बनारसी लकड़ी के खिलौने को पुनर्जीवित करने का प्रयास



वाराणसी-उत्तर प्रदेश,
इंडिया इनसाइड न्यूज़।

■ बनारसी लकड़ी के खिलौने को पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रहा डीआईसी/अभिकल्प नवप्रवर्तन केंद्र

बनारस शहर में सदियों से बनते आ रहे लकड़ी के खिलौनों की धूम तो हमेश से रही है। लकड़ी के यह खिलौने हमेशा से बच्चों के प्रिय रहे हैं। इन खिलौनों की कलाकारी अद्भुत है। बनारस का यह जीआई प्रोडक्ट सदियों से कलाकारों की एक बड़ी आबादी के रोज़गार एवं आजीविका का साधन भी रहा है। लेकिन तेज़ी से बदलती दुनिया में ब्रांडिंग एवं पैकेजिंग की चमक में पिछड़ने के कारण बनारस की यह अप्रतिम कलाकारी आज की तारीख में फलने-फूलने के बजाय दम तोड़ती नज़र आ रही।

वहीं दूसरी तरफ चीन आदि देशों ने अपने बृहद प्रोडक्शन एवं ब्रांडिंग एवं पैकेजिंग के माध्यम से दुनिया भर में खिलौने के बाजार पर कब्ज़ा कर लिया। आपको जानकर हैरानी होगी कि लकड़ी से बनने वाले परंपरागत खिलौने नॉन-टॉक्सिक होते है जब कि चीन आदि देशों से आयातित प्लास्टिक के सस्ते एवं ज्यादातर खिलौने टॉक्सिक होते हैं जो बच्चों की सेहत के लिहाज से बेहद खतरनाक है। यह बातें डॉ• मनीष अरोड़ा ने अहमदाबाद डिज़ाइन वीक के अंतर्गत खिलौना निर्माण पर केंद्रित एक सत्र के दौरान कही।

इस लाइव आयोजन में उन्होंने काशी के लकड़ी के खिलौने के निर्माण के सबसे बड़े गढ़ खोजवां से खिलौना निर्माण की प्रक्रिया दिखाते हुए कहा कि इस समस्या को सुलझाने के लिए बीएचयू स्थित अभिकल्प नवप्रवर्तन केंद्र काम कर रहा। हमारी यह कोशिश है कि हम बनारस में निर्मित होने वाले इन खिलौनों के लिए अच्छी पैकेजिंग निर्माण में सहायता करें जिससे बनारस का यह उत्पाद न सिर्फ देश बल्कि पूरी दुनिया में अपनी धूम मचाये एवं आत्मनिर्भर भारत की राह अग्रसर करें।

इस दौरान उन्होंने लकड़ी के इन खिलौनों का निर्माण करने वाले कलाकारों गोदावरी सिंह, नरेंद्र सिंह आदि की कला का प्रदर्शन भी किया। गोदावरी सिंह अपने खिलौनों की कलाकारी के लिए प्रधानमंत्री तक से प्रशस्ति पा चुके हैं। उन्होंने कहा की बनारस की इस कला में पूरा सामर्थ्य है कि यह बच्चों को फिर से रिझाए लेकिन आज के ग्लोबलाइजड दुनिया में यह सिर्फ अपनी ब्रांडिंग, पैकेजिंग के कारण अपनी धमक नहीं बना पा रहा।

अभिक्लप नवप्रवर्तन केंद्र के माध्यम से बीएचयू के विद्यार्थी इस समस्या के सामधान की दिशा में काम कर रहे हैं, विशेष तौर पर दृश्य कला संकाय में शोधार्थीनी शिवांगी गुप्ता इस दिशा में काफी बेहतरीन काम कर रही हैं। हमें पूरी उम्मीद है कि हम अपने इस प्रयास में सफल होंगे। हम वापस से इन खिलौनों की धूम दुनिया में मचा पाने में सहायक होंगे।

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