देश के सभी राज्यों में एएचटीयू और डब्ल्यूएचडी की स्थापना व उन्हें सशक्त बनाएगी सरकार



नई दिल्ली,
इंडिया इनसाइड न्यूज़।

22 अक्टूबर, 2019 को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में सचिव की अध्यक्षता वाली निर्भया फ्रेमवर्क के अंतर्गत बनी अधिकार प्राप्त समिति (ईसी) ने सभी जिलों में मानव तस्करी रोधी इकाइयों (एएचटीयू) के लिए पुलिस थानों में महिला सहायता डेस्कों (डब्ल्यूएचडी) की परिचालन के वास्ते व्यवस्था विकसित करने के उद्देश्य से दो प्रस्तावों का सकारात्मक मूल्यांकन किया गया। साथ ही देश के सभी जिलों और राज्यों/संघ शासित क्षेत्रों की महिलाओं व बच्चों से जुड़े अपराध और नीतिगत मसलों की देखरेख के वास्ते अधिकारियों की पहचान किए जाने पर भी चर्चा की गई। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने इस मामले को गृह मंत्रालय के सामने रखा है, जिसमें निर्भया कोष से भारत के 10 हजार पुलिस थानों में डब्ल्यूएचडी और बाकी बचे जिलों में एएचटीयू के लिए प्रस्ताव सौंपा गया।

1. राज्यों और संघ शासित क्षेत्रों के सभी जिलों में मानव तस्करी रोधी इकाइयों (एएचटीयू) की स्थापना और उन्हें सशक्त बनानाः

ईसी ने तस्करी की पीड़ित महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा के लिए 100 करोड़ रुपये की लागत से एएचटीयू की स्थापना के प्रस्ताव पर विचार किया व सिफारिश की। साथ ही इसमें उचित निगरानी और सूचनाएं दर्ज करने का तंत्र विकसित करने की शर्त भी रखी गई। इन एएचटीयू की स्थापना पर आने वाली 100 प्रतिशत लागत एमएचए के प्रस्ताव के तहत केंद्र सरकार के निर्भया कोष के तहत उठाए जाने की सिफारिश की गई। ईसी ने यह भी सुझाव दिया कि इन एएचटीयू के माध्यम से लाभार्थियों को मानसिक-सामाजिक परामर्श और कानूनी सलाह व अन्य सहायता भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए। एमएचए ने एएचटीयू के कामकाज की समन्वय और निगरानी व ईसी और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के साथ डाटा साझा करने के लिए राज्य स्तर के नोडल अधिकारियों के नामांकन का भी अनुरोध किया।

2. सभी राज्यों और संघ शासित क्षेत्रों में पुलिस थानों में महिला सहायता डेस्कों (डब्ल्यूएचडी) की स्थापना/सशक्त बनानाः

ईसी ने केंद्र सरकार के निर्भया कोष के अंतर्गत 100 प्रतिशत वित्तपोषण से 100 करोड़ रुपये की लागत से सभी राज्यों और संघ शासित क्षेत्रों के पुलिस थानों में महिला सहायता डेस्कों की स्थापना के प्रस्ताव पर सहमति और सिफारिश की। डब्ल्यूएचडी पुलिस प्रणाली के माध्यम से महिलाओं की शिकायतों के समाधान के लिए लैंगिक रूप से संवेदनशील डेस्क होंगी, साथ ही महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर जोर देते हुए पुलिस के संवाद के तरीकों में सुधार की दिशा में काम किया जाएगा। इससे परेशान महिलाओं और बच्चों के अनुकूल माहौल तैयार करने में मदद मिलेगी, जिससे वे बिना संकोच एवं भय के पुलिस थानों में संपर्क कर सकेंगे। ईसी ने सुझाव दिया कि इन महिला सहायता डेस्कों के प्रमुख के रूप में महिलाओं की नियुक्ति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जो हेड कॉन्स्टेबल रैंक से नीचे नहीं होनी चाहिए और इसके लिए जेएसआई या एएसआई से कम रैंक की महिला अधिकारियों को प्राथमिकता नहीं दी जानी चाहिए। इसके अलावा पुलिस थानों में डब्ल्यूएचडी पर काम करने वाले या उससे संबंधित पुरुष और महिला दोनों पुलिस अधिकारियों को प्रशिक्षण, दिशानिर्देशन और संवेदनशील बनाने पर ध्यान देना चाहिए। एमएचए के प्रस्ताव के तहत वर्तमान में 10 हजार थानों के लिए डब्ल्यूएचडी को मंजूरी मिली हुई है। हालांकि ईसी ने सुझाव दिया कि इस सुविधा का विस्तार चरणबद्ध तरीके से देश भर के पुलिस थानों में किया जाना चाहिए। एमएचए ने सभी राज्यों और संघ शासित क्षेत्रों से महिला सहायता डेस्कों के कामकाज के समन्वय और ईसी के साथ डाटा साझा करने के लिए जल्द से जल्द नोडल अधिकारियों की नियुक्ति का अनुरोध किया है।

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