21 नवम्बर। वॉटर ऐड ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की है जिसका शीर्षक है ‘‘अव्यवस्थित (आउट ऑफ ऑर्डर)-विश्व के शौचालयों की स्थिति-2017’’। इस रिपोर्ट में डब्ल्यूएचओ-यूनिसेफ के संयुक्त निगरानी कार्यक्रम (जेएमपी) के आंकडें उद्धृत किए गए हैं जिसमें 2000 और 2015 के बीच पिछले अध्ययनों से उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर स्वच्छता आंकड़ों का व्यापक अनुमान लगाया गया है। इसका अर्थ है कि इसने स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत अधिकतर प्रगति के बारे में सुअवसर खो दिया है जिसका उद्देश्य अक्टूबर 2019 तक देश से खुले में शौच की परंपरा को समाप्त करना है।
इस बात को मान्यता प्रदान करते हुए कि इतने कम समय में इतने अधिक व्यक्तियों को खुले में शौच करने की व्यवस्था से बाहर करने की अभूतपूर्व प्रतिबद्धता दुनिया में किसी भी भाग में देखने को नहीं मिली, जेएमपी ने, इसी रिपोर्ट में एक विशेष खंड शामिल किया है जिसमें स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत त्वरित परिणामों की अत्यधिक प्रशंसा की गई है और कहा किया है कि उनकी रिपोर्ट में 2015 से किए गए कार्य का बहुत अधिक हिस्सा शामिल नहीं किया गया है, इसलिए आंकडें अद्यतन नहीं है।
■ जबरजस्त भूल
तथापि वॉटर ऐड ने रिपोर्ट में इस बिंदु का जिक्र नहीं किया है, जिसके कारण पाठक गुमराह होकर यह विश्वास कर सकता है कि भारत में स्वच्छता की वर्तमान स्थिति यही है। रिपोर्ट में दी गई संख्याओं और वास्तविकता के बीच विषमता अत्यधिक है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘‘355 मिलियन महिलाएं और लड़कियां अभी भी शौचालय का इंतजार कर रही हैं।’’ यह वास्तविकता से परे है। जेएमपी की यही रिपोर्ट इस बात की पुष्टि करती है कि जून 2017 तक भारत में खुले में शौच करने वालों की संख्या घटकर 350 मिलियन रह गई और नवंबर 2017 में यह और कम होकर 300 मिलियन रह गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में 56 प्रतिशत लोगों की सुरक्षित स्वच्छता तक पहुंच नहीं हैं जबकि वर्तमान संख्या कम होकर 28 प्रतिशत रह गई है। वास्तविकता तो यह है कि पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय अपने वेबसाइट पर स्वच्छता कवरेज के बारे में परिवार के स्तर पर विस्तृत आंकडें रखता है जो सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है।
वॉटर ऐड जैसे विश्वसनीय संगठन से इस प्रकार का वक्तव्य तथ्यों के आधार पर गलत और गैर जिम्मेदाराना है, खास तौर से जब वॉटर ऐड इंडिया टीम पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय तथा स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के साथ कार्य कर रही है और उसे जमीनी कार्य, वृहद आंकड़ों एवं सम्पूर्ण प्रगति की पूरी जानकारी है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वॉटर ऐड इंडिया द्वारा इन तथ्यों की जानकारी अपने वैश्विक सहयोगियों को नहीं दी गई।