--विजया पाठक, एडिटर - जगत विजन, भोपाल - मध्यप्रदेश, इंडिया इनसाइड न्यूज।
■सत्ता और संगठन में सुरेश सोनी के दखल से संकट में पार्टी
■सुरेश सोनी ने दिखाया शिवराज सिंह चौहान को मध्यप्रदेश से बाहर का रास्ता
■कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल जैसे कद्दावर नेताओं को दरकिनार करने का रचा जा रहा षड़यंत्र
■पूर्वमंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा की मौत या हत्या: संदेह के घेरे में सुरेश सोनी
मध्यप्रदेश का व्यापमं घोटाला देश के सबसे चर्चित परीक्षा एवं भर्ती घोटालों में शामिल रहा है। इस मामले ने न केवल प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए, बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था में कथित प्रभाव, सिफारिश तथा बिचौलियों की भूमिका को लेकर भी गंभीर बहस पैदा की। इसी विवाद के बीच आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी सुरेश सोनी का नाम सामने आया। एक आरोपी मिहिर कुमार चौधरी के बयान में कथित सिफारिश का उल्लेख, पुलिस की ओर से आरोपों को प्रमाणित नहीं मानना और बाद में हाईकोर्ट में इस मामले पर चर्चा- इन तीनों पहलुओं ने विवाद को खासा महत्वपूर्ण बना दिया।
●सुरेश सोनी का मोहन सरकार में दबदबा
मोहन सरकार में सुरेश सोनी का दबदबा बना हुआ है। व्यापमं के कई आरोपी सुधीर शर्मा, अजय मेहता, मिहिर चौधरी जैसे आरोपी सरकार का हिस्सा बनकर सरकार चला रहे हैं। घोटाले में शामिल होने के बावजूद सरकार में अपनी मनमर्जी चला रहे हैं। इस पूरे खेल में सुरेश सोनी का पूरा समर्थन भी मिल रहा है। यहां तक कि कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल जैसे कद्दावर नेताओं की सरकार में अनदेखी करने में भी सोनी का हाथ बताया जा रहा है।
●मिहिर कुमार चौधरी के बयान से उठा विवाद
विवाद की एक प्रमुख कड़ी मिहिर कुमार चौधरी का बयान था। व्यापमं से जुड़े अपराध नंबर 15/2013 के मामले में मिहिर का बयान 22 नवंबर 2013 को दर्ज किया गया था। बाद में यही बयान सुरेश सोनी और तत्कालीन संघ प्रमुख केएस सुदर्शन से संबंधित विवाद की चर्चा का आधार बना। मिहिर कुमार चौधरी ने अपने चयन के संबंध में प्रभावशाली लोगों से जुड़ी कथित सिफारिश का उल्लेख किया था। व्यापमं के तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक पंकज त्रिवेदी के बयान में मिहिर को ‘सोनीजी का आदमी’ बताए जाने का उल्लेख था। यहीं से मामला राजनीतिक और सार्वजनिक बहस का विषय बन गया।
●शिवराज ने सोनी के साथ किया धोखा, फिर सोनी ने शिवराज को लगाया ठिकाने
यह उस समय की बात है जब शिवराज मुख्यमंत्री थे और व्यापमं मामला चरम पर था। सूत्रों के हवाले से खबर है कि उस समय सुरेश सोनी की प्रदेश में तूती बोलती थी और शिवराज उनकी बात को टालते नहीं थे। सोनी की सिफारशों को प्रमुखता दी जाती थी। इसी बीच किसी सिफारिश पर शिवराज ने सुरेश सोनी का नाम आगे कर दिया। यह मामला सुर्खियों में आ गया और सुरेश सोनी का व्यापमं में नाम जुड़ गया। इसका असर यह हुआ कि सुरेश सोनी को अपने पद से इस्तीफा तक देना पड़ा। इसके लिए सोनी ने शिवराज को जिम्मेदार ठहराया। इसकी कसक सोनी वर्षों तक अपने अंदर दवाए रखे रहे। 2023 में जब प्रदेश में मुख्यमंत्री बनाने की बात आयी तो सुरेश सोनी सबसे पहले व्यक्ति थे जो शिवराज के विरोध में खड़े हुए और अंतत: मोहन यादव मुख्यमंत्री बन गये।
●कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल को मुख्यमंत्री की रेस से बाहर करने में सोनी का हाथ
सूत्रों के हवाले से बताया जाता है कि 2023 में प्रदेश में मुख्यमंत्री बनाये जाने की रेस में पहले स्थान पर कैलाश विजयवर्गीय थे। इनके अलावा प्रहलाद पटेल, नरेन्द्र सिंह तोमर, गोपाल भार्गव के नाम की भी चर्चाएं थी। लेकिन बताया जाता है कि सुरेश सोनी, कैलाश विजयवर्गीय को मुख्यमंत्री बनाये जाने के विरोध में थे। अब जब वह मोहन सरकार में मंत्री हैं तो यहां पर सोनी कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल जैसे कद्दावर नेताओं को दरकिनार करने का षड़यंत्र रच रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि दतिया विस के उपचुनाव में नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटवाने में भी सोनी का हाथ था। पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा व्यापमं घोटाले के एकमात्र गवाह थे। सुरेश सोनी को घोटाले से बचाने के लिए शर्मा ने बहुत बढ़ी कीमत चुकाई। हालांकि आज वह दुनिया में नहीं हैं लेकिन कहा जाता है कि उनकी मौत सामान्य नहीं थी बल्कि हत्या थी। कहीं न कहीं हत्या की साजिश उन्होंने ने ही रची होगी जो व्यापमं षड़यंत्र के हिस्सा रहे।
●सोनी के कारण प्रदेश में भय-भ्रष्टाचार का माहौल बना
आज मोहन सरकार में भय-भ्रष्टाचार का माहौल खड़ा हो गया है। भ्रष्टाचार में नेताओं से लेकर अधिकारियों के नाम सामने आ रहे हैं। भ्रष्टाचार के मामलों को मीडिया के सामने नहीं आने दिया जा रहा है। निश्चित है कि कहीं न कहीं भ्रष्ट नेताओं और अफसरों को सुरेश सोनी का संरक्षण मिल रहा है। जबसे सोनी की प्रदेश में सक्रियता बढ़ी है तबसे प्रदेश में अराजकता और भ्रष्टाचार का दायरा बढ़ा है।
●हाईकोर्ट ने क्या कहा? यही है मामले की महत्वपूर्ण कड़ी
05 नवंबर 2014 का मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का आदेश इस विवाद को समझने के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सुरेश सोनी और केएस सुदर्शन से संबंधित विवाद क्राइम नंबर 15/2013 के मामले से जुड़ा था। यह मामला फूड इंस्पेक्टर और जूनियर फूड सप्लाई इंस्पेक्टर की परीक्षा से संबंधित था। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह उन पीएमटी मामलों से अलग था, जिनकी जांच उस समय हाईकोर्ट की निगरानी में चल रही थी। हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में मिहिर कुमार चौधरी के 22 नवंबर 2013 के बयान का भी उल्लेख था।
●2015 में फिर चर्चा में आया नाम
विवाद का एक अन्य पहलू 2015 में सामने आया, जब व्यापमं के प्रमुख आरोपियों में शामिल सुधीर शर्मा से संबंधित आयकर विभाग की रिपोर्ट की चर्चा हुई। 2010 से 2013 के दौरान कुछ राजनीतिक नेताओं, अधिकारियों और संघ से जुड़े लोगों के यात्रा तथा अन्य खर्चों के भुगतान का उल्लेख था। इन रिपोर्टों में सुरेश सोनी का नाम भी सामने आया।



