--विजया पाठक
एडिटर - जगत विजन
भोपाल - मध्यप्रदेश, इंडिया इनसाइड न्यूज।
■चार दशक में कमलनाथ ने बनाई छिंदवाड़ा की पहचान, भाजपा राज में बिगड़ती कानून-व्यवस्था ने बढ़ाई चिंता
■कमलनाथ के छिंदवाड़ा मॉडल पर भाजपा शासन में संकट? लगातार अपराधों से बढ़ी चिंता
छिंदवाड़ा की पहचान केवल मध्यप्रदेश के एक जिले के रूप में नहीं, बल्कि देश के सामने एक ऐसे क्षेत्र के रूप में बनी है, जहां विकास को लंबे समय तक जनसेवा और दूरदृष्टि के साथ आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया। इस पहचान के निर्माण में पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व सांसद कमलनाथ की चार दशक से अधिक लंबी राजनीतिक यात्रा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सिंचाई और औद्योगिक विकास जैसे क्षेत्रों में किए गए कार्यों के कारण कमलनाथ ने छिंदवाड़ा को अपनी राजनीति का केंद्र ही नहीं, बल्कि अपनी कर्मभूमि बनाया। यही कारण है कि आज जब छिंदवाड़ा में अपराध की घटनाएं लगातार चर्चा में आती हैं, तो कमलनाथ की चिंता को केवल राजनीतिक बयान के रूप में देखना उचित नहीं होगा। जिस क्षेत्र को उन्होंने वर्षों तक विकास, व्यवस्था और जनविश्वास की मिसाल बनाने का प्रयास किया, वहां महिलाओं और बेटियों के खिलाफ अपराध, हत्या, नशे से जुड़े विवाद और अवैध शराब की शिकायतें सामने आना निश्चित रूप से चिंता का विषय है।
●दो वर्षों की घटनाएं बढ़ाती हैं चिंता
पिछले करीब दो वर्षों में छिंदवाड़ा से सामने आई कई घटनाओं ने जिले की कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मार्च 2024 में एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या का मामला सामने आया था। 2025 में भी महिलाओं और परिवारों से जुड़े गंभीर अपराधों की खबरें सामने आती रहीं। जून 2025 में लावाघोघरी थाना क्षेत्र में शराब को लेकर हुए विवाद के बाद एक व्यक्ति द्वारा अपनी पत्नी की लाठी-डंडों से पीटकर हत्या करने का मामला सामने आया। मई 2025 में शराब के नशे में हुए विवाद के दौरान एक बेटे द्वारा अपने पिता की कथित तौर पर हत्या किए जाने की खबर भी सामने आई। इन घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि नशे और अपराध का संबंध केवल अवैध कारोबार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह परिवार और समाज की सुरक्षा को भी प्रभावित करता है।
●बेटियों की सुरक्षा पर सबसे बड़ा सवाल
छिंदवाड़ा में नाबालिगों और महिलाओं के खिलाफ सामने आई घटनाएं सरकार से जवाब मांगती हैं। मार्च 2025 में डेढ़ साल की बच्ची से दुष्कर्म के मामले में आरोपी को आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। इसी तरह जुन्नारदेव क्षेत्र में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में भी आरोपी को आजीवन कारावास की सजा हुई। ये मामले यह जरूर दिखाते हैं कि पुलिस और न्याय व्यवस्था ने कार्रवाई की, लेकिन साथ ही यह सवाल भी छोड़ जाते हैं कि ऐसी घटनाओं को पहले ही रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था कितनी प्रभावी है। महिलाओं की सुरक्षा केवल एफआईआर दर्ज करने और आरोपी को गिरफ्तार करने का विषय नहीं है। पुलिस की सक्रियता, संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी, शिकायतों पर तत्काल प्रतिक्रिया, स्कूल-कॉलेजों के आसपास सुरक्षा और नशे के कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण इन सभी को मिलाकर सुरक्षित वातावरण तैयार होता है।
●कमलनाथ के दौर की व्यवस्था को याद कर रही जनता
छिंदवाड़ा की राजनीति में कमलनाथ का स्थान इसलिए अलग है क्योंकि उनका रिश्ता इस क्षेत्र से दशकों पुराना है। उन्होंने छिंदवाड़ा को केवल चुनाव जीतने के लिए नहीं देखा, बल्कि अपने राजनीतिक जीवन का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र के विकास को समर्पित किया। यही वजह है कि छिंदवाड़ा की सड़क से लेकर अस्पताल तक और शिक्षा से लेकर रोजगार तक की चर्चा में कमलनाथ के योगदान का उल्लेख बार-बार होता है। उनके समर्थकों के लिए छिंदवाड़ा का विकास मॉडल केवल इमारतों और सड़कों का मॉडल नहीं था। उसके पीछे एक ऐसी प्रशासनिक सोच भी थी जिसमें नागरिकों को व्यवस्था पर भरोसा दिलाना महत्वपूर्ण माना जाता था। आज भाजपा शासन में जब अपराध की घटनाएं सुर्खियां बनती हैं तो स्वाभाविक रूप से लोग उस पुराने दौर से तुलना करते हैं। यह तुलना केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि शासन की प्राथमिकताओं से जुड़ा सवाल है। विकास तभी सार्थक है जब नागरिक अपने घर, सड़क, बाजार और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षित महसूस करे।
●सांसद बंटी विवेक साहू को भी देना होगा जवाब
वर्तमान सांसद बंटी विवेक साहू को लेकर राजनीतिक स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि जिले में सक्रिय कुछ अपराधियों और बदमाशों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। ऐसे आरोप गंभीर हैं और इनकी स्वतंत्र तथा निष्पक्ष जांच होनी चाहिए बिना प्रमाण किसी व्यक्ति को अपराधियों का संरक्षक बताना उचित नहीं है। लेकिन लोकतंत्र में यह सवाल जरूर पूछा जाना चाहिए कि यदि किसी अपराधी को राजनीतिक संरक्षण मिलने की शिकायत जनता या विपक्ष द्वारा की जाती है, तो उसकी जांच क्यों न हो?
●छिंदवाड़ा को फिर चाहिए भरोसे का शासन
कमलनाथ ने चार दशक से ज्यादा समय तक इस क्षेत्र से जुड़े रहने के कारण यहां की उपलब्धियों को उन्होंने अपनी उपलब्धि और यहां की समस्याओं को अपनी समस्या माना। इसलिए आज छिंदवाड़ा में अपराध की घटनाओं को लेकर उनकी चिंता को उस लंबे रिश्ते के संदर्भ में समझना चाहिए। छिंदवाड़ा की जनता ने विकास देखा है। उसने बड़े सपने देखे हैं। उसने यह भी देखा है कि एक पिछड़े माने जाने वाले क्षेत्र को योजनाबद्ध प्रयासों के जरिए किस तरह राष्ट्रीय पहचान दिलाई जा सकती है। अब उसी जनता की अपेक्षा है कि विकास के साथ सुरक्षा और सम्मान का वातावरण भी मजबूत हो। आज आवश्यकता किसी दल विशेष के समर्थन या विरोध से आगे बढ़कर एक स्पष्ट सवाल पूछने की है। क्या छिंदवाड़ा का नागरिक सुरक्षित है? क्या उसकी बेटी सुरक्षित है? क्या अवैध शराब के कारोबार पर प्रभावी अंकुश है? क्या अपराधी कानून से डरता है? और क्या किसी राजनीतिक प्रभावशाली व्यक्ति के कारण कानून की धार कमजोर नहीं पड़ती? कमलनाथ की छिंदवाड़ा के प्रति चिंता इसी व्यापक प्रश्न से जुड़ी है।