--विजया पाठक
एडिटर - जगत विजन
भोपाल - मध्यप्रदेश, इंडिया इनसाइड न्यूज।
■कमलनाथ सरकार की योजनाओं के संचालन में विफल मोहन सरकार
■कमलनाथ की जनकल्याणकारी सोच को आगे नहीं बढ़ा पा रही सरकार
■जनकल्याणकारी सोच और योजनाओं की निरंतरता पर प्रश्नचिन्ह
मध्यप्रदेश की राजनीति में कुछ योजनाएं ऐसी होती हैं जो किसी एक सरकार तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि समय के साथ जनहित के कारण आगे भी चलती रहती हैं। यही किसी भी जननेता की दूरदृष्टि और नीति-निर्माण क्षमता का प्रमाण माना जाता है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के लगभग 18 माह के कार्यकाल में कई ऐसी पहलें शुरू हुईं, जिनका उद्देश्य केवल तत्कालीन राजनीतिक लाभ प्राप्त करना नहीं, बल्कि प्रदेश के दीर्घकालिक विकास की आधारशिला रखना था। लेकिन वर्तमान सरकार कमलनाथ सरकार के विजन को आगे बढ़ाने में विफल है। सही क्रियान्वयन नहीं होने के कारण आमजन को इनका लाभ नहीं मिल पा रहा है। कमलनाथ की जनकल्याणकारी सोच और योजनाओं की निरंतरता पर प्रश्नचिन्ह लग रहा है। सबसे प्रमुख योजनाओं में थी ग्राम पंचायत स्तर पर गोशालाओं के निर्माण। कमलनाथ सरकार ने गौ-संरक्षण को केवल धार्मिक या भावनात्मक विषय के रूप में नहीं देखा, बल्कि इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि व्यवस्था और पशुधन संरक्षण से जोड़कर व्यापक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाने का प्रयास किया। सरकार की सोच थी कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में ऐसी व्यवस्था विकसित हो, जहां निराश्रित एवं बेसहारा गौवंश को सुरक्षित आश्रय मिल सके। इससे किसानों की फसलों को आवारा पशुओं से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके और पशुधन का संरक्षण भी सुनिश्चित हो। लेकिन आज पशुधन की क्या स्थिति है सबको पता है। गौशालाओं में कम सड़कों पर ज्यादा पशुधन दिख रहा है। प्रतिदिन इनकी मौतें हो रही हैं। गौशालाएं अव्यस्थित हो गई हैं।
●घोषणाएं भर नहीं, सही क्रियान्वयन भी जरूरी
कमलनाथ की प्रशासनिक शैली का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी था कि वे योजनाओं की घोषणा के साथ-साथ उनके क्रियान्वयन पर भी विशेष ध्यान देते थे। अधिकारियों के साथ नियमित समीक्षा बैठकें, समयबद्ध लक्ष्य और विकास कार्यों की निगरानी उनकी कार्यशैली की विशेषता मानी जाती थी। यही कारण था कि कम समय के कार्यकाल में भी अनेक योजनाओं की स्पष्ट रूपरेखा तैयार की गई। मोहन सरकार उनकी योजनाओं की नकल तो कर रही है लेकिन उनका क्रियान्वयन सही ढंग से नही हो रहा है।
●नए नामों के साथ आगे बढ़ रही योजनाएं
कमलनाथ का दृष्टिकोण केवल एक वर्ग तक सीमित नहीं था, बल्कि किसान, युवा, महिला, कर्मचारी, उद्योग, निवेश, ग्रामीण विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे अनेक क्षेत्रों को समान प्राथमिकता देने का था। कृषि क्षेत्र में उनकी सरकार ने किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के उद्देश्य से कई निर्णय लिए। किसानों को राहत देने, कृषि को लाभकारी बनाने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए योजनाओं पर कार्य प्रारंभ किया गया। उनका मानना था कि यदि गांव मजबूत होंगे तो प्रदेश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। किसानों को राहत देना, जैविक खेती को बढ़ावा देना और ग्रामीण संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना भी था। आज किसान सड़कों पर उतरने पर मजबूर हो रहे हैं। किसानों को अपनी उपज का सही दाम तक नहीं मिल पा रहा है। अपनी उपज को बेचने के लिए लाईनों में लगना पड़ रहा है। मूंग खरीदी को लेकर कमलनाथ किसानों के साथ खड़े दिखाई दिये। यदि ऐसी योजनाएं आगे भी विभिन्न सरकारों द्वारा जारी रखी जाती हैं, तो यह उनकी उपयोगिता का संकेत माना जा सकता है।
●कमलनाथ ने उठाए कई नीतिगत कदम
महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर भी कमलनाथ सरकार ने कई नीतिगत कदम उठाने का प्रयास किया। महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने, स्वयं सहायता समूहों को प्रोत्साहित करने तथा सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं को प्रभावी बनाने पर बल दिया गया। उनका दृष्टिकोण यह था कि विकास तभी सार्थक होगा, जब समाज का प्रत्येक वर्ग उसकी मुख्यधारा में शामिल हो।
●युवाओं के लिए रोजगार के बढ़ाए कदम
युवाओं के लिए रोजगार और निवेश को लेकर भी कमलनाथ सरकार सक्रिय दिखाई दी। उद्योगों में निवेश आकर्षित करने, रोजगार के नए अवसर सृजित करने तथा प्रदेश को औद्योगिक दृष्टि से प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में प्रयास किए गए। कमलनाथ का अनुभव राष्ट्रीय स्तर पर उद्योग और वाणिज्य से जुड़ा रहा है, जिसका प्रभाव उनकी कार्यशैली में भी दिखाई देता था। उन्होंने निवेशकों का विश्वास जीतने और मध्यप्रदेश को औद्योगिक विकास के लिए अनुकूल वातावरण देने की दिशा में पहल की।
●जनता का हित है सर्वोपरि
आज जब प्रदेश में विभिन्न क्षेत्रों में पूर्व में शुरू की गई कई अवधारणाओं पर नए स्वरूप में कार्य होता दिखाई देता है, तब यह चर्चा स्वाभाविक रूप से सामने आती है कि विकास की अच्छी सोच किसी एक दल या सरकार की नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की पूंजी होती है। यदि ऐसी योजनाएं निरंतर आगे बढ़ती हैं, तो अंततः लाभ जनता को ही मिलता है। विशेषज्ञों का मानना है कि 18 माह का कार्यकाल समय की दृष्टि से भले सीमित रहा, लेकिन उस दौरान जिस प्रकार योजनाओं की आधारशिला रखी गई, उसने प्रदेश के विकास विमर्श को नई दिशा दी। यही कारण है कि उनकी कई पहलें आज भी राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा का विषय बनी रहती हैं। जनहित को केंद्र में रखकर योजनाओं की परिकल्पना करना और उन्हें दीर्घकालिक दृष्टि से तैयार करना उनके नेतृत्व की प्रमुख विशेषताओं में गिना जाता है।