--राजीव रंजन नाग
नई दिली, इंडिया इनसाइड न्यूज।
पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल शनिवार सुबह दिल्ली पुलिस द्वारा उन्हें ज़बरदस्ती सफदरजंग अस्पताल ले जाए जाने के बाद भी जारी है। सोनम वांगचुक ने अपना अनशन नहीं तोड़ा है और अधिकारियों से कहा है कि वे अपनी भूख हड़ताल जारी रखने के लिए जंतर-मंतर लौटना चाहते हैं। वांगचुक 21 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे। उन्हें आज सुबह 7 बजे दिल्ली पुलिस ज़बरदस्ती अस्पताल ले गई। ये पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में थे। वांगचुक को ले जाए जाने के बाद, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने घोषणा की कि वे अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर रहे हैं।
शनिवार सुबह पुलिस की यह कार्रवाई सतीश गोलचा की जगह अनुराग कुमार के दिल्ली पुलिस कमिश्नर का पद संभालने के एक दिन बाद हुई। पुलिस ने एक्स पर दावा किया कि यह कदम हाई कोर्ट के आदेशों के अनुसार उठाया गया, जो वांगचुक की "बिगड़ती सेहत के कारण विशेषज्ञों की मेडिकल सलाह" पर आधारित था।
सुबह के वीडियो में प्रदर्शनकारियों को वांगचुक तक पुलिस को पहुँचने से रोकने की कोशिश करते हुए देखा गया, लेकिन बाद में पुलिस उन पर हावी हो गई। वांगचुक को ले जाते समय पुलिस ने उनके चारों ओर सफ़ेद चादरों से घेरा बनाया। उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया है, जहाँ वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो पहुँच गई हैं। उन्होंने एक्स पर कहा, "मेरी, उनके परिवार और उन डॉक्टरों की सहमति के बिना उन्हें मुँह से या नस के ज़रिए कुछ भी नहीं दिया जाना चाहिए। गीतांजलि पिछले 20 दिनों से उनकी सेहत की निगरानी कर रहीं हैं।
वांगचुक और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए) के तीन छात्र एक्टिविस्ट – नेहा, आमिन और मनीष – केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े और भारत की परीक्षा और शिक्षा प्रणाली में बदलाव की माँग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।
एआईएसए के छात्र एक्टिविस्ट जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बने हुए हैं। प्रदर्शनकारियों ने एआईएसए के तीनों प्रदर्शनकारियों के चारों ओर एक सुरक्षा घेरा बनाया ताकि पुलिस उन्हें उठा न सके। नेहा ने एक वीडियो मैसेज में कहा, "वांगचुक को हिरासत में लिए जाने के बाद पुलिस हमें ले जाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन हमारे आस-पास बहुत सारे वॉलंटियर होने की वजह से वे ऐसा नहीं कर पाए।" भूख हड़ताल की वजह से वह काफी कमज़ोर दिख रही थीं। उन्होंने कहा, "हमारे शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को ज़बरदस्ती खत्म करने की पुलिस की कोशिश शर्मनाक है। सरकार ने 20 दिनों तक हम छात्रों और वांगचुक को पूरी तरह नज़रअंदाज़ किया है। अब, 21वें दिन वे हिंसा और ज़बरदस्ती का इस्तेमाल करके हमें अस्पताल भेजने की कोशिश कर रहे हैं।"
इससे पहले, सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने एक्स पर कहा था कि सीजेपी के संस्थापक दिपके को पुलिस ने "पीटा और हिरासत में लिया"। इसके बाद, उन्हें विरोध स्थल पर जाने की इजाज़त दे दी गई। नारे लगा रही भीड़ को संबोधित करते हुए दिपके ने कहा, "दिल्ली पुलिस ने आज इतनी गिरी हुई हरकत की है।" इन दिनों सीजेपी और एआईएसए के प्रदर्शनकारियों के लिए दो अलग-अलग जगहें थीं, लेकिन शनिवार सुबह सीजेपी नेताओं ने भी एआईएसए वाले इलाके में बात की और कहा कि नेहा, आमिन और मनीष अपना विरोध जारी रखेंगे। इसबीच, सीजेपी ने अपनी माँग भी बदल दी है – पहले वे सिर्फ़ प्रधान के इस्तीफ़े की माँग कर रहे थे, लेकिन पुलिस की कार्रवाई के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफ़े की भी माँग की है।
बाद में, पत्रकारों से बात करते हुए दिपके ने मोदी को तानाशाह कहा और कहा, "ये पुलिस अधिकारी नहीं हैं; ये आरएसएस के गुंडे हैं। छात्रों के विरोध प्रदर्शन और चार कार्यकर्ताओं की भूख हड़ताल पर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, जबकि प्रधान के इस्तीफ़े और नरेंद्र मोदी सरकार के नेताओं से इन आवाज़ों को गंभीरता से लेने और दिल्ली के बीचों-बीच छात्र क्या कह रहे हैं, यह सुनने की कई बार माँग की गई है। उधर,पुलिस ने सफदरजंग अस्पताल के सामने दंगा-रोधी गाड़ियां और केंद्रीय बलों को तैनात कर दिया है।
बाद में शनिवार को सफदरजंग अस्पताल प्रशासन ने बताया कि भर्ती किए जाते समय वांगचुक होश में थे और उनकी पल्स, ब्लड प्रेशर और ऑक्सीजन का स्तर स्थिर था, हालांकि उनमें डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखे थे।
अस्पताल प्रशासन ने कहा, "हालांकि उन्हें नस के ज़रिए तरल पदार्थ (IV फ्लूइड) देने की सलाह दी गई थी, लेकिन मरीज़ ने नस के ज़रिए तरल पदार्थ, ओरल रिहाइड्रेशन फ्लूइड या कोई भी अन्य दवा लेने से इनकार कर दिया है। उनकी सेहत के लिए सबसे बेहतर इलाज के मकसद से लगातार उनकी निगरानी और काउंसलिंग की जा रही है।" इस बीच, जब पुलिस वांगचुक को ले गई, तो जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन स्थल पर भाषण देते समय एक महिला ने दिपके पर स्याही फेंक दी।