▪☆▪ केन्द्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों के मंत्री अरुण जेटली अपने दो दिवसीय आधिकारिक दौरे के तहत कल सिंगापुर पहुंचे, निवेशकों और सिंगापुर सरकार के प्रमुख अधिकारियों के साथ बैठक की
▪☆▪ वित्त मंत्री ने वर्तमान सरकार द्वारा लागू किए गए प्रमुख सुधारों पर प्रकाश डाला और निवेशकों से भारत आने तथा निवेश करने को कहा, जो अब प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के लिए दुनिया का सर्वाधिक अनुकूल एवं आकर्षक गंतव्य हो गया है
16 नवम्बर। केन्द्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों के मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि भारत अब प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के लिए सर्वाधिक अनुकूल एवं आकर्षक गंतव्य हो गया है जिसकी पुष्टि इस तथ्य से होती है कि विश्व भर में सर्वाधिक एफडीआई प्राप्त करने वाले देशों में अब भारत की भी गिनती होती है। वित्त मंत्री कल सिंगापुर में आयोजित निवेशक गोलमेज बैठक में उद्घाटन भाषण दे रहे थे, जिसका आयोजन वित्त मंत्रालय और सिंगापुर में भारत के उच्चायोग द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था। उन्होंने कहा कि देश में आर्थिक विकास की गति तेज करने के लिए वर्तमान सरकार ने एक के बाद एक अनेक महत्वपूर्ण आर्थिक सुधार लागू किए हैं जिनमें व्यापक बदलाव लाने में सक्षम वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को 1 जुलाई 2017 से लागू करना भी शामिल है। इसके अलावा दिवाला एवं दिवालियापन संहिता (आईबीसी) को लागू करना और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) को नई पूंजी उपलब्ध कराने के लिए पैकेज की घोषणा भी इनमें शामिल हैं जिससे बैलेंस शीट से जुड़ी समस्या को सुलझाने और निजी निवेश को नई गति प्रदान करने में मदद मिलेगी। वित्त मंत्री ने वर्तमान सरकार के अनेक अन्य महत्वपूर्ण कदमों का भी उल्लेख किया जिनमें विमुद्रीकरण के ज़रिए काले धन पर कड़ी कार्रवाई और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश से जुड़ी नीतिगत व्यवस्था में अहम बदलाव भी शामिल हैं। उन्होंने पिछले 3 वर्षों में वर्तमान सरकार द्वारा ‘कारोबार में सुगमता’ के लिए उठाए गए विभिन्न कदमों पर भी प्रकाश डाला। इन उपायों के परिणामस्वरूप विश्व बैंक के ‘कारोबार में सुगमता’ सूचकांक में भारत वर्ष 2014 के 146वें पायदान से ऊपर चढ़कर अक्टूबर 2017 में 100वें पायदान पर पहुंच गया है।
इससे पहले, कल आयोजित सिंगापुर फिनटेक फेस्टिवल में अपने मुख्य संबोधन में केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि हाल के वर्षों में वर्तमान सरकार द्वारा लागू किए गए तीन महत्वपूर्ण ढांचागत सुधारों यथा आधार, विमुद्रीकरण और जीएसटी से गवर्नेंस में पारदर्शिता तथा दक्षता आई है और इनकी बदौलत नकदी से ‘लेस कैश’ की तरफ एवं अनौपचारिक अर्थव्यवस्था से औपचारिक अर्थव्यवस्था की ओर उन्मुख होने में मदद मिली है।