--- रंजीत लुधियानवी, वरिष्ठ पत्रकार, कोलकाता।
17 नवम्बर। हाल में एक तृणमूल कांग्रेस नेता की ओर से पुलिस वालों को टीवी के कैमरों के सामने धमकाए जाने की घटना के बाद भाजपा के एक नेता ने एक बार और विवादित बयान देकर पुलिस वालों को धमकाया है। मालदह जिले के वैष्णवनगर के राजनगर मैदान में गुरूवार को एक जनसभा में पहले से अपने विवादित बयानों के लिए चर्चित बंगाल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि, ‘तृणमूल कांग्रेस जगह-जगह हमें रोकने की कोशिश कर रही है। जहां उनकी ताकत है, गुंडों, कैडरों को लेकर हमें रोक रही है। लेकिन जहां वह मुकाबला नहीं कर सकती, वहां पुलिस वालों की मदद से रोका जा रहा है। इसके बाद उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जरुरत पड़ने पर दीदी के छोटे-छोटे भाइयों को पीटेंगे। दीदी की पुलिस वाहिनी को भी पीटेंगे। हमारे पीछे पड़ने वालों को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।’
सिवीक वालंटियरों को भी उन्होंने निशाने पर लेते हुए कहा कि, 'सिवीक पुलिस वालों का काम है, हमारे आने पर फोटो खींचना और गाड़ियों से पैसे वसूलना। जब पिटाई शुरू होगी तब कोई नहीं बचेगा। सभी की पीठ पर घाव लगेंगे और अस्पताल में भर्ती होने की जगह नहीं बचेगी। उन्होंने कहा कि 2021 में हम सत्ता में आ ही रहे हैं, उसके पहले 2019 में ही माहौल बदल जाएगा और पुलिस वालों की अच्छी तरह के खबर ली जाएगी।'
भाजपा नेता के बयान पर टिप्पणी करते हुए मालदह जिला तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष मो• आज्जम हुसैन ने कहा कि, ‘वे शालीन लोगों की तरह बातें करने के बजाए हिंसा का रास्ता दिखा रहे हैं, यह बहुत ही दुखद है।'
मालूम हो कि पश्चिम बंगाल में भाजपा ने दूसरे नंबर पर आने के लिए पंचायत चुनाव का प्रचार अभियान शुरू कर दिया है। इस बारे में अपने भाषण में घोष ने कहा कि, ‘इस बार पंचायत चुनाव में परिवर्तन होगा। सारे बूथों पर उम्मीदवार खड़ा करके तृणमूल की सांसे रोक दी जाएंगी। पंचायत से लेकर जिला परिषद सभी जगह जीत हासिल करनी होगी।'
भाजपा की ओर से आरोप लगाया गया है कि वैष्णवनगर के 16 माइल से दिलीप घोष की बाइक रैली निकालने को लेकर पुलिस वालों ने आपत्ति की और रैली के लिए मंजूरी नहीं दी। बाद में प्रदेश अध्यक्ष की कार से सामने कुछ बाइक सवारों को लेकर बाइक रैली निकालने की तसल्ली की गई। हालांकि पुलिस का कहना है कि भाजपा ने बाइक रैली के लिए आवेदन नहीं किया था। दल की ओर से बगैर अनुमति के रैली निकालने की कोशिश की गई, जिसे प्रशासन ने मंजूर नहीं किया।