--- प्रकाश पाण्डेय, विशेष संवाददाता, पश्चिम बंगाल।
कोलकाता शहर का दिल 'धर्मतल्ला', का अपना ही इतिहास है। यह इलाका कई वजहों से खास रहा है। शहर के मध्य में स्थित होने की वजह से ज्यादातर लोग खरीददारी करने के लिए यहां आते हैं। अंग्रेजी शासनकाल से ही यह इलाका मार्केटिंग के लिए जाना जाता रहा है। इसी इलाके में शहीद मीनार और ब्रिगेड ग्रांउड भी है जहां से पूर्व मुख्यमंत्री बी• सी• राय, ज्योति बसु शरीखे दिग्गज राजनेताओं ने हुंकार भरी और परिवर्तन की मशाल जलायी।
ममता बनर्जी ने इसी धर्मतल्ला से वाम विरोध शुरू किया था और विरोध की आंधी की रफ्तार तले वाम किला धवस्त कर बंगाल की सत्ता पर काबिज हुई। लेकिन दीदी की नीतियों और तंत्र संचालन की पद्धति ने उन्हें जनता के बीच लोकप्रिय से अलोकप्रिय बना दिया। राज्य की जनता जिस सोच के साथ उन्हें सत्ता सौंपी उसपर वो खरा नहीं उतर पायी और आज उनका चौतरफा विरोध शुरू हो गया है। सिंडिकेट राज, शारदा घोटाला, नारदा घोटाने ने उनके व उनके नेताओं की पोल खोलकर रख दी है। जिस परिवारवाद और भाई भतीजावाद की वो विरोधी कही जाती थी आज वो खुद उसी की चपेट में हैं। जिसका नतीजा है कि उनके कभी सहयोगी साथी रहे मुकुल राय उनका साथ छोड़ अब भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो चुके हैं।
भाजपा में शामिल होने के बाद धर्मतल्ला में अपने पहले जनसभा को संबोधित करते हुए मुकुल ने दीदी और उनके सांसद भतीजे अभिषेक बनर्जी पर कई गम्भीर आरोप लगाए। मुकुल ने कहा कि दीदी ने बंगाल में दुर्गा और लक्ष्मी पूजा बंद करा दी और अब अख्लियत की सियासत कर रही हैं। आगे उन्होंने कहा कि असल में तृणमूल एक सियासी पार्टी न होकर एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बन गई है। लोगों की हुजूम को देख यह तो साफ हो गया कि लोग अब तृणमूल का विकल्प भाजपा को मान रहे हैं और यूं ही चलता रहा तो साल 2021 में भाजपा यहां सरकार बनने की स्थिति में होगी।
राज्य की अवाम डेंगू की डंक से बेहाल मर रही है। लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को चिंता नहीं है। लोग इस जानलेवा बीमारी से परेशान है पर तृणमूल के स्थानीय पार्षद झाड़ू की जगह बम चलाने की बात करते हैं।
राज्य में हाल ही में फीफा अंडर 17 फुटबॉल टूर्नामेंट हुआ। टूर्नामेंट को विश्व बांग्ला ग्रुप ने स्पॉन्सर भी किया। आप शायद ही विश्व बांग्ला ग्रुप के बारे में जानते होंगे ? और नहीं जानते को जान लीजिए कि ये कोई सरकारी संस्था नहीं है बल्कि यह ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी का ग्रुप है। ठीक इसी प्रकार जागो बांग्ला तृणमूल का माउथपीस है लेकिन, इसको अभिषेक का ग्रुप विश्व बांग्ला ही चलाता है।
खैर, इन सभी स्थितियों को समझते हुए ममता की माया से बंगाल को मुक्ति दिलाने के लिए केंद्रीय भाजपा कमिटी एक ऐसे चेहरे की तलाश में है जो दीदी की दादागीरी का मुंहतोड़ जवाब दे सके। कल और आज की स्थिति का तुलनात्मक अध्ययन किया जाये तो साफ परिलक्षित होगा कि राज्य में सियासी समीकरण बदल रहा है साथ ही भाजपा का दखल भी दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। जिसको देखते हुए केंद्रीय कमिटी चाहती है कि राज्य के सियासी जंग को हवा देने के लिए दीदी बनाम "द्रोपदी" की किरदार से चर्चित हुई रूपा गांगुली की लड़ाई खड़ी कर स्थिति को और मजबूत बनाया जाए।
पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को रूपा गांगुली में मजबूत नेतृत्व दिख रही है जिसकी वजह से वो उन्हें प्रमोट करना चाहते हैं। सूत्रों की माने तो शाह बंगाल में भाजपा को चुस्त-दुरुस्त करने के मकसद से विचार विमर्श भी शुरू कर चुके हैं। गौर करने वाली बात यह है कि आगामी चुनावों को देखते हुए शाह नई रणनीति के तहत ऐसा कर रहे हैं। साल 2018 में पंचायत, 2019 में लोकसभा, 2020 में नगर निकाय और 2021 में विधानसभा चुनाव होना है। शाह की रणनीति के अव्वल मोहरे की चर्चा करें तो वह मुकुल राय हैं जो तृणमूल कांग्रेस से नाता तोड़ अब भाजपा में शामिल हो चुके हैं और आगामी दिनों में दीदी के खिलाफ एक मजबूत जंग खड़ा करने का माद्दा रखते हैं।
वहीं बंगीय सियासी बाजार की चर्चा करें तो खबर यह भी है कि कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी भी दिसंबर के आखिरी तक भाजपा का दामन थाम सकते हैं। यदि अधीर भाजपा में शामिल होते हैं तो इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि पार्टी की ताकत में इजाफा होगा। काबिले गौर हो कि बीते 10 से 12 सितंबर तक जब शाह बंगाल के दौरे पर थे उस वक्त उन्हें लगा था कि मौजूदा संगठन के बल पर जीत की कल्पना कोरी ही होगी। वहीं प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष के दार्जिलिंग दौरे के दौरान उनके साथ घटी घटना के बावजूद पार्टी कार्यकर्ता कोई विशेष प्रतिरोध नहीं कर सके न ही पार्टी के पक्ष में माहौल तैयार कर पाए।
बात अगर अगले प्रदेश अध्यक्ष की करें तो इस दौड़ में ऐसे तो कई चेहरे हैं लेकिन तीन ऐसे चेहरे हैं जिनपर विशेष विचार हो रहा है। बंगाल भाजपा में महिला मोर्चा की अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद रूपा गांगुली, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और मौजूद वक्त में राष्ट्रीय सचिव का पद भार सम्भाल रहे राहुल सिन्हा और पूर्व भाजपा विधायक शमीक भट्टाचार्य शामिल हैं। रूपा का पक्ष इन दोनों में इसलिए भारी है क्योंकि शाह को व्यक्तिगत तौर पर चाहते हैं कि रूपा को प्रदेश की जिम्मेदारी सौंपी जाए। लाख बगावत और विरोध के बावजूद रूपा एक लड़ाकू नेत्री के रूप में जानी जाती हैं। इसके अलावा हिंदी, बांग्ला और अंग्रेजी तीनों जुबान में दक्ष भी हैं। रूपा राजनीतिज्ञ के इतर एक अभिनेत्री भी हैं, उन्होंने सिनेमा जगत के साथ ही साथ धारावाहिक में भी अपने अभिनय का लोहा मनवाया है। बी• आर• चोपड़ा के बैनर तले बने पौराणिक धारावाहिक महाभारत में उनका द्रौपदी का किरदार आज भी लोगों के जहन में है और यही वजह है कि शाह उनकी इस लोकप्रियता को भुनाना चाहते हैं। वहीं सियासत में कद और पद की बड़ी कीमत होती है और पोस्टर बैनरों में खुद की तस्वीर की चाह हर नेता को होती है। प्रदेश भाजपा में अंदरूनी कलह की बात करें तो यह जगजाहिर है कि दिलीप खेमा राहुल सिन्हा को पसंद नहीं करता और यही वजह है कि राहुल सिन्हा की जगह मुकुल को दे दी गई है। भाजपा में आने के बाद भाजपा प्रदेश कार्यालय में हुई बैठक के दौरान मुकुल ने कहा था कि बंगाल में दिलीप घोष उनके कैप्टन हैं। जिसके बाद कैप्टन दिलीप घोष ने बैनर होर्डिंग टीम में मुकुल राय को तो शामिल कर लिया लेकिन राहुल सिन्हा को साइड लाइन कर दिया।