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नई दिल्ली, 16 अप्रैल 2019, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

॥●॥ एनएससीएन/एनके, एनएससीएन/आर और एनएससीएन/के-खांगो के साथ संघर्ष विराम की अवधि एक वर्ष के लिए बढ़ी

सरकार और नेशनल सोशलिस्‍ट काउंसिल ऑफ नगालैंड (नियोपाओ कोनयाक/कितोवी) (एनएससीएन/एनके) और नेशनल सोशलिस्‍ट काउंसिल ऑफ नगालैंड/रिफोरमेशन (एनएससीएन/आर) के बीच संघर्ष विराम की अवधि 28 अप्रैल, 2019 से एक वर्ष के लिए बढ़ाने का फैसला किया गया है। संघर्ष विराम अब 27 अप्रैल, 2020 तक प्रभावी रहेगा। इस आशय के एक समझौते पर सरकार की ओर से गृह मंत्रालय में संयुक्‍त सचिव सत्‍येन्‍द्र गर्ग और एनएससीएन/एनके की ओर से जीपीआरएन/एनएससीएन के निरीक्षक जैक जिमोमी और एनएससीएन/आर की ओर से सचिव तोशी लोंगकुमेर और निरीक्षक डॉक्‍टर अमेंटो चीशी ने 15 अप्रैल, 2019 को हस्‍ताक्षर किए।

नेशनल सोशलिस्‍ट काउंसिल ऑफ नगालैंड/के-खांगो ने 15 अप्रैल, 2019 से एक वर्ष की अवधि के लिए सरकार के साथ ताजा संघर्ष विराम समझौता किया है। इस पर गृह मंत्रालय में संयुक्‍त सचिव सत्‍येन्‍द्र गर्ग और एनएससीएन/के-खांगो की ओर से निरीक्षक न्‍यूएल नागा और सदस्‍य माइकल येपथो ने हस्‍ताक्षर किए।


॥●॥ आम चुनाव के दूसरे चरण के तहत मणिपुर में 18 अप्रैल को मतदान

आम चुनाव के दूसरे चरण के तहत मणिपुर में 18 अप्रैल को मतदान होगा। मतदान ‘मणिपुर इनर’ की एक लोकसभा सीट के लिए होगा। चुनाव में 4 निर्दलीय उम्‍मीदवारों सहित 11 उम्‍मीदवार हिस्‍सा ले रहे हैं।

इस चरण में मतदाताओं की कुल संख्‍या 928626 है, जिनमें 447843 पुरुष, 480751 महिलाएं और अन्‍य वर्ग (थर्ड जेंडर) के 32 मतदाता शामिल हैं। सुचारु मतदान के लिए 1300 मतदान केंद्र बनाए गए हैं।


॥●॥ बिहार में 18 अप्रैल को दूसरे चरण का मतदान होगा

बिहार में दूसरे चरण का मतदान 18 अप्रैल को होगा। दूसरे चरण के अंतर्गत लोकसभा की 5 सीटों – किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया, भागलपुर और बांका के लिए 68 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं।

इस चरण में कुल 8552274 मतदाताओं में 4492599 पुरुष मतदाता, 4059375 महिला मतदाता और थर्ड जेंडर के मतदाताओं की संख्या 300 है।

बिहार में दूसरे चरण का मतदान सुचारू तरीके से कराने के लिए कुल 8644 मतदान केंद्र बनाए गए हैं।


॥●॥ कम-कार्बन, हरित और जलवायु अनुकूल शहरी अवसंरचना समय की जरूरत : उपराष्‍ट्रपति

उपराष्‍ट्रपति एम• वैंकेया नायडू ने शहरी योजनाकारों का आह्वान किया है कि वे सौर ऊर्जा का उपयोग करने, हरे-भरे क्षेत्रों को बढ़ाने और जल संरक्षण को शहरी योजना का महत्‍वपूर्ण अंग बनाएं। इसके लिए शहरी योजनाकार सतत उपाय करें।

दक्षिण दिल्‍ली नगर निगम के सहयोग से इंटरनेशनल काउंसिल फॉर लोकल एनवायरनमेंटल इनिशिएटिव (आईसीएलईआई) द्वारा आयोजित चौथी रेजिलियंट सिटीज एशिया-पैसिफिक (आरसीएपी) कांग्रेस 2019 का नई दिल्ली में उद्घाटन करते हुए उन्‍होंने नगर निकाय प्रशासकों से कहा कि वे वृक्षारोपण, ठोस कचरा प्रबंधन और जल स्रोतों के संरक्षण को प्राथमिकता दें। उल्‍लेखनीय है कि इस कांग्रेस में लगभग 30 देशों के 200 से अधिक प्रतिनिधियों ने हिस्‍सा लिया।

ग्रामीण इलाकों से शहरी इलाकों की तरफ होने वाले पलायन के मद्देनजर उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि शिक्षा, मनोरंजन, उन्‍नत चिकित्‍सा सुविधाओं और रोजगार के कारण पलायन होता है। उन्‍होंने राज्‍य सरकारों और केंद्र सरकार से कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी सुविधाएं प्रदान करके इस अंतराल को कम करने के लिए मिलकर प्रयास करना चाहिए।

श्री नायडू ने कहा कि आर्थिक विकास के लिए पर्यावरण सुरक्षा पर भी ध्‍यान देना जरूरी है। इसके लिए जीवाश्‍म ईंधन पर निर्भरता कम करना चाहिए और सौर ऊर्जा जैसे ऊर्जा के नए स्रोतों की संभावना खोजी जानी चाहिए। उन्‍होंने कहा कि विकास के लिए हमको नए तौर-तरीके खोजने होंगे।

उपराष्‍ट्रपति ने विभिन्‍न देशों के राज्‍यों और शहरों के सभी प्रतिनिधियों का आह्वान किया कि वे बहुआयामी तथा अभिनव उपाय करें, ताकि कम उत्‍सर्जन के आधार पर विकास संभव हो। उन्‍होंने शहरों में जाम की स्थिति और वायु प्रदूषण में कमी लाने के लिए जन यातायात को प्रोत्‍साहन देने का आग्रह किया।

उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि हरित अवसंरचना समय की मांग है। इसलिए जलवायु अनुकूल शहरी विकास के लिए स्रोत कुशलता को प्रोत्‍साहन दिया जाना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि विकास के पारंपरिक पैमानों से हटकर नई शहरी अवसंरचना तैयार की जाए जो कम कार्बन वाली हो और हरित तथा जलवायु अनुकूल हो। उन्‍होंने कहा कि दुनिया भर में उत्‍कृष्‍ट व्‍यवहारों को अपनाकर शहरी ठोस अवशिष्‍ट को सम्‍पदा में बदलने के उपाय किए जाने चाहिए। उन्‍होंने कहा कि हमें अपनी सांस्‍कृतिक जड़ों से प्रेरणा लेनी चाहिए। हमें अपने पारंपरिक मूल्यों से भी प्रेरणा लेनी चाहिए जो प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करने की सीख देते हैं। उन्‍होंने कहा कि हरित उपाय, सुशासन और जलवायु अनुकूल अवसंरचना के जरिए हम आगे बढ़ सकते हैं।

बढ़ते हुए जलवायु परिवर्तन के परिणामस्‍वरूप मानव गतिविधियों के विभिन्‍न पक्षों, विशेषकर कृषि के हवाले से श्री नायडू ने कहा कि योजनाकारों को जलवायु परिवर्तन त‍था विकास रणनीतियों पर पड़ने वाले उसके प्रभावों को ध्‍यान में रखना होगा। उन्‍होंने कहा कि भविष्‍य में जलवायु संबंधी जोखिमों को कम करने के उपाय किए जाने चाहिए।

उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि विश्‍व की 60 प्रतिशत आबादी एशिया में रहती है और यह क्षेत्र प्राकृतिक आपदाओं से सबसे ज्‍यादा प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि इस बात को ध्‍यान में रखकर एशियाई देशों की सरकारों को हर तरह की जलवायु बर्दाश्‍त करने वाले मकान बनाने चाहिए। उन्‍होंने कहा कि एशियाई शहरों को जैव-विविधता से भरपूर और स्वस्‍थ तथा कारगर इको-प्रणालियों पर जोर देना चाहिए। शहरों में प्रदूषण खतरनाक स्‍तर तक पहुंच रहा है, जिससे निपटने के लिए स्‍वच्‍छ और हरित प्रौद्योगिकियों को प्रोत्‍साहन देना चाहिए।

इस अवसर पर भारत में स्विट्जरलैंड की उपराजदूत तमारा मोना, भारत और भूटान के लिए यूरोपीय संघ के प्रतिनिधिमंडल के उप-प्रमुख रायमंड मैगिस, आईसीएलईआई के उप-महासचिव ईमानी कुमार, दक्षिण दिल्ली नगर-निगम के आयुक्‍त पुनीत कुमार गोयल, भूटान, जापान, स्विट्जरलैंड, मलेशिया, नेपाल, मंगोलिया, वियतनाम, यूरोपीय संघ, चीन जैसे देशों के शहरी योजनाकार तथा महापौर सहित अन्‍य विशिष्‍टजन उपस्थित थे।





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