• भारत में प्रति घंटा 137 लोग तंबाकू सेवन से अपनी जान गंवा रहे
• पश्चिम बंगाल में 238 लोग दम तोड़ देंगे विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर
नई दिल्ली 31 मई। दुनिया भर में आज का दिन (31मई) विश्व तंबाकू निषेध दिवस के रुप में मनाया जा रहा है, और इसी 24 घंटे के दौरान देशभर में 3288 लोग तंबाकू व अन्य धूम्रपान उत्पादों के कारण कैंसर अन्य बीमारियों से दम तोड़ देंगे। वहीं पश्चिम बंगाल में विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर करीब 238 लोग अपनी जान गंवा देंगे। इसकी रोकथाम के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ ) ने तंबाकू व अन्य धूम्रपान उत्पादों से होने वाली बीमारियों और मौतों की रोकथाम को ध्यान में रखकर इस वर्ष 2017 का थीम ‘‘ विकास में बाधक तंबाकू उत्पाद ’’ रखा है।
डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों के अनुसार एक सिगरेट जिंदगी के 11 मिनट व पूरा पैकेट तीन घंटे चालीस मिनट तक छीन लेता है। तंबाकू व धूम्रपान उत्पादों के सेवन से देशभर में प्रति घंटा 137 लोग अपनी जान गंवा रहे है। वहीं दुनिया में प्रति 6 सेकेंड में एक व्यक्ति की मौत हो रही है। ये आकंडे हम सभी के लिए बहुत ही चिंताजनक है।
वर्ष 2010 में वैश्विक वयस्क तंबाकू सर्वेक्षण (गेट्स) के अनुसार पश्चिम बंगाल में 36.3 प्रतिशत करीब 2 करोड़ 47 लाख 69 हजार 943 लोग किसी ना किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं और इनमें से 85 हजार 500 लोगों की मृत्यु तंबाकू से संबधित रोगों के कारण प्रतिवर्ष हो जाती है। भारत में 48 फीसदी पुरुष और 20 फीसदी महिलाएं किसी न किसी रुप में तंबाकू का प्रयोग करते है। वहीं देश की 20 प्रतिशत महिलाएं सिगरेट एवं अन्य धूम्रपान उत्पादों के सेवन का शौक रखती हैं इनमें देश के साथ-साथ प्रदेश की शहरी व ग्रामीण महिलाएं भी शामिल है। गेटस सर्वे के अनुसार देश की दस फीसदी लड़कियेां ने स्वयं सिगरेट पीने की बात को स्वीकारा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपेार्ट ग्लोबल टोबेको एपिडेमिक पर अगर नजर डालें तो पता चलता है कि महिलाओं के बीच तंबाकू का सेवन निरंतर बढ़ता जा रहा है। इनमें किशोर व किशोरियां भी शामिल हैं। जब 2010 में यह सर्वे हुआ तब 35 प्रतिशत लोग किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन कर रहे थे और आज 2017 में यह आंकड़ा बड़े पैमाने पर बढ़ा होगा।
किशोर उम्र के जो लड़के लड़कियां धूम्रपान करते हैं उनमें से 50 प्रतिशत लोग तंबाकू से जुड़ी बीमारियों से पीडि़त होकर मर जाते हैं। औसतन धूम्रपान करने वाले व्यक्ति की आयु धूम्रपान करने वाले व्यक्ति की तुलना में 22 से 26 प्रतिशत तक घट जाती है। पश्चिम बंगाल में प्रतिदिन लगभग 438 नए लोग तंबाकू की लत का शिकार हो रहे हैं। यंहा पर किशोरों में तंबाकू का सेवन शुरू करने की औसत आयु 17 साल है जबकि किशोरियों में यह आयु 14 साल है।
वैश्विक वयस्क तंबाकू सर्वेक्षण-भारत 2010 (जीएटीएस) के अनुसार रोकी जा सकने योग्य मौतों एवं बीमारियों में सर्वाधिक मौतें एवं बीमारियां तंबाकू के सेवन से होती हैं। विश्व में प्रत्येक 10 में से एक वयस्क व्यक्ति की मृत्यु के पीछे तंबाकू सेवन ही है। विश्व में प्रतिवर्ष 55 लाख लोगों की मौत तंबाकू सेवन के कारण होती है। विश्व में तंबाकू सेवन के कारण हुई कुल मौतों का लगभग पांचवां हिस्सा भारत में होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि सन् 2050 तक 2.2 अरब लोग तंबाकू या तंबाकू उत्पादों का सेवन कर रहे होंगे।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) फ्रेमवर्क कन्वेंशन फोर टोबेको कंट्रोल में दुनिया भर के 178 देशों ने अपने अपने देश में तंबाकू नियंत्रण पर नीतियां बनाने पर अपनी सहमति जताई थी। जिसके तहत इन उत्पादों पर टैक्स बढ़ोतरी सहित सभी तरह के प्रयास जो कि इसके उपयेाग व बिक्री को कम करते हो। लेकिन इस नीति पर भी देश भर में पूरी अमल नहीं हो रहा जिसके चलते इनका प्रचलन बढ़ता जा रहा है।
वॉयस ऑफ टोबेको विक्टिमस के पैटर्न व नारायणा सुपर स्पेशलिटी अस्प्ताल के कैंसर रोग विशेषज्ञ डा० सोरव दता ने बताया कि तंबाकू उद्योग द्वारा तंबाकू की दुनिया के प्रति युवकों को आकर्षित करने के प्रतिदिन नए नए प्रयास किये जा रहे है। युवा अवस्था में ही उन्हें पकड़ो’ उनका उद्देश्य है, तंबाकू उत्पादों को उनके समक्ष वयस्कता, आधुनिकता, अमीरी और वर्ग मानक और श्रेष्ठता के पर्याय के रूप में पेश किया जाता है जबकि प्रदेश में तंबाकू उत्पादों के सेवन से मरने वालों की संख्या में प्रतिदिन बढ़ोतरी हो रही है।
उन्होंने बताया कि हाल ही में हुए रिसर्च में सामने आया है कि संभवतया तंबाकू का सेवन करने वालों में जीन में भी आंशिक परिवर्तन होते है जिससे केवल उस व्यक्ति में ही नही बल्कि आने वाली पीढि़यों में भी कैंसर होने की आशंका बढ़ जाती है। इसके साथ ही इन उत्पादों के सेवन से जंहा पुरुषों में नपुंसकता बढ़ रही है वहीं महिलाओं में प्रजनन क्षमता भी कम होती जा रही है। डा० दता ने बताया कि तंबाकू चबाने से मुंह, गला, अमाशय, यकृत और फेफड़े के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। तंबाकू जनित रोगों में सबसे ज्यादा मामले फेफड़े और रक्त से संबंधित रोगों के हैं जिनका इलाज न केवल महंगा बल्कि जटिल भी है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान (आईसीएमआर) की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया है कि पुरुषों में 50 प्रतिशत और स्त्रियों में 25 प्रतिशत कैंसर की वजह तम्बाकू है। इनमें से 90 प्रतिश्त में मुंह का कैंसर हैं। धुआं रहित तम्बाकू में 3000 से अधिक रसायनिक यौगिक हैं, इनमें से 29 रसायन कैंसर पैदा कर सकते हैं। मुंह के कैंसर के रोगियों की सर्वाधिक संख्या भारत में है। गुटका, खैनी, पान, सिगरेट के इस्तेमाल से मुंह का कैंसर हो सकता है।
पश्चिमी बंगाल सरकार को इस प्रकार के तंबाकू उत्पादों पर रोक लगा देना चाहिए जो जिनके कारण प्रतिवर्ष लाखों लेागों की जान जा रही है। ये सभी मौतें कई परिवारों को उजाड़ देती है वहीं सरकारों को भी इनके स्वास्थ्य पर लाखों रुपये खर्च करने पड़े है।
संबंध हेल्थ फाउंडेशन के संजय सेठ ने बताया कि सरकार को सम्पूर्ण राज्य में कोटपा एक्ट को कठोरता से लागू करना चाहिए ताकि बच्चे व युवाओं की पहुंच से इसे दूर किया जा सके। इसके साथ ही जेजे एक्ट पर भी काम करना चाहिए ताकि कोई भी वेंडर कम उम्र के बच्चों से इस प्रकार के उत्पादों को विक्रय नहीं करवा सकें। सेठ के अनुसार सभी आधुनिक और प्रगतिशील राज्यों को अपने नागरिकों के लिए एक स्वस्थ वातावरण प्रदान करने के लिए कोटपा कानून को कड़ाई से लागू किया जाना अति आवश्यक है। कर्नाटक और केरल जैसे राज्यों की पुलिस ने तंबाकू व अन्य धूम्रपान उत्पादों की खपत को कम करने में सराहनीय भूमिका निभाई है। कई राज्यों की पुलिस ने बच्चों में तम्बाकू की खपत की रोकथाम के लिए सभी शैक्षणिक परिसरों को तंबाकू मुक्त घोषित करने में सराहनीय भूमिका निभाई है।
उन्होंने बताया कि भारत में 5500 बच्चे हर दिन तंबाकू उत्पादों के सेवन की शुरुआत करते हैं और वयस्क होने की आयु से पहले ही तम्बाकू के आदी हो जाते हैं जबकि तंबाकू सेवन करने वाले केवल तीन प्रतिशत लोग ही इस लत को छोड़ने में सक्षम हैं इसलिए यह आवश्यक है कि हम बच्चों को तम्बाकू सेवन की पहल करने से ही रोके।
गौरतलब है कि विश्व बैंक ने भी प्रस्तावित किया है कि विकासशील देशों में तंबाकू पर कर 75 से 100 प्रतिशत तक बढ़ाये जाने चाहिए ताकि इसका उपयोग कम हो सके। आज तम्बाकू निषेध दिवस पर हम सबको तंबाकू उत्पादों को अलविदा कहने का संकल्प लेना चाहिए ताकि आने वाले समय में हम इन आंकड़ेां को बदल पाये।