ललक ऐसी की पूरी लाईब्रेरी ही पढ़ डाली, नहीं रहे मनु शर्मा



--- हरेन्द्र शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार, वाराणसी।

वाराणसी, 08 नवम्बर। हनुमान प्रसाद शर्मा उर्फ मनु शर्मा का लंबी बीमारी के बाद आज देहावसान हो गया। बुधवार की सुबह 89 वर्षीय श्री शर्मा ने अपने पियरी स्थित आवास पर अंतिम सांस ली। मनु शर्मा ने महाभारत कालीन चरित्रों पर कई पुस्तकें और उपन्यास की रचना की थी। इसमें सबसे चर्चित 8 खंडों में 3 हजार पृष्ठ की श्रीकृष्ण की आत्मकथा रही। इसके अलावा उन्होंने कर्ण की आत्मकथा भी लिखी थी। मनु शर्मा का जन्म 1928 को शरद पूर्णिमा को फैजाबाद के अकबरपुर में हुआ था। उनकी शिक्षा-दीक्षा काशी में ही हुई थी। उन्होंने दारानगर स्थित डीएवी स्कूल से इंटर की शिक्षा ग्रहण की थी। नागरी प्रचारिणी सभा के पूर्व प्रधानमंत्री सुधाकर पांडेय, आदर्श इंटर कालेज के पूर्व प्रधानाचार्य पंडित दीनानाथ चौबे उनके खास मित्रों में से रहे। मनु शर्मा ने डीएवी कॉलेज में बतौर आदेशपालक कार्य शुरु किया था। उनकी कार्यकुशलता को देखकर तत्कालीन प्राचार्य स्व• कृष्णदेव प्रसाद गौड़ उर्फ बेढब बनारसी ने उन्हें विद्यालय के पुस्तकालय में सहायक पद पर नियुक्त करा दिया। वही से उनको पढ़ने की ललक जगी और उन्होंने पूरी लाईब्रेरी ही पढ़ डाली । लंबे समय तक नागरी प्रचारिणी सभा से भी जुड़े रहे।

मनु शर्मा ने अपना पहला उपन्यास कर्ण की आत्मकथा लिखा जो काफी चर्चित हुई। उसके बाद उन्होंने एक के बाद एक द्रोण की आत्मकथा, द्रोपदी की आत्मकथा, के बोले मां तुमि अबले, छत्रपति, एकलिंग का दीवाना, गांधी लौटे काफी विख्यात हुए। उनके कई कहानी संग्रह और कविता संग्रह भी आए। श्री शर्मा का उपन्यास कृष्ण की आत्मकथा आठ खण्डों में है।

मनु शर्मा को उतर प्रदेश सरकार के सर्वोच्च सम्मान यश भारती से तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने सम्मानित किया था। उन्हें गोरखपुर विविद्यालय से मानद डीलिट• की उपाधि भी हासिल हुई है। वाराणसी के सांसद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब काशी के अस्सीघाट से राष्ट्रव्यापी स्वच्छता अभियान की शुरूआत की तो मनु शर्मा को अपने नौ रत्नों में शामिल किया था। पीएम मोदी ने उन्हें पद्मश्री के सम्मान से भी नवाजा।

श्री शर्मा के परिवारी जनों ने बताया कि सुबह साढ़े छह बजे वाराणसी के पियरी स्थित आवास पर उनका निधन हुआ। उनका अंतिम संस्कार गुरुवार को सुबह आठ बजे मणिकर्णिका घाट पर होगा। श्री शर्मा के निधन की खबर से पूरे साहित्य जगत में शोक की लहर दौड गयी। प्रदेश के कई मंत्री, जिलाधिकारी, साहित्यकार, पत्रकार एवं शुभचिंतकों का उनके आवास पर अपने महरूम साहित्यकार को श्रद्धांजलि देने का तांता लगा रहा।

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