'स्टॉप' चाइल्ड लेबर' के लिए गरीबी से लड़ना होगा



हावड़ा-प• बंगाल,
इंडिया इनसाइड न्यूज़।

हर वर्ष 12 जून को "नो चाइल्ड लेबर डे" का विश्वभर में पालन किया जाता है। बता दें कि संस्था संकल्प टुडे बाल श्रम से सम्बंधित कानून और बच्चों के अधिकार के प्रति जागरुकता का पाठ लोगों के बीच मे पढ़ाती है।

बाल श्रम हमारे देश और समाज के लिए बहुत ही गम्भीर विषय है। समाज के सभी लोगों को अपनी नैतिक जिम्मेदारियाँ समझना चाहिए। बाल मजदूरी को जड़ से उखाड़ फेंकना देश के लिए एक चुनौती है क्योंकि बच्चों के माता-पिता ही बच्चों से कार्य करवाने लगे है। आज हमारे देश में किसी बच्चे को कठिन कार्य करते हुए देखना आम बात हो गई है।

बाल मजदूरी का सबसे बड़ा कारण हमारे देश में गरीबी का होना है। गरीब परिवार के लोग अपनी जीविका चलाने में असमर्थ होते हैं इसलिए वे अपने बच्चों को बाल मजदूरी के लिए भेजते है। शिक्षा के अभाव के कारण अभिभावक यही समझते हैं कि जितना जल्दी बच्चा कमाना सीख जाए उतना ही जल्दी उनके लिए अच्छा होगा। वहीं कुछ अभिभावक लालची प्रवृति के होते हैं, जोकि स्वयं कार्य करना नहीं चाहते और अपने बच्चों को चंद रुपयों के लिए कठिन कार्य करने के लिए भेज देते है।

संकल्प टुडे के सचिव इम्तियाज़ भारतीय का कहना है कि बाल श्रम हमारे समाज के लिए एक अभिशाप है। बाल श्रम को खत्म करने के लिए सबसे पहले हमें अपने सोच को बदलना होगा। बाल श्रम का अंत करने के लिए अपने घरों या दफ्तरों में किसी भी बच्चे को काम पर नहीं रखना होगा। बाल मजदूरी को खत्म करने के लिऐ हमे गरीबी से लड़ना होगा और उनके बुनियादी जरुरतों को पूरा करना होगा।

वहीं संस्था के अध्यक्ष डॉ• सी पी वर्मा ने कहा कि बाल श्रम को रोकने के लिए और सख्त कानून बनाना होगा।

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