--- प्रकाश पाण्डेय, विशेष संवाददाता, बंगाल।
12 नवम्बर। भोजपुरी पट्टी या यूं कहिए कि समूचे बिहार में बच्चे के जन्म के बाद सोहर गाने की अनूठी परम्परा है और सोहर रूपी गीत में आंचलिक बोल से ज्यादा बच्चे और माँ के अनमोल प्रेम का जो जिक्र मिलता है वो अन्यत्र दुर्लभ है।
• जुग-जुग जियस ललनवा...
बेशक, गीत पुराना है लेकिन इसके बोल व धुन को सुन मन में तरोताजगी भर जाती है।
8 नवंबर 2016 को रात 8 बजे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह घोषणा की कि 1000, 500 के नोट अब नहीं चलेंगे। इस ऐलान के बाद सभी सकते में आ गए। कारोबारी हैरान परेशान लिलार सिकोड़े विलाप कर रहे थे। किसी को कुछ सुझ ही नहीं रहा था और इस तरह से बेटे नोटबंदी का जन्म हुआ। लेकिन जन्म के समय राहू लग्न के प्रवेश की वजह से बच्चे की आदर की जगह अनादर ने ले ली। सत्ता पक्ष और विपक्ष में नोटबंदी को लेकर घमासान भी देखते बना।
खैर, विरोध तो सभी विपक्षी पार्टियों की ओर से हुआ लेकिन पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस नोटबंदी को सबसे बड़ा घोटाला करार दिया और मध्यम श्रेणी के कारोबारियों का गला घोटने वाला फैसला कह सड़क से संसद तक तमाशा करते रहीं। नोटबंदी के साल भर पूरे होने पर काला दिवस मनाया। हाथों में मोदी हटाओ, देश बचाओ की दफ्ती थामें तुणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता सड़क पर अपना आक्रोश जाहिर कर रहे थे और उनका नेतृत्व राज्य के मंत्रीजन कार्यकर्ताओं सहित अपने-अपने इलाकों में करते नजर आए। लेकिन गौर करने वाली बात यह थी कि जिनके हाथों में विरोध जाहिर करने वाले दफ्ती थे उनके अलावा जब आम लोगों व कारोबारियों से इस काला दिवस प्रदर्शन के बाबत सवाल किए गए तो उनका जवाब दीदी के प्रदर्शन की पोल खोलने के लिए काफी थे। प्रदर्शन में उमड़ी भीड़ में शरीक हुए एक बुजुर्ग जो कि जूट मिल कर्मचारी हैं, का कहना था कि स्थानीय पार्टी कार्यकर्ता की धमकी और चाय पानी की व्यवस्था को देखते हुए वे और उनके साथी इस रैली में चले आए।
यह भी हकीकत है कि नोटबंदी के बाद रुपयों की किल्लत और आम लोगों की परेशानियां कोई भूल नहीं सकता। बैंक और एटीएम के बाहर लगी कतारे अखबारों और टीवी मीडिया की सुर्खिया बनी। एक तरफ केंद्र की मोदी सरकार नोटबंदी के कई फायदे बता रही थी तो दूसरी तरफ विपक्षी पार्टियों की ओर से सड़क से संसद तक विरोध हो रहा था। इस फैसले की निंदा और आलोचना अर्थशास्त्र के जानकारों ने भी की थी।
इतना ही नहीं कई विशेषज्ञों ने नौकरियों में कटौती, जीडीपी दर में गिरावट और उद्योगों पर खराब असर के लिए प्रधानमंत्री मोदी के फैसले की सरेआम निंदा भी की। लेकिन सब होने के बाद भी नोटबंदी के आलोचकों से अधिक संख्या इसके समर्थकों की दिखी।
कोलकाता, हावड़ा और हुगली जिले के शहरी क्षेत्रों में कराये गए एक सर्वे की माने तो नोटबंदी के मुद्दे पर बहुमत पीए मोदी के साथ है। जब लोगों से पूछा गया कि आप नोटबंदी से परेशान थे क्या ? इसके जवाब में ज्यादातर लोगों ने कहा कि जिन्होंने गलत किया उनको प्रभाव पड़ा। हमको शुरुआत में थोड़ी दिक्कतें जरूर पेश आई थी लेकिन समय के साथ सब ठीक हो गया। इस तरह से 45 प्रतिशत लोगों ने नोटबंदी को सफल बताया। वहीं 25 प्रतिशत लोगों की राय क्या कहें या कुछ नहीं कह सकते टाइप की रही लेकिन शेष 30 प्रतिशत लोगों ने नोटबंदी को मोदी का गलत फैसला करार दिया और उनका कहना था कि इस फैसले ने देश की व्यवस्था को धक्का दिया है जिसकी भरपाई आसान नहीं है। जहां एक तरफ 45 प्रतिशत लोगों ने इसे अर्थव्यवस्था में पारदर्शी मोड़ माना। वहीं 25 प्रतिशत ऐसे भी लोग मिले जिनके मुताबिक नोटबंदी के बाद अर्थव्यवस्था पारदर्शी तो हुआ है लेकिन नुकसान भी बहुत हुआ है।
रोजगार श्रृजन दर में कोई बढ़ोतरी नहीं दिखी है, बल्कि कटौती दर में इजाफा जरूर नजर आया है। सरकारी नौकरी व मध्यम स्तर का व्यवसाय करने वाले कुछ ऐसे भी लोग मिले जिनका कहना था कि एक बार फिर से नोटबंदी की जरूरत है। 2000 रुपये के नोट को बंद करने संबंधी सवाल के जवाब में लोगों का कहना था कि जिनके पास कालाधन है उनको नुकसान होगा। आम लोगों की सुनने के बाद यह साफ हो गया कि ज्यादातर लोग मोदी के फैसले के साथ हैं।
बंगाल में जिस तरह से नोटबंदी के नाम पर मोदी व भाजपा का विरोध सत्ताधारी तृणमूल कर रही है उस विरोध पर ही शक हो रहा है। बंगाल के जिला मालदा के कालियाचक को नकली नोटों के धंधे का गढ़ माना जाता है और यहां भी तृणमूल राज कायम है। खैर, राज किसी का भी हो लेकिन नोटबंदी से नकली नोटों के तस्करों को धक्का जरूर लगा है। यह इलाका बांग्लादेश के शरहद से सटा है और यहां तस्करी के जरिए आने वाले फेक करंसी में पहले की तुलना में कमी देखी गई है। पिछले एक साल में सबसे कम मात्रा में नकली नोट जब्त किये गए हैं। सुरक्षा एजेंसियों की राय है कि आगे और भी सख्त होने की जरूरत है ताकि यह धंधा फिर से सिर न उठा सकें। अच्छी बात यह है कि जो नकली नोट नोटबंदी के बाद जब्त किये गए उनकी गुणवक्ता बेहद खराब किस्म की है। हालांकि कुछ विशेषताओं की नकल तो कर ली गई है लेकिन केमिकल कंपोजिशन का तोड़ नहीं निकाला जा सका है। सुरक्षा कर्मियों के मुताबिक, नोटबंदी के बाद से 55.66 लाख रुपये के नकली नोट जब्त किये गए हैं. वहीं साल 2016 में 1.48 करोड़, 2015 में 2.61 करोड़ और 2014 में 1.80 करोड़ के नकली नोट जब्त हुए थे।
दूसरी ओर एफआईसीएन के मामले देखने वाली कोलकाता पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स की माने तो साल 2017 में 14 लाख, 2016 में 52 लाख और 2015 में एक करोड़ रुपये के नकली नोट पकड़े गए थे। बीएसएफ के साउथ बंगाल फ्रंटियर के आईजी पी• एस• आर• आंजनेयुलु के मुताबिक नोटबंदी के बाद एफआईसीएन में काफी कमी आई है। पिछले 10 महीनों से हमारी पकड़ में जो एफआईसीएन आ रहे हैं, उनकी क्वॉलिटी खराब है। इस सभी चीजों को देखते हुए यही कहा जा सकता है कि नोटबंदी हमारे लिए सही है।
तृणमूली नेता भले ही काला और पीला दिवस मनाये लेकिन आम लोगों की राय जानने के बाद यह तो साफ हो गया कि नोटबंदी की पहली वर्षगांठ सफल रही है जो लोग कह रहे हैं। केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा ने तो नोटबंदी को चमत्कार करार दिया है।
नोटबंदी के सालभर बाद लोगों ने नोटबंदी के प्रभाव पर क्या कुछ कहा...
रवि राय और उनके पिता श्याम नारायण राय पिछले लंबे समय से रियल स्टेट कारोबार से जुड़े हैं। नोटबंदी और इसके प्रभाव के बाबत सवाल किए जाने पर रवि का कहना था कि हम कम और साफ सुथरी कमायी में विश्वास रखते हैं। नोटबंदी को लेकर जो परिदृश्य बंगाल में तैयार हो रहे हैं वो बेतुके हैं। हम तो चाहते हैं कि एक बार फिर नोटबंदी हो। बंगाल में जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं वो खुद ही सियासी लाभ के फिराक में ऐसा कर रहे हैं।
कोलकाता के बड़ाबाजार में इसराफिल मिया शादी ब्याह का कार्ड छापते हैं। नोटबंदी पर इसराफिल का कहना था कि देखिए मैं शुरू से ही पक्के में काम करता था और आज भी करता हूं इसलिए मुझे कुछ खास दिक्कत नहीं हुआ। देशहित में जो भी हो उसका मैं समर्थन करता हूँ जो भी हो कोई फर्क नहीं पड़ता।
कमल माईती प्रिन्टिंग इंक के कारोबारी है उनका कहना है कि नोटबंदी के दौरान उन्हें बहुत परेशानी हुई थी केवल उन्हें ही नहीं बड़ाबाजार के ज्यादातर छोटे कारोबारी नोटबंदी के दौरान हिल गए। कुछ ऐसे भी साथी हैं जिनका कारोबार आज पूरी तरह से खत्म हो गया है।
अजय साव उत्तर कोलकाता के निमतल्ला घाट स्ट्रीट के पास कान्यकुब्ज वैश्य विवाह बंधन नाम से मैरिज ब्यूरो चलाते हैं। उनका कहना है कि नोटबंदी का असर शादी ब्याह पर भी साफ दिखा था। लोगों के पास पैसों की किल्लत हो गई थी। थोड़े-थोड़े पैसे के लिए लोग मोहताज हो गए थे। कितनों की मैंने मदद की लेकिन मैं भी इतना सामर्थवान नहीं था कि सबकी मदद कर पाता।
बप्पाधिश दास पेशे से अधिवक्ता हैं और मौजूदा समय में कोलकाता के बेनशाल कोर्ट में प्रैक्टिस करते हैं। दास के मुताबिक नोटबंदी पूरी तरह से सफल है क्योंकि इसका ही प्रभाव है कि आज कालाबाजारियों का पर्दाफ़ाश हो सका है। कोलकाता शहर में फेक कम्पनियां का जो जमावड़ा था उसका मुखौटा भी सरेआम हुआ और उनके खिलाफ उचित कार्रवाई भी हुई। मेरा मानना है कि हर दस साल के दरमियान नोटबंदी होनी चाहिए। ऐसा होने से कालाबाजारियों की नींद उड़ेगी।
हीरालाल जैन जो कि एक कपड़ा कारोबारी हैं, का कहना था कि नोटबंदी ने कपड़ा कारोबारियों की कमर ही तोड़ दी। नोटबंदी के खिलाफ हम कल भी थे और आज भी है।
काशीनाथ सिंह स्टोन का कारोबार करते हैं और काशी नोटबंदी के पक्ष में बोले। उनके मुताबिक कुछ कालाबाजारियों और जमाखोरों की वजह से आज देश बर्बाद हो रहा है और अगर हमारी सरकार उनके खिलाफ कुछ करती है तो इसमें किसी को एतराज नहीं होनी चाहिए, बल्कि साथ देना चाहिए।
रामायण सिंह मध्य कोलकाता के बड़े बिल्डर हैं। इसके इतर इनके कई माइंस भी है। नोटबंदी पर अपनी राय जाहिर करते हुए सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का मैं फैन हूं। वो सही समय पर सही स्ट्रोक खेलते हैं जिसका प्रमाण है नोटबंदी। नोटबंदी को सालभर हो गए लेकिन मुझे नहीं लगता कि कोई सही व्यक्ति इससे आज परेशान है। जिन्होंने गलतियां की उन्होंने भोगी। मैं तो आपके सामने मुस्कुरा रहा हूं।