नोटबंदी के खिलाफ महाजुलूस



नोटबंदी चर्चा-ए-हिन्दुस्तान में अभी खाश हैं। कहीं खुशी तो कहीं गम भी साथ है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ऐतिहासिक फैसले से कालाधन, भ्रष्टाचार, आतंकवाद व नक्सलवाद पर भयंकर प्रहार किया गया हैं। एक ओर जहां पूरा देश घण्टों कतार में लग कर बैंकों से पुराने 500 व 1000 के मुद्रा को बदल रहा है, अपने खातों में जमा भी करवा रहा है वही एटीएम केन्द्रों से नई 2000 के मुद्रा भी प्राप्त कर रहा है व एटीएम के माध्यम से भी अपने खातों में जमा भी करवा रहें हैं। हालाकि पहले की सामान्य चलन की तुलना में इस वक़्त समय बहुत ज्यादा लग रहा हैं, मुद्रा भी सीमित मिल रही है। कतार में खड़े अधिकांश लोग निराश ही लौट चले जाते हैं व दूसरे दिन फिर नये उमंग के साथ लौट आ रहे हैं। इस भिन्न प्रक्रियों में ज्यादा तर लोग देशहित की बात रख कर प्रधानमंत्री के फैसले के साथ खड़े दिखते हैं तो वही विरोध प्रकट करने में भी लोगों को तनिक भी देर नहीं लग रही है। पक्ष व विपक्ष का तो जन्मों जन्मांतर का नाता रहा है। और राजनीति में तो इसके क्या कहने...! नोटबंदी का यह फैसला इतना ताकतवर है कि सभी राजनीतिक दल जो केन्द्र सरकार का हिस्सा नहीं हैं उन्हे एक करते हुए विरोधी दल के रूप में ला खड़ा कर दिया है। साथ साथ कुछ राजनेताओं को राजनीति करने का सुनहरा अवसर भी मिलता प्रतीत हो रहा। देखना होगा कि मुद्दा का स्वरूप क्या होता है जिससे उनकी पहचान लोगों में और भी साफ होगी।
गत 23 नवम्बर 2016 को नोटबंदी के खिलाफ उत्तर कोलकाता तृणमूल काँग्रेस जयहिन्द वाहिनी के सभापति कृष्ण प्रताप सिंह की अगुवाई में बंगाल राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के अह्वान पर विशाल जुलूस निकाला गया। इस महाजुलूस में भारी संख्या में मौजूद लोगों ने ठनठनिया काली मन्दिर से डोरिना क्रासिंग तक की सीमा तय की व मुख्य जुलूस में शामिल हो गये। कृष्ण प्रताप सिंह ने अपने वक्तव्यों में कहा कि राजग सरकार ने बड़े मुद्रों पर प्रतिबन्ध लगा कर समूचे देशवासियों को परेशानी में डाल दिया है, एक ओर किसान रुपये के अभाव में खाद-बीज नहीं खरीद पा रहें है व दूसरी ओर निम्न व मध्य वर्गीय परिवार के लोग बैंक में रुपया रहते हुए भी एक एक पैसे के लिए मोहताज हैं। मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर सारे विपक्ष को एक साथ ला कर यह दिखा दिया है कि वे मोदी सरकार को सबक सीखा सकती हैं। मोदी सरकार को इससे सीख लेनी चाहिए। प्रगतिशील हाँकर यूनियन, बड़ाबाज़ार इकाई के सभापति सचिन त्रिपाठी के कहा कि देश की जनता परेशान है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रोज नये-नये नियम बना रहें हैं जिसमें आम लोग पीस रहे हैं।
जुलूस में शामिल तृणमूल नेता डॉ प्रसून पांजा, सुरेश पाण्डेय, प्रदीप मजूमदार, राजेश सिन्हा, अली हुसैन आदि ने केन्द्र सरकार के रवैये की आलोचना की। तृणमूल युवा काँग्रेस उत्तर कोलकाता के अध्यक्ष शक्ति प्रताप सिंह, जयहिन्द वाहिनी के महासचिव मीठू पोद्दार, मो माजीर, रवि ओझा, पीनाकी समद्दर, रोहित जयसवाल, बाबू मन्ना, संदीप जयसवाल सहित हजारों समर्थक इस विशाल जुलूस में शामिल थे।

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