भद्र लोक की वर्तमान मुख्यमंत्री के बोल...



कोलकाता-प• बंगाल,
इंडिया इनसाइड न्यूज़।

भारतवर्ष के पश्चिम बंगाल की विशेष पहचान एक भद्र लोक की भी है। परन्तु आज का वातावरण बिल्कुल विपरीत है। इसका श्रेय भी राजनीतिज्ञों को जाता है। ऐसा स्वीकार किया जाता रहा है कि भद्र लोक में अभद्र भाषा का व्यवहार स्वीकार नहीं है। हो सकता है कि 21वीं सदी में इस अभद्र भाषा के चलन को उकेरा गया हो और आज एक ट्रेंड् के रूप में हम भद्र लोगों के सामने चुनावी नृत्य कर रहा है।

एक बार ममता बनर्जी ने लालू यादव से कहा था कि "लालू जी योर पीपल डोन्ट वोट मी"। शायद उस वक्त बंगाल में बिहारियों का वोट उन्हें नहीं मिलता रहा होगा। और जब समूचे पश्चिम बंगाल ने झार कर वोट दिया तो उनके नेतृत्व में उनके दल ने लाल किला ही ढहा दिया। इतिहास भी रचा। हालांकि उस वक्त का नजारा भी भिन्न था। लोगों में उनके प्रति एक गहरा लगाव साक्षात दिखाई दे रहा था। परन्तु आज की परिस्थिति की बात करें तो यकीनन पश्चिम बंगाल की वर्तमान मुख्यमंत्री व तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के प्रति सकारात्मक माहौल प्रतीत नहीं हो रहा। उत्तर प्रदेश के सत्ता से बेदखल हुए अखिलेश यादव तथा बिहार के सिंहासन से दूर हुए तेजस्वी यादव ने ममता बनर्जी को अपना समर्थन भेंट दिया है। कतार में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल भी हैं।

2014 के चुनाव प्रचार दौरान ममता बनर्जी ने नरेन्द्र मोदी को दंगाबाज बोल के साथ संबोधित करते हुए उन्हें रस्सी से बांधकर समुद्र में फेकने की बात कही थी। आजकल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बांग्ला भी बोल रहे हैं। पिछले कई कार्यक्रमों में प्रधानमंत्री ने संस्कृत के बेहद करीब रही भाषा बांग्ला में अपने वक्तव्यों को रखते आ रहे हैं तथा पश्चिम बंगाल की संस्कृति व परम्पराओं के महत्व को लोगों से साझा कर रहें हैं। इस पर भी बांग्ला की अगुवाई करने वाली पश्चिम बंगाल की वर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भिनक जाती हैं और गुस्से से जड़ने को आतुर हो उठती हैं।

चुनाव माहौल में दीदी के बोल "खेला होबे" ने भी तो जोड़ पकड़ा है। तभी कहें कि सीबीआई और बंगाल पुलिस ने भी क्यों ताल ठोका है। धर-पकड़ व पूछताछ जारी है। एक ओर ड्रग्स मुद्दा है तो दूसरी ओर काला धन छुपा हुआ है।

दीदी के बोल में बांग्ला क्लासिकल वर्ड ने भी स्थान बना लिया है तभी तो उन्होंने इस देश के आज के दो नेताओं को "होदल कुत कुत तथा टिमभूत किमाकार" शब्दों से सांस्कृतिक जामा पहनाने का प्रयास किया है।

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