बाघा बॉर्डर के बाद पूर्णिया ही देश का ऐसा इकलौता स्थान है, जहां हर साल अंधेरी रात में ही तिरंगा फहराया जाता है



--अभिजीत पाण्डेय (ब्यूरो),
पटना-बिहार, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

जहां पूरा देश स्वतंत्रता दिवस की सुबह झंडा फहराता है वहीं, बिहार में एक शहर ऐसा भी है जहां सुबह का इंतजार नहीं होता, यहां रात ही झंडा फहराया जाता है। अंधेरी रात में तिरंगा अपने शौर्य और वैभव की अलख बिखेरता नजर आता रहा है। बाघा बॉर्डर के बाद महज पूर्णिया ही देश का ऐसा इकलौता स्थान है, जहां हर एक साल 14 अगस्त समाप्त होते ही अंधेरी रात में ही तिरंगा फहरायि जाता है।

बिहार के पूर्णिया में रात को ही तिरंगा फहराने की परंपरा 1947 से ही चली आ रही है। 74वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले के प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तिरंगा फहरायेंगे, लेकिन पूर्णिया के लोग उनसे पहले ही रात यानी ठीक 12:01 बजे आन, बान और शान से तिंरगा फहरायेंगे।

पूर्णिया के लोग झंडा चौक पर सैंकड़ों कीं संख्या में जमा होते हैं। 1947 की उस स्वर्णिम पल को लोग याद करते हैं जब ठीक 12 बजकर 01 मिनट पर स्वतंत्रता सेनानी रामेश्वर कुमार सिंह ने झंडोत्तोलन किया था। झंडा चौक पर इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने पहुंचे लोग देशभक्ति की रंग से लबरेज होकर आते हैं। बच्चों से लेकर युवा और बुजुर्ग हाथों में तिरंगा लेकर 'भारत माता की जय' का जयघोष करते हैं, लेकिन कोरोना के कारण इस बार भीड़ कम होगी।

दिन था 14 अगस्त 1947 का। सुबह से ही पूर्णिया के लोग आजादी की खबर सुनने के लिए बेचैन थे। दिनभर झंडा चौक पर लोगों की भीड़ मिश्रा रेडियो की दुकान पर लगी रही, मगर जब आजादी की खबर रेडियो पर नहीं आयी, तो लोग घर लौट आये। मगर मिश्रा रेडियो की दुकान खुली रही। रात के 11:00 बजे थे कि झंडा चौक स्थित मिश्रा रेडियो की दुकान पर रामेश्वर प्रसाद सिंह, रामजतन साह, कमल देव नारायण सिन्हा, गणेश चंद्र दास सहित उनके सहयोगी दुकान पर पहुंचे। फिर आजादी की बात शुरू हो गयी। इस बीच, मिश्रा रेडियो की दुकान पर सभी के आग्रह पर रेडियो खोला गया। रेडियो खुलते ही माउंटबेटन की आवाज सुनाई दी। आवाज सुनते ही लोग खुशी से उछल पड़े। साथ ही निर्णय लिया कि इसी जगह आजादी का झंडा फहराया जाएगा। आनन-फानन में बांस, रस्सी और तिरंगा झंडा मंगवाया गया. रात्रि 12 बजे रामेश्वर प्रसाद सिंह ने तिरंगा फहराया। उसी रात चौराहे का नाम झंडा चौक रखा गया। झंडोत्तोलन के दौरान मौजूद लोगों ने शपथ लिया कि इस चौराहे पर हर साल रात्रि में सबसे पहला झंडा फहराया जाएगा।

झंडोत्तोलन की कमान लोगों ने रामेश्वर प्रसाद सिंह के परिवार के कंधे पर दे दी। रामेश्वर प्रसाद सिंह के निधन के बाद उनके पुत्र सुरेश कुमार सिंह ने झंडात्तोलन की कमान संभाली और अब रामेश्वर प्रसाद सिंह के पोते विपुल कुमार सिंह झंडा चौक पर झंडोत्तोलन करते हैं।

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