एएफआरओ के 80 वर्ष पूरे



नई दिल्ली,
इंडिया इनसाइड न्यूज़।

वायु सेना रिकॉर्ड कार्यालय (एएफआरओ) ने शनिवार 14 सितम्बर को नई दिल्ली के सुब्रतो पार्क में आयोजित एक औपचारिक समारोह के तहत अपनी 80वीं वर्षगांठ मनाई। इस कार्यक्रम में कई वरिष्ठ सेवारत एवं सेवानिवृत्त अधिकारी उपस्थित हुए।

एयर ऑफिसर कामांडिंग एएफआरओ, एयर कमोडोर एआर शिंदे वीएम ने समारोह के उद्घाटन सत्र में प्रदर्शन से संबंधित एक स्थिति रिपोर्ट जारी की। उन्होंने इस कार्यक्रम को मनाने के लिए किए जा रहे कार्यक्रमों की जानकारी भी दी। इस आयोजन के प्रमुख कार्यक्रमों में एयर वाइस मार्शल जीएस बेदी वीएम वीएसएम, एयर स्टाफ के सहायक प्रमुख (पीओ) द्वारा एएफआरओ इतिहास प्रकोष्ठ एवं संग्रहालय का उद्घाटन, एयर वाइस मार्शल एस रवि वृद्धचलेम वीएम वीएसएम, एयर स्टाफ के सहायक प्रमुख (पीए एंड सी), मिनी स्पोर्ट्स ओलंपियाड, वाकथॉन (महिलाओं के लिए), मैराथन (पुरुषों के लिए), पेंटिंग प्रतियोगिता (बच्चों के लिए), साइकिलिंग अभियान, वृक्षारोपण और रक्तदान शिविर शामिल थे।

शाम के कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण एयर मार्शल रघुनाथ नंबियार पीवीएसएम एवीएसएम वीएम एंड बार एडीसी, एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, पश्चिमी एयर कमांड द्वारा 'एएफआरओ थ्रू द एजेज' शीर्षक के तहत कॉफी टेबल बुक का विमोचन हुआ।

एएफआरओ भारतीय वायुसेना का एक सबसे पुराना विभाग होने का गर्व कर सकता है। 1939 में अंबाला में भारतीय वायुसेना के रिकॉर्ड ऑफिस के रूप में अपने गठन के बाद इसे सुब्रतो पार्क में अपना स्थायी ठिकाना तलाशने से पहले कई स्थान बदलने पड़े जैसे 1941 में लाहौर, 1942 में बम्बई, 1946 में मद्रास और 1947 में नई दिल्ली। इसके आठ दशकों के अस्तित्व के दौरान इसका विकास भारतीय वायुसेना के साथ करीबी से जुड़ा रहा है। शुरू में 1947 में यह महज 14100 हवाई सैनिकों के एचआर प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाल रहा था। लेकिन आज यह लगभग 1,43,000 वायु योद्धाओं की देखरेख करने वाले एक विशाल संस्थान में विकसित हो चुका है। इसका उद्देश्य अब सभी मैन्युअल प्रक्रियाओं को स्वचालित करना और बाहरी इकाइयों और एएफआरओ के बीच कागज का उपयोग घटाना है ताकि पारदर्शिता एवं जवाबदेही बढ़ाया जा सके। ‘टीम एएफआरओ’ के कुशल एवं समर्पित कर्मी अपने कर्तव्यों के निर्वहन में “मिशन, अखंडता और उत्कृष्टता” संबंधी भारतीय वायुसेना के सिद्धांत का पालन करते हैं ताकि भारतीय वायुसेना के गौरव को आकाश की ऊंचाईयों तक ले जाया जा सके।





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