फिल्म उद्योग से भाजपा में गए नेता पद्मावती के साथ



--- रंजीत लुधियानवी, वरिष्ठ पत्रकार, कोलकाता।

बांग्ला फिल्मउद्योग से भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए लोगों ने हरियाणा के भाजपा नेता सूरज पाल अमु की ओर से पद्मावती के निर्देशक और कलाकार के खिलाफ की गई टिप्पणी का समर्थन नहीं किया है। केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो, जार्ज बेकर और लॉकेट चटर्जी ने ऐसी धमकियां देने वालों की निंदा की है। 

बाबुल के मुताबिक मुद्दा क्या है, यह बात नहीं है। मुख्य बात यह है कि कोई कानून और व्यवस्था को अपने हाथ में नहीं ले सकता। दूसरी फिल्मों की तरह इस फिल्म के बारे में भी जो करना है सेंसर बोर्ड अपना काम करेगा। 

जार्ज बेकर ने धमकियों के बारे में कहा है कि ये सब हास्यास्पद और बचकानी बाते हैं। इस तरह की धमकियां 2017 साल में स्वीकार्य नहीं हैं। हम लोग 1000 ईसापूर्व में निवास नहीं कर रहे हैं कि ऐसी धमकियां दी जाएं। यह 2017 है और कोई यह नहीं सोच सकता कि पहली शताब्दी की तरह धमकियां दी जाएं। यह निंदनीय है। 

करीब 200 फिल्में करने वाली भाजपा की नेता लॉकेट चटर्जी का कहना है कि एक कलाकार को अभिनय करने के पैसे मिलते हैं, उसे धमकियां दिए जाने का क्या औचित्य है ? अभिनेता या निर्देशक की बात तो छोड़ दें, इस तरह की धमकियां किसी सामान्य व्यक्ति को भी नहीं दी जानी चाहिए। 

हालांकि बेकर और लॉकेट दोनों ने कहा कि फिल्म को सेंसर बोर्ड के पास भेजने से पहले निर्देशक संजय लीला भंसाली को थोड़ा सतर्क होना चाहिए था और यह जरुर लिखना चाहिए था कि फिल्म सच्ची घटना पर आधारित है या काल्पनिक है। यह गुमराह करने वाला है जिससे अफवाहों को बल मिला है। अगर यह फिल्म काल्पनिक घटनाओं पर आधारित है, तब उसे ऐतिहासिक फिल्म के तौर पर प्रचारित नहीं किया जाना चाहिए। अगर सच्ची घटना पर आधारित है, तो बताया जाना चाहिए था। इसके साथ ही फिल्म से सेंसर बोर्ड से पारित होने के पहले प्रदर्शन की तारीख का एलान नहीं करना चाहिए था।

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