केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह का राज्‍य सभा में नागरिकता संशोधन विधेयक के सन्दर्भ में दिया गया वक्‍तव्‍य



नई दिल्ली, 09 जनवरी 2019, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

॥●॥ केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह का राज्‍य सभा में नागरिकता संशोधन विधेयक के सन्दर्भ में दिया गया वक्‍तव्‍य

“अध्यक्ष महोदय,

मैं इस सम्‍मानित सदन के समक्ष North Eastern States में वर्तमान की Situation के संबंध में बयान देने के लिए खड़ा हुआ हूं।

हमें कुछ रिपार्ट प्राप्‍त हुई हैं तथा इस सदन में कुछ सम्‍मानित सदस्‍यों ने भी बताया है कि कल पूर्वोत्‍तर के कुछ हिस्‍सों में Citizenship Amendment Bill को लेकर बंद के दौरान हिंसा की छिटपुट घटनाएं असम, त्रिपुरा एवं मेघालय के कुछ स्‍थानों से रिपोर्ट की गई हैं।

आज स्‍थिति पूरी तरह से शांतिपूर्ण है। North-East में हमारी Current Security Situation पर भी बराबर दृष्‍टि बनी हुई है। हम North-East में शांति बनी रहे, सौहार्दपूर्ण वातावरण बना रहे इसके लिए भी हम पूरी से सचेष्‍ट हैं और राज्‍य सरकारों के साथ मिलकर सभी आवश्‍यक उपाय करेंगे। मैं इस बारे में उन सभी राज्‍यों के मुख्‍यमंत्रियों के साथ संपर्क में हूं और शीघ्र ही उनकी बैठक भी बुलाउंगा।

मैं इस सदन का विश्‍वास दिलाना चाहता हूं कि हम North-East के सभी राज्‍यों के वासियों की Identity एवं Culture को Preserve करने तथा वहां पर शांति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसके लिए हम इन सभी राज्‍यों की सरकारों के साथ लगातार संपर्क में हैं और रहेंगे और उनकी जो भी Concerns हैं उनको Address करने के लिए जो भी उपाय करने होंगे, उन्‍हें करेंगे। हमने पिछले 4 वर्षों में Illegal Migration की रोकथाम के लिए Border Security को सुदृढ़ करने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं जिसके बारे में मैं सदन को पहले भी सूचित कर चुका हूं।

मैं इस सदन को बताना चाहूंगा कि पिछले चार साल में हमारी सरकार की नीतियों और हमारी North-East की समस्‍याओं के प्रति संवेदनशीलता के परिणामस्‍वरूप इन राज्‍यों की Security Situation में अप्रत्‍याशित सुधार हुआ है। तथा विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हुआ है। इस संबंध में हमने कई ठोस कदम उठाए हैं जैसे कि Security तथा Intelligence Establishment को सुदृढ़ बनाना, Security Agencies के बीच में Effective Coordination, विकास के कई बड़े Projects तथा पूर्वोत्‍तर वासियों की कई Long Standing Demands को Address करना शामिल है।

Citizenship Amendment Bill के संबंध में आपके तथा पूर्वोत्‍तर में जो concerns हैं उनसे मैं अवगत हूं। Citizenship Amendment Bill के संबंध में कुछ भ्रांतियां फैलाने की कोशिश की जा रही है।

मैं यह बताना चाहूंगा कि हम Citizenship Amendment Bill इसलिए लेकर आए हैं ताकि हमारे तीन पड़ोसी देशों के छह अल्‍पसंख्‍यक समुदायों के migrants की संकटपूर्ण परिस्थितियों का निवारण किया जा सके। ये वैसे लोग हैं जो धार्मिक उत्‍पीड़न के कारण भारत में shelter लेने के लिए बाध्‍य हुए हैं।

इसको लेकर असम और पूर्वोत्‍तर के कुछ अन्‍य राज्‍यों में भी कुछ लोगों के मन में शायद कुछ आशंकाएं हैं। मैं स्‍पष्‍ट करना चाहता हूं कि यह विधेयक सिर्फ असम में रह रहे Migrants के लिए नहीं है। न ही यह किसी एक देश से भारत आने वाले migrants की भलाई के लिए है। हजारों- हजारों की संख्या में migrants देश की पश्चिमी सीमाओं से होकर भी गुजरात, राजस्‍थान, दिल्‍ली, मध्‍य प्रदेश और अन्‍य राज्‍यों में रह रहे हैं। यह कानून उनके लिए भी है।

मैं फिर स्पष्ट करना चाहता हूँ कि यह विधेयक देश के सभी States और UTs के लिए लागू होगा। यह किसी एक राज्य या क्षेत्र के लिए नहीं है। इसके पीछे सोच यह है कि उत्‍पीड़न के शिकार ऐसे migrants देश में कहीं भी हैं, वहां भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकें और उसके बाद किसी भी भारतीय नागरिक की तरह देश के किसी भी राज्य में रह सकेंगे। उनकी जिम्मेवारी पूरे देश की है न कि किसी एक राज्य की। जिम्‍मेवारी केवल असम की नहीं होगी। या केवल North-East की नहीं होगी।

हम सभी जानते हैं कि असम राज्‍य कई दशकों से illegal migration की समस्‍या से जूझ रहा है । असम में वर्ष 1979-1985 के दौरान एक आन्‍दोलन छिड़ा था । 15 अगस्‍त, 1985 को असम समझौते पर हस्‍ताक्षर किए गए।

मैंने लोकसभा में कल भी बताया तथा आज इस सदन को भी बताना चाहूंगा कि हमने असम समझौते को लागू करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं जैसे कि असम में NRC के काम को पूरा करना। Assam Accord के Clause 6 को लागू करने के लिए High Level Committee का गठन करना। यह Committee सभी स्टेकहोल्डरों से परामर्श करके असम विधान सभा तथा local Bodies में सीटों के आरक्षण, असम के लोगों के लिए राज्य सरकार में नौकरियों में आरक्षण, असमी तथा असम के लोगों की अन्य स्थानीय भाषाओँ को protect करने के उपायों तथा असम के लोगों की सांस्कृतिक, सामाजिक, भाषायी पहचान और विरासत का संरक्षण तथा बढ़ावा देने के उपायों सहित विभिन्न पहलुओं पर अपनी Recommendations 6 माह के अंदर देगी।

असम की 06 Communities - कोचराजबोंग्‍शी, सुटिया, मोरन, मोटक, टॉय अहोम तथा टी-जनजातियों को Tribal Status करने की मांग लंबे समय से की जाती रही है। असम की सरकार वर्ष 1980 से इसके लिए सिफारिश करती रही है। गृह मंत्रालय ने इस संबंध में 29.02.2016 को एक समिति का गठन किया था। मैं यह सूचित करना चाहता हूँ कि इस समिति ने 29.12.2018 को अपनी Recommendations दे दी हैं। Ministry of Tribal Affairs ने इस बारे में Registrar General एवं ST Commission की Recommendations भी प्राप्‍त कर ली हैं। हमारी सरकार ने इन Recommendations को स्‍वीकार कर लिया है और Ministry of Tribal Affairs ने इसके लिए संविधान संशोधन के लिए बिल संसद में आज पेश भी कर दिया है। मैं यह आश्‍वस्‍त करना चाहता हूं कि इन 06 Communities को Tribes का Status देते समय यह Ensure किया जायेगा कि असम की Existing Tribes के सभी Interests, Rights एवं Privileges को पूरी तरह से Protect किया जायेगा। इसके लिए असम की राज्‍य सरकार को Stakeholders के साथ परामर्श करने के बाद Appropriate प्रावधान करने के लिए कहा गया है।

हम बोडो समुदाय की लंबित मांगों के बारे में भी चिंतित हैं। वर्ष 2003 में जो Bodo Accord हुआ था उसके बाद संविधान की छठी अनुसूची के अंतर्गत Bodoland Territorial Council की स्‍थापना की गई थी तथा Council को विभिन्‍न कार्यकारी, विधायी तथा न्‍यायिक शक्तियां सौंपी गई थी। विभिन्‍न बोडो संगठनों से representations प्राप्‍त होते रहे हैं। हम इसी प्रकार से Hill Areas में रहने वाले बोडो कचारी तथा Plains में रहने वाले Karbi समुदाय के लोगों को भी Tribes का Status देने के लिए कार्रवाई करेंगे। साथ ही Sixth Schedule की Autonomous District Councils को ज्‍यादा अधिकार दिए जाएंगे। Cabinet ने 2 जनवरी को यह निर्णय लिया है कि संस्‍कृति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा funded एक बोडो संग्रहालय एवं भाषा तथा सांस्कृतिक अध्‍ययन केन्‍द्र की स्‍थापना करेगा, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, कोकराझार में मौजूदा आकाशवाणी केन्‍द्र तथा दूरदर्शन केन्‍द्र का आधुनिकीकरण करेगा और रेल मंत्रालय BTAD से गुजरने वाली सुपरफास्‍ट ट्रेन का नाम अरोनाई एक्सप्रेस रखेगा।

असम में विभिन्‍न संगठनों द्वारा कई अन्‍य मुद्दे भी उठाए गए हैं। इनमें असम में रहने वाले लोगों के interests को protect करने हेतु एक New land Policy, new land laws तथा specific areas को protected revenue areas के रूप में earmark करना शामिल है। असम की राज्‍य सरकार से इन मामलों को Address करने तथा Indigenous लोगों के रीति-रिवाजों, परम्‍पराओं, भाषाओं और बोलियों के research और documentation के लिए Institutions की स्‍थापना के लिए कहा गया है।”

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