'कोरोना पश्चात् दुनिया में भारत के लिए चुनौतियाँ एवं संभावनाएं' विषयक व्याख्यान का आयोजन



वाराणसी-उत्तर प्रदेश,
इंडिया इनसाइड न्यूज़।

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के विज्ञान संकुल सभागार में काशी मंथन की ओर से “कोरोना पश्चात् दुनिया में भारत के लिए चुनौतियाँ एवं संभावनाएं” विषयक व्याख्यान का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता विदेश मामलों के जानकार एवं नीति आयोग तथा अटल इनोवेशन मिशन के बोर्ड मेम्बर डॉ. विजय चौथाईवाले मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. विजय चौथाईवाले, कार्यक्रम के समन्वयक प्रो. आर. एन. राय, सह-समन्वयक डॉ. पंकज सिंह एवं काशी मंथन के संयोजक डॉ. मयंक नारायण सिंह ने मालवीय जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया।

इस अवसर पर स्वागत उद्बोधन एवं विषय के बारे में बताते हुए डॉ. मयंक नारायण सिंह ने कहा कि कोरोना ने हम सभी के जीवन पर बहुत असर डाला है। देश में डेढ़ लाख से ज्यादा और दुनिया भर में 27 लाख से ज्यादा लोगों की मौत कोरोना के कारण हुई। कोरोना का यह काल देश-दुनिया के लिए एक बेहद मुश्किल भरा दौर था। परन्तु इस मुश्किल भरे दौर में भी मानवीय जिजीविषा का अद्भुत प्रदर्शन देखने को मिला।

बतौर मुख्य वक्ता उद्बोधन देते हुए डॉ. विजय चौथाईवाले ने कहा कि दुनिया के इतिहास में कुछ ऐसी घटनाएं होती हैं जो इतिहास के कालखंड के विभाजन के रूप में महत्वपूर्ण होती हैं। जैसे विश्वयुद्ध, ठीक उसी प्रकार से तरह कोरोना भी इतिहास के कालखंड के विभाजन के रूप में बेहद महत्वपूर्ण निर्धारण तत्व सिद्ध होने वाला है। हम आने वाले समय में कोरोना पूर्व एवं कोरोना पश्चात दौर की चर्चा करेंगे। कोरोना ने ना सिर्फ समूचे विश्व के स्वास्थ्य जगत पर असर किया है बल्कि यह आर्थिक, राजनीतिक, सामरिक क्षेत्रों में भी बदलाव का बड़ा कारक बनकर उभरा है। अभी हम इसके प्रभाव काल से ही गुज़र रहे हैं, जब यह महामारी वास्तव में ख़त्म हो जाएगी तब हमें इसके कारण हुए बदलावों की वास्तविक स्थिति का आंकलन हो पायेगा। इसे हम अपने दैनिक जीवन में आये बदलावों से समझ सकते हैं पिछले एक साल में मास्क हमारे जीवन का जरुरी हिस्सा हो गया है। वर्क फ्रॉम होम का चलन बढ़ा है, यह ‘न्यू नार्मल’ हो गया है। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों में शुमार टीसीएस जैसी कंपनियां अपने यहाँ वर्क फ्रॉम होम को कोरोना बाद भी जारी रखने का निर्णय कर चुकी हैं। इस तरह से कई तरह के बदलाव आ रहे हैं जो दिख त्वरित रहें हैं परन्तु वह दीर्घकालिक होने वाले हैं। कोरोना ने वैश्विक राजनीति पर बड़ा प्रभाव डाला है। ट्रम्प की राष्ट्रपति पद से विदाई के कारणों में कोरोना से उभरी परिस्थितियों को सही तरह से नहीं संभाल पाना एक बड़ा कारण है। हालाँकि कोरोना के इस परिदृश्य में भारत के पास अवसर भी उभरे हैं। हाल ही में चीन के खिलाफ़ अघोषित रूप से अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत ने क्वाड के रूप में ऑनलाइन सम्मेलन किया।

कोरोना काल के दौरान भारत में आत्मनिर्भर भारत का नारा बुलंद हुआ। जहाँ हम पिछले मार्च तक देश में एक भी पीपीई किट निर्माण नहीं करते थे वहीँ हम इसके बड़े निर्यातक बनकर उभरे। कोरोना काल के दौरान हमने बड़े पैमाने पर दवाइयों का निर्यात किया जिनमें हाइड्रओक्सीक्लोरोक्वीन और पैरासिटेमोल का बड़े पैमाने पर निर्यात्त हुआ। इसके साथ ही साथ कोरोना के वैक्सीन निर्माण के पश्चात भारत इसका भी बड़ा निर्यातक बनकर उभरा है। देश में दो वैक्सीन का उत्पादन हो रहा है। जिसका छह हफ़्तों में साठ से भी ज्यादा देशों को छह करोड़ डोजों का निर्यात किया जा चुका है।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. मयंक नारायण सिंह ने डॉ विजय चौथाईवाले से सवाल-जवाब के सत्र में श्रोताओं के सवाल पूछे जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में भारत की विदेश नीति की तारीफ करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने विदेश नीति की एक नई लकीर खींची। पाकिस्तान को लेकर जहाँ पहले अरब देश भारत की मुखालफत करते थे वही अब भारत के पक्ष में खड़े नज़र आते हैं। मोदी जी ने भारत की आवाज़ को वैश्विक मंचों पर बुलंद किया है।

इस अवसर पर कार्यक्रम में उपस्थित छात्र अधिष्ठाता प्रो. एम. के. सिंह ने आशीर्वचन दिए। प्रो. आर. एन. राय ने मुख्य वक्ता को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। उनके साथ उपस्थित उनकी पत्नी डॉ. ज्योति चौथाईवाले को भी अंगवस्त्र ओढाकर छात्रा अदिति सिंह ने सम्मानित किया। इस अवसर पर कार्यक्रम का संचालन चंद्राली मुख़र्जी ने किया, धन्यवाद् ज्ञापन खुश्बू मिश्र ने किया। इस अवसर पर प्रो. दिनेश चन्द्र राय, प्रो. सुनीत कुमार सिंह, प्रो. टी पी चतुर्वेदी, डॉ दिव्या सिंह, डॉ मनोज शाह, डॉ ओम प्रकाश, डॉ. धीरेन्द्र राय, डॉ सुमिल तिवारी आदि उपस्थित रहे।

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