आस्था का महापर्व 'छठ'



नई दिल्ली,
इंडिया इनसाइड न्यूज़।

आस्था का महापर्व "छठ" पूजा कार्तिक शुक्ल पक्ष के षष्ठी को बड़े ही हर्षोल्लास से मनाया जाता है। इस का शुभारम्भ आज से हो रहा है। यह पर्व चार दिन तक चलता है। नहाय-खाय से लेकर उगते हुए भगवान सूर्य को अर्घ्य देने तक चलने वाले इस पर्व का अपना एक ऐतिहासिक महत्व है। इस दौरान व्रतधारी लगातार 36 घंटे का व्रत रखते हैं। व्रत के दौरान वह पानी भी ग्रहण नहीं करते हैं।

विशेषकर यह त्योहार पूर्वी भारत के बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाता है। वहीं इस त्योहार का आयोजन देश के अधिकांश राज्यों में भी होता है। पारिवारिक सुख-समृध्दि और मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए यह पर्व मनाया जाता है। इसकी शुरुआत कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को होती है और यह कार्तिक शुक्ल सप्तमी को समाप्त होता है। छठ पूजा में सूर्य देव की पूजा की जाती है और उन्हें अर्घ्य दिया जाता है। सूर्य प्रत्यक्ष रूप में दिखाई देने वाले देवता हैं जो पृथ्वी पर सभी प्राणियों के जीवन का आधार हैं।

सूर्य देव के साथ-साथ छठ पर छठी मैया की पूजा का भी विधान है। पौराणिक मान्यता के अनुसार छठी मैया या षष्ठी माता संतानों की रक्षा करती हैं और उन्हें दीर्घायु प्रदान करती हैं। शास्त्रों में षष्ठी देवी को ब्रह्मा जी की मानस पुत्री भी कहा गया है। पुराणों में इन्हें मां कात्यायनी भी कहा गया है, जिनकी पूजा नवरात्रि में षष्ठी तिथि पर होती है। षष्ठी देवी को ही बिहार-झारखंड की स्थानीय भाषा में छठ मैया कहा गया है।

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