पेनक्रिएटाइटिस के इलाज में आयुर्वेद का परचम



---प्रदीप फुटेला,
उत्तराखंड, इंडिया इनसाइड न्यूज।
महासचिव - इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स उत्तराखंड इकाई।

• वैद्य बालेंदु प्रकाश के अनुसंधान का अमेरिका और जापान के विशेषज्ञों ने लिया संज्ञान

• अमेरिका के हवाई द्वीप में अमेरिका और जापान के पेनक्रियाज रोग विशेषज्ञों की 50वीं संयुक्त वार्षिक सम्मेलन में शोध पत्र प्रस्तुत करने वाले एकमात्र आयुर्वेदिक चिकित्सक

अमेरिका और जापान के पेनक्रियाज रोग विशेषज्ञों की 50वीं संयुक्त वार्षिक सम्मेलन में मेरठ मूल के उत्तराखंड निवासी वैद्य बालेंदु प्रकाश का अनुसंधान आकर्षण का केंद्र रहा। जहां विशेषज्ञों का समूह पैंक्रियास के रोगियों में उत्तरोत्तर वृद्धि तथा उससे होने वाले घातक परिणामों तथा मृत्यु के आंकड़ों दर चर्चा कर रहे थे, वहीं भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर के• आर• नारायणन के मानद आयुर्वेदिक चिकित्सक वैद्य बालेंदु प्रकाश ने आयुर्वेद के रस शास्त्र पर आधारित तांबा, पारा, गंधक, देवदाली, अपराजिता एवं नींबू के सहयोग से तीन वर्षों में तैयार हुई आयुर्वेदिक खनिज योग द्वारा पेनक्रिएटाइटिस से ग्रसित 860 मरीजों पर अपने 23 वर्षों के अध्ययन को प्रस्तुत किया। वैद्य बालेंदु की शोध प्रस्तुति में बेंगलूरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान द्वारा उक्त खनिज योग का रसायनिक विश्लेषण, अंतरराष्ट्रीय मानको पर संचालित मैसूर स्थित एक वैज्ञानिक केंद्र द्वारा इस योग की विषाक्तता पर अध्ययन तथा चूहों में L-arginine नामक रसायन दे कर पेनक्रिएटाइटिस उत्पन्न करने के बाद उसको पुनः ठीक होने के आंकड़ों को बखूबी पेश किया गया। आयुर्वेदिक खनिज योग द्वारा पेनक्रिएटाइटिस एवं पैंक्रियास कैंसर में बढ़ने वाले CA19-9 ट्यूमर चिन्हक को कम करने के गुण को भी विषय विशेषज्ञों ने कौतुहल पूर्वक देखा।

“अद्वितीय तथ्यों एवं संख्या से बाहुल्य है यह शोध प्रपत्र” ऐसा उद्गार देने वालों में पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय की पोषण, यकृत एवं पेट रोग विभाग की वरिष्ठ प्रोफेसर डॉक्टर ऐना ईवांस फिलिप्स सहित नेशनल पैंक्रियास फाउंडेशन के चैप्टर मैनेजर पैट्रिक सलामी, हीरोसाकी विश्वविद्यालय, जापान के डॉक्टर किनोसुके इशिडो, जॉन हॉपकिंस के पेट रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ• विकेश सिंह, नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के कैंसर विभाग में कार्यरत कैंसर बायोमार्कर रेसर्च ग्रुप के चीज, प्रोफेसर सुधीर श्रीवास्तव तथा तोहो विश्वविद्यालय, टोक्यो के केन ईटऊ एवं अमेरिकन पेनक्रिएटिक एसोसिएशन के सचिव डॉ• अशोक सरोजा मुख्य हैं।

पेनक्रिएटाइटिस एक जटिल, दुरु एवं जानलेवा रोग है, जिसके रोगियों की संख्या में उत्तरोत्तर बढ़ोतरी होती जा रही है। अमूमन यह माना जाता है कि यह बीमारी शराब के अत्यधिक सेवन तथा अनुवांशिक कारणों से होती है, परंतु वैद्य बालेंदु के 860 मरीजों पर एकत्र आंकड़ों के अनुसार मात्र 30% रोगियों में शराब सेवन तथा 5% में अनुवांशिक लक्षण पाए गए। अमेरिका और जापान जैसे तकनीकी तौर पर समृद्ध देशों में पेनक्रिएटाइटिस के रोगियों में मृत्यु दर 5 वर्षों में 17%, 10 वर्षों में 30% तथा 20 वर्षों में 55% है। इस रोग के 40% तक मरीजों में कैंसर होने की घोर संभावना होती है। अमेरिका मे इस रोग से प्रतिवर्ष करीब 55000 लोग मृत्यु को प्राप्त होते हैं।

वैद्य बालेंदु ने बताया कि भारत में इसके मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जिसके प्रमाण में पेनक्रिएटाइटिस के चिकित्सा में प्रयोग किए जाने वाले पेनक्रिएटिक एंजाइम्स की बिक्री में वार्षिक वृद्धि देखी गयी है। परंतु खेद का विषय है कि भारत सरकार की चिकित्सा अनुसंधान परिषदों द्वारा इस बीमारी से संबंधित कोई आंकड़ा एकत्र नहीं किया जा रहा है।

पेनक्रिएटाइटिस के विभिन्न प्रकारों, क्रॉनिक, क्रॉनिक कालसिफिक, रिकरेंट अक्यूट, अक्यूट औन क्रॉनिक, नेक्रोटाइज़िंग, ग्रूव, अर्ली पेनक्रिएटाइटिस, के 860 रोगी वैद्य बालेंदु के इस शोध में शामिल किए गए थे। इन मरीज़ों की आयु 3 से 72 वर्ष थी। यह बीमारी 19 से 45 वर्ष में सबसे ज्यादा पाई गई। शोध पत्र में 452 मरीज़ों का एक वर्ष का इलाज पूर्ण करने का आँकड़ा पेश किया गया है जिसमें 445 मरीज रोग मुक्त होकर सामान्य जीवन व्यतीत कर रहे हैं। एक साल का इलाज पूर्ण करने के बाद एक मरीज की हृदयघात से मृत्यु हो गई, तीन रोगियों में रोग की पुनरावृत्ति के बाद मृत्यु हो गई तथा तीन लोगों ने रोग की पुनरावृति के बाद उनसे संपर्क छोड़ दिया। ठीक हुए मरीजों में इस औषधि का कोई दुष्प्रभाव नही देखा गया।

आयुर्वेद के रस शास्त्र में सोना, चांदी, तांबा, लोहा, टिन, लेड, जिंक धातु को औषधि रूप में परिवर्तित कर रोगों की रोकथाम एवं चिकित्सा करने का उल्लेख किया गया है। भारतवर्ष के अलावा संपूर्ण विश्व अभी तक इस विधा से अनजान है। तांबे धातु पर आधारित इस औषधि से पेनक्रिएटाइटिस रोग की सफल चिकित्सा को देखते हुए इस पद्धति में अनुसंधान की नितांत आवश्यकता है।उन्होंनेकहा कि

वैद्य बालेंदु प्रकाश द्वारा किए जा रहे पेनक्रिएटाइटिस चिकित्सा के परिणामों की आयुष मंत्रालय के केंद्रीय आयुर्वेद विज्ञान अनुसंधान संस्थान द्वारा नियुक्त एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति, जिसमें एम्स, दिल्ली के पेट रोग विशेषज्ञ भी शामिल थे, द्वारा जाँच की जा चुकी है। उक्त समिति द्वारा इस आयुर्वेदिक औषधि के वैज्ञानिक विकास हेतु संस्तुति की गई है, परंतु कतिपय कारणों से प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देशों के बावजूद इस अनुसंधान कार्य को शुरू नहीं किया गया है।

वैद्य बालेंदु प्रकाश के कार्य को पैंक्रियास नामक मेडिकल जर्नल के नूतन अंक में शोध प्रपत्र सार के रूप में स्थान मिला है। आयुर्वेद के रस शास्त्र पर आधारित इस चिकित्सा को विश्व के मूर्धन्य विद्वानों के बीच ले जाने से वैद्य बालेंदु अत्यंत प्रसन्न हैं। अग्रिम चरण में वे ‘मिशन नोबेल प्राइज’ के तहत जयपुर के पेट रोग विशेषज्ञ के साथ पेनक्रिएटाइटिस के रोगियों पर एक नियंत्रित चिकित्सकीय अध्ययन शीघ्र ही शुरू करना प्रस्तावित है। इस अध्ययन की संस्तुति भारत सरकार के भूतपूर्व सचीव, चिकित्सा अनुसंधान के डा• वी• एम• कटोच के नेतृत्व वाली वैज्ञानिक परामर्श दात्री समिति द्वारा अनुमोदन किया जा चुका है।

● क्या है पेनक्रिएटाइटिस ?

1. पेट के उपरी मध्य भाग में यकायक भयंकर दर्द जो कि पीठ की तरफ जाता हो तथा साथ में उल्टी और जी मिचलाता हो

2. कम से कम दो दिन तक रहने वाला तेज़ पेट दर्द जो सामान्य औषधियों से ठीक ना होता हो

3. शरीर में तेज़ी से वजन का कम होना

4. मल में वसा की उपस्थिति

5. ब्लड शुगर अनियंत्रित रूप से बढ़ना

● पेनक्रिएटाइटिस का एलोपथिक इलाज

यह लाइलाज बीमारी है जो समय के साथ बढ़ती जाती है। एलोपथिक चिकित्सा में पेनक्रिएटाइटिस रोग से पीड़ित रोगियों को ताउम्र पेनक्रियाज में बनने वाले एंजाइम्स बाहर से दिए जाते हैं। रोगी को दूध या दूध से बने उत्पाद जैसे पनीर, चीज़, मक्खन, घी चिकनाई तथा कैलोरी वाले भोजन को बंद कर दिया जाता है।

रोग की आकस्मिक तीव्र दशा में रोगी को आपातकालीन अस्पताल में भारती कर ड्रिप द्वारा तरल पदार्थ दिया जाता है तथा कुछ दिनों के लिए मुँह से पानी भी नही दिया जाता। इस दौरान रोग की अवस्था अनुसार एंटीबायोटिक्स, दर्द निवारक, शोथ नाशक एवम पाचक एंजाइम्स दिए जाते हैं।

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