सम्पूर्ण प्रणाली में मूल्य वर्द्धन से सेल प्रतिस्‍पर्धा में बाजी पलट सकती है : सेल चेयरमैन



08 नवम्बर। मुख्य रूप से मूल्य वर्द्धित उत्पादों पर ध्यान केन्द्रित करते हुए भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड (सेल) गुणवत्ता और मात्रा पर फोकस कर बाजार में गुणवत्तापूर्ण उत्पादों और विशेष उत्पादों की एक श्रेणी पेश करना चाहती है। मंगलवार को सेल के दुर्गापुर इस्‍पात संयंत्र (डीएसपी) के कर्मचारियों के साथ वार्तालाप में सेल के चेयरमैन पी• के• सिंह ने कहा कि आजकल बाजार में कड़ी प्रतिस्‍पर्धा के दौर में केवल अधिक मात्रा में उत्‍पादन करने के बजाय कंपनी के उत्पादों एवं प्रक्रियाओं के मूल्य वर्द्धन और बाजार की मांग के अुनरूप उत्‍पादन करने से सेल प्रतिस्पर्धा में बाजी पलट सकती है। उन्‍होंने कहा कि दुर्गापुर इस्‍पात संयंत्र में स्‍थापित 1 एमटीपीए (एक मिलियन टन वार्षिक) की उत्‍पादन क्षमता वाली मध्‍यम संरचनात्‍मक मिल (एमएसएम) विश्‍वस्‍तरीय संरचनात्‍मक इस्‍पात उत्‍पाद बनाने में सक्षम है जिनकी भारत में क्रियान्वित की जा रही और आगामी इंफ्रा तथा निर्माण परियोजनाओं में भारी मांग है। श्री सिंह ने यह भी कहा कि रेलवे अगले पांच वर्षों में चरणबद्ध रूप से एलएचबी डिब्‍बे (कोच) बनाना चाहती है। नए एलएचबी रेलवे डिब्‍बों के लिए पहियों की प्रामाणिकता का परीक्षण दुर्गापुर इस्‍पात संयंत्र में अंतिम चरण में है और पहियों का धातु संबंधी परीक्षण पहले ही पूरा किया जा चुका है।

दुर्गापुर इस्‍पात संयंत्र में स्थापित मध्‍यम संरचनात्‍मक मिल में पैरलल फ्लैंज बीम, कड़ी, चैनल्‍स और एंगल्‍स का उत्‍पादन हो रहा है जिनका उपयोग मुख्‍यत: आधारभूत संरचनाओं और निर्माण कार्यों में किया जाता है तथा उन्‍हें आधारभूत संरचना परियोजनाओं, मेट्रो कनेक्टिविटी और उन्‍नत निर्माण संबंधी गतिविधियों में शीघ्रता लाने के लिए महत्‍वपूर्ण माना जाता है। श्री सिंह ने कहा कि ऐसी गुणवत्‍ता वाली संरचनाओं के लिए बढ़ी हुई मांग को पूरा करने के लिए इन उत्‍पादों की बहुत आवयश्‍कता है। कंपनी इन उत्‍पादों की मांग वाले बाजारों की भी तलाश कर रही है। दुर्गापुर इस्‍पात संयंत्र को 7.5 लाख टन मध्यवर्ती ठोस इस्पात उत्पादों (सेमी) का उत्‍पादन करने के लिए स्थापित किया गया है। उन्‍होंने कहा कि सेमी संप्रेषण लाइन टावरों (टीएलटी) और ढलाई क्षेत्रों में भी संभावनाओं की तलाश की जाएगी।

अनुसंधान और विकास तथा उन्नत परियोजना डिजाइन के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि आरडीसीआईएस और इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी केन्द्र इस संयंत्र के लिए मूल्य वर्द्धित उत्पादों के विकास में और अधिक योगदान करेंगे।

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