युवा राजनीति के शोर में कमलनाथ के विजन की गूंज



--विजया पाठक

एडिटर - जगत विजन

भोपाल - मध्यप्रदेश, इंडिया इनसाइड न्यूज।

●कमलनाथ की दूरदर्शी सोच में था युवाओं के भविष्य का विजन

●युवाओं के सपनों को पंख देने के लिए बनाई थी दूरगामी योजनाएं

मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों युवाओं को लेकर गतिविधियां तेज हैं। प्रदेश के अलग-अलग शहरों में सम्मेलन, संवाद कार्यक्रम और युवा कॉन्क्लेव आयोजित किए जा रहे हैं। राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेता युवाओं के बीच पहुंच रहे हैं, उनसे संवाद कर रहे हैं और उनके भविष्य, रोजगार, शिक्षा तथा प्रदेश के विकास को लेकर अपनी योजनाएं प्रस्तुत कर रहे हैं। राहुल गांधी के ‘गूंज’ कार्यक्रम से लेकर भाजपा के राष्ट्रीय नेताओं के युवा संवाद, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत की युवाओं से चर्चा और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के संवाद कार्यक्रमों तक, एक बात स्पष्ट है कि युवा अब प्रदेश की राजनीति के केंद्र में हैं। लेकिन इस राजनीतिक सक्रियता के बीच एक सवाल भी उठता है कि क्या युवाओं को लेकर राजनीतिक दलों की सोच केवल सम्मेलनों, भाषणों और संवाद कार्यक्रमों तक सीमित है या उसके पीछे रोजगार, कौशल विकास, स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता का कोई ठोस विजन भी है? इसी संदर्भ में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के वर्ष 2018-19 के दृष्टिकोण और उनके 18 महीने के कार्यकाल का मूल्यांकन महत्वपूर्ण हो जाता है।

•युवाओं को विकास का भागीदार मानने की सोच

कमलनाथ ने उद्योग, निवेश, व्यापार और आर्थिक विकास से जुड़े विषयों पर काम किया। मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके सामने मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति देने के साथ युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की चुनौती भी थी। उनके दृष्टिकोण का महत्वपूर्ण पक्ष यह था कि प्रदेश की प्रगति को केवल सरकारी योजनाओं या बुनियादी ढांचे के निर्माण तक सीमित नहीं रखा जा सकता। विकास का वास्तविक लाभ तब दिखाई देता है, जब स्थानीय युवाओं को अपने ही प्रदेश में काम करने, उद्यम शुरू करने और अपनी योग्यता के अनुसार आगे बढ़ने के अवसर मिलें। युवा आबादी किसी भी राज्य की सबसे बड़ी ताकत होती है। लेकिन यदि शिक्षित युवा रोजगार की तलाश में भटकते रहें, तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं को काम न मिले और छोटे शहरों के प्रतिभाशाली युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर न मिलें, तो जनसांख्यिकीय लाभ चुनौती में बदल सकता है।

•निवेश और उद्योग से रोजगार तक की कड़ी

कमलनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने निवेश आकर्षित करने और उद्योगों के विकास के लिए कदम उठाए। उनके कार्यकाल में आयोजित मैग्निफिसेंट मध्यप्रदेश निवेश सम्मेलन भी इसी प्रयास का हिस्सा था। ऐसे आयोजनों की वास्तविक सफलता का आकलन केवल निवेश प्रस्तावों की संख्या से नहीं, बल्कि उनके धरातल पर उतरने, स्थापित होने वाली इकाइयों और उनसे पैदा होने वाले रोजगार के आधार पर किया जाना चाहिए। कमलनाथ के विजन में औद्योगिक विकास और निवेश को रोजगार सृजन के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में देखा गया। इस सोच के पीछे एक व्यवहारिक तर्क था। जब किसी प्रदेश में उद्योग स्थापित होते हैं तो केवल कारखानों में ही नौकरियां नहीं बनतीं। परिवहन, पैकेजिंग, रखरखाव, आपूर्ति, विपणन, तकनीकी सेवाओं और छोटे कारोबारों में भी अवसर पैदा होते हैं। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलती है और युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलते हैं।

•रोजगार देने वाला बनने का अवसर

मध्यप्रदेश जैसे राज्य में कृषि आधारित उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प, पर्यटन, डिजिटल सेवाओं और स्थानीय उत्पादों के विपणन में व्यापक संभावनाएं हैं। यदि युवाओं को वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण, बाजार तक पहुंच और मार्गदर्शन मिले, तो वे न केवल अपनी आजीविका सुनिश्चित कर सकते हैं, बल्कि दूसरे लोगों को भी रोजगार दे सकते हैं। कमलनाथ के युवा विजन अनुसार उन्होंने स्वरोजगार को आर्थिक आत्मनिर्भरता के व्यापक लक्ष्य से जोड़ा। इस दिशा में किसी भी सरकार की सफलता का पैमाना केवल योजनाओं की घोषणा नहीं, बल्कि नए उद्यमों की स्थापना, उनके टिकाऊ बने रहने और उनसे पैदा हुए रोजगार के अवसर होने चाहिए।

•18 महीने का कार्यकाल और अधूरे अवसरों का सवाल

कमलनाथ ने दिसंबर 2018 में मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली थी। मार्च 2020 में उनकी सरकार का कार्यकाल समाप्त हो गया। इस अवधि में किसी भी सरकार की सभी दीर्घकालिक योजनाओं के परिणाम सामने आना स्वाभाविक रूप से कठिन होता है। कमलनाथ के कार्यकाल का आंकलन करते समय घोषित नीतियों, शुरू की गई पहलों और वास्तविक परिणामों के बीच अंतर करना जरूरी है। कमलनाथ के समर्थकों का मानना है कि उनके पास औद्योगिक विकास और आर्थिक गतिविधियों को रोजगार से जोड़ने की दृष्टि थी, जिसे लंबा कार्यकाल मिलने पर और आगे बढ़ाया जा सकता था।

•आज की युवा राजनीति और कमलनाथ की विरासत

वर्तमान समय में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार भी युवाओं, रोजगार, कौशल विकास, स्टार्टअप और उद्यमिता से जुड़े विषयों पर जोर दे रही है। विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा युवा संवाद कार्यक्रम आयोजित करना यह बताता है कि युवाओं की आकांक्षाएं अब राजनीतिक विमर्श का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी हैं। इसके बावजूद कमलनाथ के कार्यकाल को इस व्यापक बहस में शामिल करना जरूरी है कि मध्यप्रदेश में युवाओं के लिए रोजगार आधारित विकास की दिशा क्या होनी चाहिए। युवा राजनीति का अर्थ केवल युवाओं के साथ मंच साझा करना नहीं, बल्कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए दीर्घकालिक आर्थिक व्यवस्था तैयार करना है।

•अवसरों की राजनीति जरूरी

आज मध्यप्रदेश की राजनीति में युवा केंद्र में हैं। यह सकारात्मक स्थिति है, क्योंकि इससे राजनीतिक दलों पर युवाओं की वास्तविक समस्याओं का समाधान खोजने का दबाव बढ़ता है। कमलनाथ के युवा विजन पर चर्चा का सार भी इन्हीं सवालों में छिपा है। उनके समर्थकों के अनुसार, औद्योगिक निवेश, आर्थिक विकास और रोजगार को एक साथ देखने की उनकी सोच मध्यप्रदेश के लिए महत्वपूर्ण थी। उनके 18 महीने के कार्यकाल को इस दृष्टिकोण की संभावनाओं और सीमाओं, दोनों के आधार पर समझा जाना चाहिए। अंततः युवाओं का भविष्य किसी एक सम्मेलन, भाषण या राजनीतिक दावे से तय नहीं होगा। इसका निर्धारण उन नीतियों से होगा, जो शिक्षा को रोजगार से, कौशल को अवसर से और उद्यमिता को आर्थिक आत्मनिर्भरता से जोड़ें। कमलनाथ की राजनीतिक विरासत का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष भी इसी कसौटी पर परखा जाना चाहिए।

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