मध्य प्रदेश: पीडब्ल्यूडी के उपयंत्री रितेश शर्मा ने सरकारी आवासों के बिजली कामों में किया भ्रष्टाचार



--विजया पाठक, एडिटर - जगत विजन, भोपाल - मध्यप्रदेश, इंडिया इनसाइड न्यूज।

●शर्मा ने कल्पना कंस्ट्रक्शन को नियमित तौर पर अलग-अलग फर्जी कार्यों और बिल के आधार पर किया 100 करोड़ से अधिक का भुगतान

●कई बड़े आईएएस अफसरों के साथ मिलकर इवेंट एजेंसी चला रहा है उपयंत्री रितेश

●विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और आईएएस अफसरों का प्रभाव दिखाकर दिया भ्रष्टाचार को अंजाम

●लोक निर्माण विभाग ने ईओडब्ल्यू में केस रजिस्टर्ड होने पर रितेश पर कार्यवाही के बजाय दिया प्रति नियुक्ति का तमगा

लोक निर्माण विभाग में विद्युत कार्यों के टेंडर, माप पुस्तिकाओं और भुगतान प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाने वाली शिकायतों ने विभागीय जवाबदेही पर सवाल खड़े किए हैं। दरअसल विभाग में पदस्थ उपयंत्री रितेश शर्मा ने ठेकेदार मित्र के साथ मिलकर कई वर्षों तक विभाग और सरकार को करोड़ों रुपयों का चूना लगाया है। हद तो तब हो गई जब रितेश शर्मा ने बगैर कोई कार्य किए ही 10 करोड़ से अधिक के भुगतान अलग-अलग समय पर एक ही एजेंसी ''कल्पना कंस्ट्रक्शन'' को कर दिए। इतनी बड़ी वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार का खुलासा सूचना के अधिकार के नियम के तहत प्राप्त पत्र के माध्यम से हुआ। जगत विजन को मिले दस्तावेज के अनुसार वर्ष 2019 में की गई शिकायत और वर्ष 2020 में जारी शासकीय पत्रों से सामने आता है कि उपयंत्री रितेश शर्मा तथा कल्पना कंस्ट्रक्शन के संबंध में आर्थिक अनियमितताओं के आरोपों की जांच कराने की मांग की गई थी। शिकायत में सरकारी आवासों में विद्युत कार्यों, कथित फर्जी माप, पुराने कार्यों को नया बताकर भुगतान कराने और टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे। अफसोस इस बात का है कि इस हद तक भ्रष्टाचार करने के बाद भी विभाग ने निलंबन जैसी कार्यवाही करने के बजाय उन्हें अलग-अलग विभागों में प्रतिनियुक्ति पर भेज दिया।

•भ्रष्टाचारी प्रवृत्ति का है उपयंत्री शर्मा

विभागीय सूत्रों के अनुसार उपयंत्री रितेश शर्मा की नियुक्ति वर्ष 2008 में हुई। मूलरूप से ग्वालियर जिले के रितेश शर्मा ने हमेशा से अपने आप को विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर का करीबी बताया। यही कारण है कि उन्होंने मंत्री और अफसरों का रौब दिखाते हुए पहले फर्जी ढंग से कल्पना कंस्ट्रक्शन को विभाग में इम्पैनल करवाया और उसके बाद धीरे-धीरे उसे काम देना शुरू किया। रितेश शर्मा के इस कारनामे का अंदेशा विभाग के वरिष्ठ अधिकारयों को चल गया था। लेकिन उन्होंने भी आंख और कान बंद कर रितेश शर्मा के साथ मिलकर इस पूरे भ्रष्टाचार को पनपने दिया। कुल मिलाकर रितेश शर्मा की प्रवृत्ति नियुक्ति के समय से ही भ्रष्टचारी वाली रही है।

•ईओडब्ल्यू में दर्ज हुआ केस लेकिन सज़ा अब तक नहीं हुई

इसे हमारे सिस्टम की विफलता ही कहा जा सकता है। एक भ्रष्ट अधिकारी के खिलाफ ईओडब्ल्यू में केस दर्ज होने के बाद भी उस पर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। मध्य प्रदेश शासन के लोक निर्माण विभाग, मंत्रालय, भोपाल से 24 सितंबर 2020 को प्रमुख अभियंता, लोक निर्माण विभाग के नाम पर पत्र जारी किया गया था। पत्र क्रमांक 2287/1826/2020/स्था/19 में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ, भोपाल से प्राप्त पत्र का उल्लेख करते हुए शिकायत से संबंधित जांच प्रतिवेदन शीघ्र भेजने के निर्देश दिए गए थे। पत्र में 24 जून 2020 के संदर्भ का भी उल्लेख है। साथ ही शिकायत के साथ संलग्न दस्तावेजों के आधार पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने और विभाग को उससे अवगत कराने के लिए कहा गया था। जब मामला खुला तो विभाग ने खाना पूर्ति करते हुए भ्रष्टाचारी रितेश शर्मा को भोपाल स्मार्ट सिटी कार्यालय में प्रतिनियुक्ति पर भेज दिया। यही नहीं भ्रष्टचारी रितेश शर्मा ने यहां भी आदतन ढंग से भ्रष्टाचार का जाल फैलाना चाहा लेकिन यहां उनकी दाल नहीं गल सकी और उन्हें कुछ ही वर्षों में यहाँ से विदा कर दिया गया। रितेश शर्मा वर्तमान में विधानसभा में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ हैं। अब सवाल यह है कि इस पत्र के बाद जांच किस स्तर तक पहुंची और अपराधी उपयंत्री रितेश शर्मा पर कोई कारवाही क्यों नहीं की गई। चर्चा है कि रितेश शर्मा के इस कारनामे में विभाग के कई वरिष्ठ अफसर शामिल हैं। यहां तक कि मंत्री राकेश सिंह का संरक्षण होने की चर्चा मंत्रालय के गलियारों में हो रही है।

•आईएएस अफसरों से दोस्ती कर फैलाया भ्रष्टाचार का जाल

जानकारी के अनुसार रितेश शर्मा ने लंबे समय तक भोपाल स्थित चार इमली क्षेत्र में बिजली मेन्टेनेंस का कार्य देखा। यही उन्होंने काम के चलते कई बड़े आईएएस अफसरों से दोस्ती की और धीरे-धीरे उन्होंने कुछ आईएएस अफसरों के साथ मिलकर अघोषित रूप से इवेंट एजेंसी शुरू कर दी। जिसके माध्यम से वे कई विभागों के इवेंट में सक्रिय भूमिका निभाने लगे। इस तरह से रितेश शर्मा के भ्रष्टाचार की जड़ें और फैलती चली गई। हम अपनी अगली पोस्ट में आपको उन अफसरों के नाम भी बताएंगे जिनके साथ मिलकर उपयंत्री रितेश शर्मा ने भ्रष्टाचार को अंजाम दिया। यही नहीं शिकायती पत्र के अनुसार रितेश शर्मा के इशारे पर विद्युत कार्यों की माप बढ़ाकर दर्ज की गई और पुराने कार्यों को नए कार्य के रूप में प्रस्तुत कर भुगतान प्राप्त किया गया।

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