--के• विश्वदेव राव
महासचिव - इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स।
स्क्रीन पर एक चेहरा आता है। गहरे रंग की सदरी, माथे पर तिलक, आँखों में वह गंभीरता जो कैमरे के सामने अभ्यास से आती है। वह कहता है, “अगर आपकी राशि यह है, तो अगले तीस दिन में बहुत बड़ा बदलाव आएगा।” और कमेंट बॉक्स में हज़ारों लोग, “पंडित/आचार्य जी, मेरी शादी कब होगी?” “नौकरी लगेगी या नहीं?” “माँ की तबीयत ठीक होगी?”
यह रील/विडियो है, जहाँ ज्योतिष अब ज्ञान नहीं, सामग्री बन गया है, जहाँ भविष्य कहना अब साधना नहीं, व्यवसाय है। मेरी चिंता ज्योतिष से नहीं, उस व्यवस्था से है जिसने भविष्यवाणी को प्रचार तंत्र (सोशल मीडिया) की मुद्रा में ढाल दिया है।
पुराने जमाने में ज्योतिषी से मिलना एक प्रक्रिया थी, जन्म-समय, कुंडली, प्रश्न, संदेह, बहस। सामने बैठा वाचक शब्दों को तौलता, विफलताओं को याद रखता था। आज वही ज्योतिषी स्क्रीन के उस पार है, जहाँ चेहरा दिखता है, वह भी आडंबर से भरा, पर जवाबदेही नहीं। वह आपका दुख नहीं जानता, वह जानता है कि किस शब्द पर आपकी नज़र रुकेगी।
इस व्यवसाय (इसे अब बना दिया गया है) का पैमाना छोटा नहीं है। ख़बरों के अनुसार, एस्ट्रोटॉक नमक एक ज्योतिष परामर्श की वेबसाइट, अगस्त 2026 में एक अरब डॉलर के मूल्यांकन वाली “यूनिकॉर्न” बनी गई। उसका परिचालन राजस्व वित्त वर्ष 2022-23 के लगभग 283 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 1,176 करोड़ रुपये हो गया, इसी वर्ष कर-पूर्व लाभ 285 करोड़ रुपये रहा। उसका एक भाग जो रत्न, रुद्राक्ष, क्रिस्टल और वास्तु सामग्री बेचता है वह वर्ष 2025 में 140 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व ला चुका है। यह सिर्फ एक है तमाम में से।
भविष्य बताना, इस व्यवस्था का पहला द्वार हैं, जो अक्सर मुफ्त दी जाती है, पर अंत में वह उस दर्शक की चिंता को परामर्श, उपाय या रत्न खरीदने की मजबूरी में बदल देता है। भरोसा, भय और बाद की खरीद ही इस धंधे की असली पूँजी है।
रील/विडियो को वायरल होने के लिए तीन चीज़ें चाहिए: “डर, व्यक्तिगत संबंध और तुरंत उपाय”। “यह ग्रह आपके लिए खतरनाक है”- डर। “आपकी राशि वालों को यह अवश्य सुनना चाहिए”- व्यक्तिगत संबंध। “बस यह छोटा-सा उपाय कर लीजिए”-राहत। भविष्यवाणी यहाँ जानकारी नहीं, लुभाने का तरीका है, उपाय धर्म नहीं, सामग्री बेचने का तरीका है।
ज्योतिष की रीलें/विडियो बारह राशियों में बँटी दर्शक-श्रेणियाँ पहले से बना देती हैं, हर व्यक्ति अपने लिए संदेश ढूँढता, टैग और शेयर करता है। शोध बताते हैं कि लोग इन्हें मनोरंजन, आत्म-निरीक्षण और सामाजिक सहारे के लिए देखते हैं, और यही भावनात्मक जरूरत उन्हें बाँधे रखती है।
•आपने कभी सोचा है, जब भविष्यवाणी गलत निकले, तो क्या होता है?
वो रील डिलीट हो जाती है, या उसका अर्थ बदल दिया जाता है, जैसे, “मैंने तो चेतावनी दी थी,” “आपकी श्रद्धा पूरी नहीं थी,” “समय थोड़ा आगे-पीछे हो सकता है।” भविष्यवाणी कभी गलत नहीं होती, बस उसकी तिथि बदल दी जाती है।
जब कोई ज्योतिषी युद्ध, आर्थिक पतन या प्राकृतिक आपदा की भविष्यवाणी करता है, तो वह लाखों लोगों की चिंता को हवा देता है, और गलत सिद्ध होने पर उसका कोई लेखा-जोखा नहीं होता। भविष्यवक्ता को कोई दंड नहीं, बस अगली रील मिल जाती है।
इस बाज़ार में “सही” और “गलत” का मापदंड ही बदल गया है। रील की सफलता सत्यता से नहीं, उसकी पहुँच से तय होती है, जो भविष्यवाणी ज्यादा लोगों तक पहुँची, वही “सच” बन जाती है। पहुँच यहाँ प्रमाण होता है।
गीता कहती है, कर्म करो, फल की चिंता मत करो। इस आदेश में विशाल नैतिक साहस है, नतीजे पर अपना अधिकार छोड़ देना, फिर भी प्रयास से पीछे न हटना। आज की रील-ज्योतिष इसका उलटा करती है। वह कहती है, फल की चिंता करो, उसके लिए उपाय खरीदो, और कर्म को ग्रहों की कृपा पर छोड़ दो।
यहाँ एक गहरा विरोधाभास है। जिस ज्योतिष को “कर्म की व्याख्या” कहा जाता है, वही आज व्यक्ति को कर्म से काट रहा है। अध्यात्म जब आत्मनिरीक्षण की भाषा बोलता है, तो वह मुक्त करता है, जब अभिशाप और निवारण की भाषा बोलता है, तो वह बेड़ी बनाता है।
•सोचिये इस बेड़ी का सबसे बड़ा लाभार्थी कौन है?
वह व्यवस्था, जिसे यह बताया जाता है कि बेरोजगारी आपकी कुंडली का फल है, न कि नीति की विफलता, परीक्षा रद्द होना शनि की परीक्षा है, न कि पेपर लीक करने वालों की बेईमानी। जब दोष तारों और ब्रह्मांड पर डाल दिया जाता है, तो जिम्मेदार व्यक्ति और संस्था निर्दोष बन जाते हैं। ग्रह उत्तर नहीं देंगे, और शायद यही उनकी सबसे बड़ी उपयोगिता है।
यह आरोप सभी पर नहीं लग सकता। कुछ लोग वास्तव में ज्ञान बाँटते हैं, कुछ सांत्वना देते हैं। समस्या व्यक्ति की नहीं, प्रेरणा की है। जब उद्देश्य, दर्शक की मुक्ति हो, तो वह सेवा है, जब फॉलोअर बनाना हो, तो व्यापार। और जब व्यापार को धर्म का वेश दे दिया जाए, तो उसे चुनौती देना आवश्यक हो जाता है।
साइबराबाद (तेलंगाना) पुलिस ने मई 2026 में सार्वजनिक चेतावनी जारी की थी कि सोशल मीडिया पर नकली ज्योतिषी, तांत्रिक और “वशीकरण” विशेषज्ञ लोगों को छोटी रकम देने के लिए राजी करते हैं और फिर धमकी, ब्लैकमेल या निरंतर भुगतान की मांग के जरिए उन्हें उलझाते हैं। यह एक सामाजिक रोग का लक्षण भी है, व्यक्ति अपनी विफलता का कारण भीतर या आकाश में खोजने लगता है, व्यवस्था में नहीं। ऐसे कई उदाहरण है।
संविधान का अनुच्छेद 51क(ज) नागरिक से वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना के विकास की अपेक्षा करता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण का अर्थ आस्था पर वार नहीं है, इसका अर्थ है कि आप पूछ सकें, यह कहने वाला कौन है, उसका हित क्या है, उसका दावा किस पर टिका है, और गलत होने पर वह क्या जवाब देगा?
नवरात्रि का पर्व चल रहा है। ये दिन शक्ति की उपासना के हैं और ठीक इन्हीं दिनों स्क्रीन पर “विशेष नवरात्रि अनुष्ठान”, “माँ का सिद्ध यंत्र” और “आज रात यह उपाय किया तो मनोकामना पूरी” जैसे विज्ञापनों की बाढ़ आएगी। पर जिन माँ दुर्गा की हम आराधना करते हैं, वे शक्ति की देवी हैं, सौदे की नहीं। नवरात्रि संयम, उपवास, जप और आत्मशुद्धि का पर्व है, इसमें न किसी बिचौलिये की ज़रूरत है, न किसी ऐप की बुकिंग की। जो परिणाम की गारंटी दे, “सिर्फ आज रात” की जल्दबाज़ी मचाए, “अनिष्ट होगा” का डर दिखाए, या ओटीपी और बैंक-विवरण माँगे, वह साधक नहीं, सौदागर है। आपकी श्रद्धा आपके और आपकी आस्था के बीच की बात है, उसे किसी के बैंक खाते से गुज़रने की ज़रूरत नहीं।
फिलवक्त भविष्य बेचने वालों की भीड़ बढ़ती जाएगी, क्योंकि वे आपके संशय और पीड़ा पर अपनी रोटियां सेकेंतें है।
इस नवरात्रि माँ से शक्ति माँगिए - डर से लड़ने की, मेहनत करने की, सही सवाल पूछने की। अपने पैसे और अपने विवेक की रक्षा कीजिए। कर्म ही सबसे बड़ा उपाय है।






