--एकलव्य कुमार,
कोलकाता-पश्चिम बंगाल, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
■ बंगाल चुनाव: जनता के पाले में है गेंद
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी है। मुख्य प्रतिद्वंद्वी पार्टियां तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच इस बार कांटे की टक्कर होगी। वहीं अन्य विपक्षी पार्टियां भी जोर आजमाइश में अपनी पूरी ताकत झोंक चुकी है। खबरिया चैनलों से लेकर सोशल मीडिया तक बंगाल चुनाव की खबरें छाई हुई हैं। एकतरफ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने पैर की चोट के जरिये जनता की संवेदना को वोट में तब्दील करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहीं हैं। वहीं भाजपा नेताओं की फौज जय श्री राम के धार्मिक नारे के सहारे पर हिन्दू विरोधी होने का आरोप मढ़ रही है। ममता बैनर्जी भी जानतीं हैं कि इस बार का चुनाव आसान नहीं होने वाला है। सत्ताधारी पार्टी जानती है कि मुस्लिम वोटों एआईएमआईएम, कॉंग्रेस, वाम दलों और भाजपा की भी नजर है। यदि ऐसे में उसके पारंपरिक वोटों का बिखराव टीएमसी को सत्ता से दूर कर सकती है। बंगाल में हिंदीभाषियों की संख्या भी खासी है जिसमें हर धर्म के लोग शामिल हैं। भाजपा की नजर मुख्य रूप से इन्हीं मतदाताओं पर है।
■ समझदार हो चुकी है जनता
अभी किस पार्टी को सत्ता मिलेगी यह कहना जल्दबाजी होगी। सोशल मीडिया चैनलों के रिपोर्टर भी पूरे जोश से जनता के बीच ओपिनियन पोल में जुटे हैं। सोशल मीडिया पर दिखाए जाने वाले इस तरह के वीडियो से किसी पार्टी की हार-जीत का अनुमान लगाना तराजू पर मेंढक तोलने जैसा है। ऐसा इसलिए क्योंकि किसी खास पार्टी के समर्थकों से पूछे गए सवाल का जवाब निश्चित तौर पर एक जैसा ही होगा। वहीं अब जनता समझदार हो चुकी है। वह कैमरे की मौजूदगी में माहौल को समझकर ही तय करती है कि उसे क्या कहना चाहिए। जनता जानती है कि इस तरह के वीडियो पर पार्टी कार्यकर्ताओं की खास नजर होती है। ऐसे में वह किसी से पंगा लेना नहीं चाहती।
बंगाल के चुनावी समर में पार्टियां एक दूसरे पर कितने भी शब्द वाण चला ले, लुभावने वायदे कर ले, लेकिन किसे बहुमत मिलेगा यह जनता तय करेगी क्योंकि गेंद अब उसके पाले में है।