केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 'डेस्टिनेशन नॉर्थ ईस्ट-2020' महोत्सव का उद्घाटन किया



नई दिल्ली,
इंडिया इनसाइड न्यूज़।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रविवार को वर्चुअल माध्यम से “डेस्टिनेशन नॉर्थ ईस्ट-2020” का उद्घाटन किया। केंद्रीय गृहमंत्री पूर्वोत्तर परिषद के अध्यक्ष भी हैं। इस अवसर पर पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (डोनर) के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, जन शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा विभाग तथा अंतरिक्ष विभाग में राज्यमंत्री डॉ• जितेंद्र सिंह और पूर्वोत्तर के आठों राज्यों के मुख्यमंत्री भी उपस्थित थे।

अपने सम्बोधन में श्री शाह ने कहा कि प्राकृतिक सौंदर्य, लोक संस्कृति और कला से भरपूर पूर्वोत्तर विश्व पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र बनने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में पूर्वोत्तर क्षेत्र भारत के पसंदीदा पर्यटन और व्यावसायिक स्थलों में से एक के रूप में उभरेगा।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि 30 सितंबर तक चलने वाले ‘डेस्टिनेशन नॉर्थ ईस्ट-2020’ का उद्देश्य पूर्वोत्तर के पर्यटनस्थलों के साथ-साथ देश की विभिन्न संस्कृतियों का एक दूसरे के साथ परिचय कराना है और इसके माध्यम से पूरा भारत भी नॉर्थ ईस्ट की संस्कृति से परिचित होगा। अमित शाह ने कहा कि उन्होंनें कई राज्यों, देशों के पर्यटन स्थल देखे हैं लेकिन जो खूबसूरती नॉर्थ ईस्ट के अंदर देखी है शायद ही कहीं देखने को मिले। यहाँ की मनोहरी सुंदरता का परिदृश्य, अनंत विशालता का मंत्र देने वाली स्थानीय आबादी का एक अद्भुत मिश्रण पूरी दुनिया को एक संदेश देता है। पूर्वोत्तर भारत का गहना है, उसके बिना भारतीय संस्कृति अधूरी हैं। अगला समारोह अपने चुनाव क्षेत्र गांधीनगर में आयोजित करने का निमंत्रण देते हुए श्री शाह ने कहा कि इससे पूर्वोत्तर के लोग गुजरात की संस्कृति और गुजरात के लोग पूर्वोत्तर की संस्कृति से परिचित होंगे।

अमित शाह ने कहा कि पूर्वोत्तर के आर्थिक विकास और पर्यटन तथा रोजगार को बढ़ावा देने के लिए नार्थ ईस्ट में शांति बहुत जरूरी है। पूर्वोत्तर जो कभी आतंकवाद के कारण सुर्खियों में रहता था, मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के बाद साढ़े 6 साल में उद्योगों के विकास और पर्यटन के बढ़ते अवसरों के कारण देश भर में चर्चा में है। केंद्रीय गृह मंत्री ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूर्वोत्तर में शांति स्थापना के लिए बहुत काम हुए हैं। बांग्लादेश सीमा समझौता, मणिपुर का ब्लाकेड, बोडो समझौता और 8 उग्रवादी गुटों के 641 कैडर समेत हजारों उग्रवादियों द्वारा आत्मसमर्पण केंद्र की मोदी सरकार की बहुत बड़ी उपलब्धि है। अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी जी पूर्वोत्तर के 30 से ज्यादा दौरे कर चुके हैं, आजादी के बाद वह सबसे अधिक नॉर्थ ईस्ट जाने वाले प्रधानमंत्री हैं।

अमित शाह ने कहा कि धन के बिना विकास संभव नहीं है। पहले उत्तर-पूर्व के विकास के लिए योजनाएँ तो बनाईं जाती थीं मगर इनके लिए आवंटित राशि बहुत कम होती थी। 14वें वित्त आयोग ने पूर्वोत्तर के लिए आवंटन में 251 प्रतिशत की बढ़ोतरी करते हुए 3,13,375 करोड़ रुपये दिये जबकि इससे पहले पिछली सरकार द्वारा 13वें वित्त आयोग ने सिर्फ 89,168 करोड़ रुपये दिए थे। श्री शाह ने यह भी कहा कि मोदी सरकार ने विकास का सर्वस्पर्शी और सर्वसमावेशी स्वरूप अपनाते हुए पूर्वोत्तर परिषद के बजट का 21 प्रतिशत पिछड़े जिलों, गाँवों, पिछड़े क्षेत्रों और विकास से वंचित समुदाय पर खर्च करने का फैसला किया।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने पूर्वोत्तर के राज्यों को आपस में जोड़ने और पूर्वोत्तर को शेष भारत से जोड़ने के लिए रेल, सड़क और हवाई क्षेत्र के विकास की दिशा में बहुत बड़ा प्रयास किया है। इसके तहत 15,088 करोड़ रूपये की 6 रेल परियोजनाओं को पूरा कर लिया गया है। साथ ही हवाई अड्डों के विकास पर 553 करोड़ रुपये और 869 किलोमीटर की 19 सड़क परियोजनाओं पर लगभग 10,000 करोड़ खर्च किए जाएँगे।

श्री शाह ने कहा कि कोरोना काल में मोदी सरकार ने पूर्वोत्तर के लोगों को दवाईयां, डाक्टरों को टेली-काफ्रेंस के माध्यम से प्रशिक्षण और जटिल केसों का एम्स के डाक्टरों द्वारा टेली-काफ्रेंस के जरिये इलाज़ समेत सभी स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान की। श्री शाह ने यह भी कहा कि इस दौरान सरकार ने 3.09 करोड़ लोगों को 7.7 लाख मीट्रिक टन खाद्यान उपलब्ध कराया। साथ ही पीएम किसान सम्मान निधि के तहत 533 करोड़ रुपये और जनधन योजना के अंतर्गत 1,707 करोड़ रुपये सीधे गरीब लोगों के बैंक खातों में डाले गए।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आजादी के बाद देश की जीडीपी में पूर्वोत्तर का हिस्सा 20 प्रतिशत होता था लेकिन घटते-घटते अब यह काफी कम हो गया है। उन्होंने 2024 तक देश की जीडीपी में पूर्वोत्तर की भागीदारी बढ़ाने और उसे भारत सरकार की एक्ट ईस्ट नीति का अहम हिस्सा बनाने के लिए पूर्वोत्तर को पर्यटन तथा उद्योग केंद्र और आई टी तथा ऑर्गेनिक खेती का हब बनाने का आहवाहन किया। श्री शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पूर्वोत्तर के आठों राज्यों के मुख्यमंत्री आगे बढ़ रहे हैं और उन्हें पूरा विश्वास है कि नार्थ-ईस्ट जल्द ही देश के विकास का नया इंजन बनेगा।

डेस्टिनेशन नॉर्थ ईस्ट 2020 का थीम "द इमर्जिंग डिलेक्टिव डेस्टिनेशंस" है जो सेक्टर के गति पकड़ने पर पर्यटन स्थलों को मजबूत और अधिक आकर्षक बनाने की बात करता है। यह कार्यक्रम मुख्य रूप से पर्यटन पर केंद्रित है। डेस्टिनेशन नॉर्थ ईस्ट पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय का एक कैलेंडर ईवेंट है जिसे पूर्वोत्तर क्षेत्र को देश के अन्य हिस्सों के करीब लाने और राष्ट्रीय एकीकरण को मजबूत करने के उद्देश्य से संकल्पित किया गया है।

चार दिवसीय कार्यक्रम में राज्यों और क्षेत्र के पर्यटन स्थलों की ऑडियो विजुअल प्रस्तुति, राज्य के प्रसिद्ध और उपलब्धियां हासिल करने वाले व्यक्तियों के संदेश, प्रमुख स्थानीय उद्यमियों से परिचय कराया जाएगा और इसमें हस्तकला / पारंपरिक फैशन / और स्थानीय उत्पादों की आभासी प्रदर्शनी की सुविधा होगी। कार्यक्रम में सभी आठ राज्यों के मुख्यमंत्री और पर्यटन मंत्री विशेष संदेश देंगे। साथ ही राज्य अपने—अपने सांस्कृतिक कार्यक्रम और मिली-जुली संस्कृतियों के संयोजन का प्रदर्शन करेंगे।

■ लद्दाख के पूर्व नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाक़ात की

लेह, लद्दाख के लोगों की ओर से एक प्रतिनिधिमंडल ने 26 सितंबर, 2020 को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के साथ मुलाकात की। इस प्रतिनिधिमंडल में लद्दाख के पूर्व दिग्गज नेता थिकसे रिनपोछे (पूर्व सांसद/राज्य सभा), थुप्स्तन छेवांग (पूर्व सांसद/लोक सभा) और छेरिंग दोरजे लकरूक (पूर्व मंत्री, जम्मू-कश्मीर) शामिल थे। बैठक के दौरान केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी• किशन रेड्डी तथा युवा मामले और खेल राज्य मंत्री किरेन रिजिजू भी उपस्थित रहे।

प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया गया था कि भाषा, जनसांख्यिकी, जातीयता, भूमि और नौकरियों से संबंधित सभी मुद्दों पर सकारात्मक रूप से ध्यान दिया जाएगा। “छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा के लिए पीपुल्स मूवमेंट” के तत्वावधान में लेह और करगिल जिलों के प्रतिनिधियों के एक बड़े लद्दाखी प्रतिनिधिमंडल और गृह मंत्रालय के बीच संवाद लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद, लेह चुनावों के समापन के 15 दिनों के बाद शुरू होगा। इस संबंध में कोई भी निर्णय लेह और करगिल के प्रतिनिधियों के परामर्श से ही लिया जायेगा।

केंद्रीय गृहमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि, भारत सरकार लेह और करगिल के एलएएचडीसी को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है तथा सरकार, केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के लोगों के हितों की रक्षा करेगी। साथ ही इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए सभी विकल्प तलाशे जायेंगे।

भारत सरकार लद्दाख के लोगों से संबंधित मुद्दों को देखते हुए देश के संविधान की छठी अनुसूची के तहत उपलब्ध संरक्षण पर चर्चा करने के लिए तैयार है।

प्रतिनिधिमंडल ने आगामी लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद-एलएएचडीसी, लेह चुनावों के बहिष्कार के आह्वान को वापस लेने पर सहमति व्यक्त की और इन चुनावों के सुचारू संचालन के लिए इसे पूर्ण समर्थन देने का वायदा किया।

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