल मिलाकर मुकुल को दल में शामिल करने के बाद देश भर में जिस तरह भाजपा की किरकिरी हो रही है, यह भाजपा के लिए शुभ संकेत नहीं माना जा रहा है ! खास तौर पर हिमाचल प्रदेश और गुजरात में भ्रष्टाचार को मुद्दा बना कर जिस तरह भाजपा नेताओं की ओर से प्रचार किया जा रहा है - रानायण राणे, सुखराम और मुकुल राय को लेकर जहां भाजपा की भ्रष्टाचार मिटाने के दावे पर सवालिया निशान लग गए हैं।

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