खबरें विशेष : मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी



नई दिल्ली, 16 अप्रैल 2019, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

॥●॥ मंत्रिमंडल ने जीयोसिंक्रोनस सेटेलाइट लांच व्‍हेकिल (जीएसएलवी) के चौथे चरण को जारी रखने की मंजूरी दी

मंत्रिमंडल ने जीयोसिंक्रोनस सेटेलाइट लांच व्हेकिल (जीएसएलवी) के चौथे चरण को जारी रखने की मंजूरी दी। चौथे चरण के अंतर्गत 2021-24 की अवधि के दौरान 5 जीएसएलवी उड़ानें शामिल है।

जीएसएलवी कार्यक्रम- चरण 4 से जियो-इमेजिंग, नेवीगेशन, डेटा रिले कॉम्‍यूनिकेशन और स्‍पेस साइंस के लिए दो टन वर्ग के उपग्रहों को लांच करने की क्षमता मिलेगी।

• वित्‍तीय भार:

कुल 2729.13 करोड़ रुपये की निधि की आवश्‍यकता है, जिसमें 5 जीएसएलवी व्‍हेकिल, आवश्‍यक सुविधा बढ़ोत्‍तरी, कार्यक्रम प्रबंधन और लांच अभियान की लागत शामिल है। मौजूदा जीएसएलवी निरंतरता कार्यक्रम की संभावनाओं के तहत अतिरिक्‍त निधियों की आवश्‍यकता होगी।

• लाभ:

जीएसएलवी निरंतरता कार्यक्रम- चरण 4 के जरिए महत्‍वपूर्ण उपग्रह नौवहन सेवाएं प्रदान करने, भारतीय मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम और अगले मंगल अभियान के संबंध में डेटा रिले कॉम्‍यूनिकेशन संबंधी उपग्रहों की आवश्‍यकताएं पूरी करने में मदद मिलेगी। इससे घरेलू स्‍तर पर उत्‍पादन जारी रखना भी सुनिश्चित होगा।

• कार्यान्‍वयन रणनीति और लक्ष्‍य:

जीएसएलवी निरंतरता कार्यक्रम- चरण 4 से प्रतिवर्ष दो उपग्रह लांच करने की मांग पूरी होगी, जिसमें भारतीय उद्योग की सर्वाधिक भागीदारी होगी। सारी परिचालन उड़ानें 2021-24 की अवधि के दौरान पूरी हो जाएंगी।

• प्रमुख प्रभाव:

जीएसएलवी के प‍रिचालन से देश संचार और मौसम संबंधी उपग्रहों के मद्देनजर दो टन वर्ग वाले उपग्रहों को लांच करने के क्षेत्र में आत्‍मनिर्भर हो गया है। जीएसएलवी निरंतरता कार्यक्रम से राष्‍ट्रीय आवश्‍यकताओं को ध्‍यान में रखकर इसी तरह के उपग्रहों को लांच करने में आत्‍मनिर्भरता मिलेगी और क्षमता बढ़ेगी। इसमें नौवहन उपग्रहों की अगली पीढ़ी, डेटा रिले कॉम्‍यूनिकेशन उपग्रह और अंतर-ग्रह अभियान शामिल हैं।

• पृष्‍ठभूमि:

जीएसएलवी से जीयोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (जीटीओ) के सिलसिले में दो टन वर्ग के उपग्रहों को लांच करने के लिए अंतरिक्ष में स्‍वतंत्र पहुंच प्राप्‍त हो गई है। जीएसएलवी निरंतरता कार्यक्रम का एक सर्वाधिक महत्‍वपूर्ण परिणाम यह है कि अत्‍यंत जटिल क्रायोजेनिक प्रोपल्‍शन प्रौद्योगिकी में महारथ हासिल हुई है, जो जीटीओ में संचार उपग्रहों को लांच करने की प्रौद्योगिकी क्षमता के लिए बहुत जरूरी है। इससे उच्‍च ऊर्जा वाले क्रायोजेनिक इंजन के विकास तथा लांच व्‍हेकिल की अगली पीढ़ी यानी जीएसएलवी एमके –iii के चरण का मार्ग प्रशस्‍त हुआ है।

19 दिसंबर, 2018 को जीएसएलवी-एफ 11 के हाल में सफल लांच के साथ जीएसएलवी ने कामयाबी से 10 राष्‍ट्रीय उपग्रहों को कक्षा में भेजा है। स्‍वदेशी क्रायोजेनिक अपर स्‍टेज के साथ जीएसएलवी ने संचार, नौवहन और मौसम संबंधी उपग्रहों के संबंध में खुद को एक भरोसेमंद लांच व्‍हेकिल के रूप में तथा भावी अंतर-ग्रह अभियान शुरू करने के लिए स्‍थापित कर लिया है।

जीएसएलवी निरंतरता कार्यक्रम को 2003 में मंजूरी दी गई थी और दो चरण पूरे किए जा चुके हैं। तीसरा चरण प्रगति पर है और उम्‍मीद की जाती है कि 2020-21 की चौथी तिमाही में उसे पूरा कर लिया जाएगा।


॥●॥ मंत्रिमंडल ने अपतटीय पवन ऊर्जा पर विशेष ध्‍यान के साथ नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत और डेनमार्क के बीच सहयोग समझौते को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने अपतटीय पवन ऊर्जा पर विशेष ध्‍यान के साथ नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय तथा डेनमार्क के ऊर्जा, उपयोग व जलवायु मंत्रालय के बीच रणनीतिक सहयोग समझौते को मंजूरी दी। मंत्रिमंडल ने भारत में ‘भारत-डेनमार्क सेंटर ऑफ एक्‍सिलेंस फॉर रिन्‍यूअबल एनर्जी’ की स्‍थापना के आशय-पत्र को भी मंजूरी प्रदान की। इस समझौते पर मार्च 2019 में नई दिल्‍ली में हस्‍ताक्षर किये गये थे।

सहयोग समझौते का उद्देश्‍य अपतटीय पवन ऊर्जा पर विशेष ध्‍यान देते हुए नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है। सहयोग के क्षेत्रों में अपतटीय पवन परियोजनाओं के प्रबंधन के लिए तकनीकी क्षमता विकसित करना, उच्‍च कार्यकुशलता के साथ पवन ऊर्जा उद्योग (तटीय व अपतटीय दोनों) को विकसित करने के उपाय, पवन टर्बाइन, कलपुर्जे और प्रमाणीकरण की उच्‍च गुणवत्‍ता सुनिश्चित करने के उपाय तथा अपतटीय पवन के बारे में भविष्‍यवाणी करना व समयसारणी बनाना आदि शामिल हैं।

भारत-डेनमार्क सेंटर ऑफ एक्‍सिलेंस नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों के मूल्‍यांकन का काम करेगा। अपतटीय और तटवर्ती पवन पर विशेष ध्‍यान दिया जायेगा। इसके अतिरिक्‍त यह केन्‍द्र पवन, सौर, जल-विद्युत और भंडारण तकनीक को आपस में जोड़ने, नवीकरणीय ऊर्जा को उच्‍च स्‍तर के पवन ऊर्जा से एकीकृत करने, जांच और अनुसंधान तथा कौशल विकास/क्षमता निर्माण करने पर भी विशेष ध्‍यान देगा।

दस्‍तावेज़ों पर हस्‍ताक्षर से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग को मजबूती प्रदान करने में सहायता मिलेगी।


॥●॥ मंत्रिमंडल ने चिकित्‍सा की परम्‍परागत पद्धतियों और होम्‍योपैथी के क्षेत्र में भारत तथा बोलिविया के बीच सहयोग के लिए हुए समझौता ज्ञापन को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने चिकित्सा की परम्परागत पद्धतियों और होम्योपैथी के क्षेत्र में भारत और बोलिविया के बीच सहयोग के लिए हुए समझौता ज्ञापन को पूर्वव्‍यापी मंजूरी दे दी है। समझौता ज्ञापन पर बोलिविया में मार्च 2019 पर हस्‍ताक्षर किए गए थे।

• प्रभाव : समझौता ज्ञापन चिकित्‍सा की परम्‍परागत पद्धतियों और होम्‍योपैथी को बढ़ावा देने के लिए दोनों देशों के बीच सहयोग की रूपरेखा तैयार करेगा और यह दोनों देशों के लिए लाभकारी सिद्ध होगा। इससे बोलिविया में चिकित्‍सा की परम्‍परागत पद्धतियों और होम्‍योपैथी को बढ़ावा देने के साथ-साथ उसका प्रचार-प्रसार होगा तथा बोलिविया में आयुष (आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्‍योपैथी) के महत्‍व को बढ़ावा मिलेगा। समझौता ज्ञापन चिकित्‍सकों और वैज्ञानिकों को प्रशिक्षण देने के लिए सहयोगपूर्ण अनुसंधान करने के उद्देश्‍य से विशेषज्ञों के आदान-प्रदान की सुविधा को बढ़ाएगा, जिससे औषधि विकास और चिकित्‍सा की परम्‍परागत पद्धतियों में नये अविष्‍कार किए जा सकेंगे।


॥●॥ मंत्रिमंडल ने भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक के कार्यालय में उप-नियंत्रक और महालेखापरीक्षक के एक पद के सृजन को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक के कार्यालय में उप-नियंत्रक और महालेखापरीक्षक (समन्‍वय, संचार और सूचना प्रणाली) वेतनमान स्‍तर – 17 में एक पद (एक एसटीएस स्‍तर के पद की समाप्ति के साथ) के सृजन को मंजूरी दी।

उप-नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक राज्‍य लेखाधिकारियों के बीच समन्‍वय, दूरसंचार के लेखा और भारतीय लेखा विभाग (आईए एंड एडी) के अंतर्गत विभिन्‍न सूचना प्रणाली (आईएस) पहलों का निरीक्षण करेंगे।

इस पद के सृजन से लगभग 21 लाख रूपये का व्‍यय आयेगा।


॥●॥ मंत्रिमंडल ने भू-विज्ञान और खनिज संसाधनों के क्षेत्र में सहयोग के लिए भारत और बोलिविया के बीच हुए समझौता ज्ञापन को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने भारत और बोलिविया के बीच भू-विज्ञान और खनिज संसाधनों के क्षेत्र में सहयोग के लिए हुए समझौता ज्ञापन को पूर्वव्‍यापी मंजूरी दे दी है। समझौता ज्ञापन पर बोलिविया में मार्च 2019 पर हस्‍ताक्षर किए गए थे।

• प्रभाव : समझौता ज्ञापन खनिज संसाधनों के क्षेत्र में भारत और बोलिविया के बीच सहयोग के लिए एक संस्‍थागत तंत्र प्रदान करेगा। समझौता ज्ञापन संसाधनों के बारे में जानकारी के आदान-प्रदान, कानून और नीति, विकास रणनीति के बारे में विचारों का आदान-प्रदान करने के लिए सेमिनारों के आयोजन, दोनों देशों के बीच प्रौद्योगिकी हस्‍तांत‍रण को प्रोत्‍साहन, मूल्‍य संवर्धन को बढ़ावा देगा, जिससे प्रलेखन और प्रसार आदि का कार्य करने में मदद मिलेगी।


॥●॥ मंत्रिमंडल ने गैस आधारित यूरिया इकाईयों के लिए नई यूरिया नीति- 2015 की मियाद बढ़ाने को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने उर्वरक विभाग के प्रस्‍ताव के मद्देनजर मौजूदा गैस आधारित यूरिया इकाईयों के लिए नई यूरिया नीति- 2015 की मियाद को 1 अप्रैल, 2019 से अगले आदेशों तक बढ़ाने को मंजूरी दे दी है। यह मंजूरी उन प्रावधानों पर लागू नहीं होती जो 28 मार्च, 2018 की अधिसूचना के जरिए पहले ही संशोधित किए जा चुके हैं।

इस कदम से किसानों को यूरिया की नियमित आपूर्ति और उसके परिचालन को जारी रखने में मदद मिलेगी।


॥●॥ मंत्रिमंडल ने संचार क्षेत्र में सहयोग के लिए भारत और कम्‍बोडिया के बीच समझौता-ज्ञापन को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में मंत्रिमंडल ने संचार क्षेत्र में सहयोग के लिए भारत और कम्बोडिया के बीच समझौता-ज्ञापन को मंजूरी दे दी। समझौता-ज्ञापन पर मार्च, 2019 में कम्‍बोडिया में हस्‍ताक्षर किए गए थे।

• प्रभाव : इस समझौता-ज्ञापन से संचार क्षेत्र में भारत और कम्‍बोडिया के बीच आपसी समझ और द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत बनाने में सहायता होगी।


॥●॥ मंत्रिमंडल को जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत और ब्राजील के बीच समझौते से अवगत कराया गया

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल को जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत और ब्राजील के बीच मई 2018 में हुए समझौते से अवगत कराया गया।

भारत और ब्राजील के बीच विज्ञान और प्रौद्योगिकी के अंतर्गत नवोन्‍मेष में सहयोग हेतु द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर किये गये थे। इसका उद्देश्‍य जैव-प्रौद्योगिकी शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान के क्षेत्र में ठोस रणनीतिक योजना विकसित करना है।

● सहयोग के प्रमुख क्षेत्र हैं-

• जैव औषधि और स्‍वास्‍थ्‍य, विशेषकर जैव आधारित उत्‍पाद।
• कृषि प्रजनन अभ्‍यास।
• जैव ईंधन और जैव ऊर्जा।
• नैनो प्रौद्योगिकी और जैव यंत्र विन्‍यास।
• जैव विविधता और वर्गीकरण विज्ञान।


॥●॥ मंत्रिमंडल को भारत और कोरिया गणराज्‍य के बीच संयुक्‍त रूप से डाक टिकट जारी करने के समझौते से अवगत कराया गया

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल को भारत और कोरिया गणराज्य के बीच संयुक्त रूप से डाक टिकट जारी करने के फरवरी 2019 के समझौते से अवगत कराया गया।

भारत सरकार के संचार मंत्रालय के अंतर्गत डाक विभाग और कोरिया गणराज्‍य के विज्ञान तथा आईसीटी (कोरिया डाक) मंत्रालय ने ‘कोरिया की रानी – ह्यो ह्वांग-ओक’ की थीम पर एक संयुक्‍त डाक टिकट जारी करने पर सहमति व्‍यक्‍त की है।

2019 की समाप्ति तक आपसी सहमति द्वारा तय की गई तिथि को संयुक्‍त डाक टिकटें जारी की जाएंगी।





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