लखनऊ-उत्तर प्रदेश,
इंडिया इनसाइड न्यूज़।
■ अन्तर्राष्ट्रीय भोजपुरी सेवा न्यास ने मनाई भिखारी ठाकुर की जयंती
■ लखनऊ में भोजपुरी के पुरोधा भिखारी ठाकुर की प्रतिमा लगाने की मांग
अन्तर्राष्ट्रीय भोजपुरी सेवा न्यास के बैनर तले प्रेस क्लब में भोजपुरी कला संस्कृति के पुरोधा भिखारी ठाकुर की जयंती मनाई गई। इस अवसर पर कृष्णानंद राय को हीरा महतो लोक चिंतन सम्मान, सीमा राय द्विवेदी को सीता देवी द्विवेदी स्मृति मार्तण्ड सम्मान, इंजीनियर बी.के .मिश्र को पं. शिवगुलाम मिश्र स्मृति श्रमरत्न सम्मान से अलंकृत किया गया।
भोजपुरी सिनेमा के निर्देशक और अंतर्राष्ट्रीय भोजपुरी सेवा न्यास के संरक्षक दिनेश तिवारी ने मुख्य अतिथि की आसंदी से भिखारी ठाकुर के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने भोजपुरी बोली-बानी को अपने नाटकों और कविताओं के माध्यम से बल प्रदान किया। उसे लोकप्रियता प्रदान की। उनका यह प्रयास रंग ला रहा है। आज भोजपुरी वैश्विक स्तर पर बोली जा रही है। अच्छा तो तब लगता है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी भोजपुरी बोलकर भोजपुरी भाषाभाषी समाज से भावनात्मक रूप से जुड़ने का प्रयास करते हैं।
उन्होंने कहा कि इधर भोजपुरी में भिाखारी ठाकुर पर काम भी चल रहा था लेकिन दो अभिनेताओं की आपसी खींचतान दु:खद है। ऐसा नहीं होना चाहिए। उन्होंने आश्वस्त किया कि जब भी अंतर्राष्ट्रीय भोजपुरी सेवा न्यास उन्हें याद करेगा, वे हर संभव सहयोग के लिए जी-जान से खड़े मिलेंगे। भोजपुरी को ओ बढ़ाना ही हम सबके जीवन का लक्ष्य होना चाहिए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए और मुख्य वक्ता के रुप सियाराम पांडेय ‘शांत’ ने भिखारी ठाकुर के जीवन वृत्त पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कक्षा एक तक पढ़े होने के बावजूद उन्होंने कविता और नाटृय लेखन, भजन लेखन के क्षेत्र में जो काम किया, वह असाधारण है और कबीरदास और रामजियावनदास बावला की याद दिलाता है। भले ही जीवन के पूर्वार्ध के 30 साल उन्होंने हजामत बनाने और कलकत्ता जाकर पैसे कमाने में गुजार दिए हों लेकिन उम्र के तीसवें पड़ाव से जीवन पर्यंत यानी की 54 साल उन्होंने भोजपुरी की जो सेवा की ,सामाजिक कुरीतियों, आर्थिक विषमता और शोषण उत्पीड़न के खिलाफ जो आवाज बुलंद की, उसके लिए प्रकांड पंडित राहुल सांकृत्यायन ने उन्हें अनगढ़ हीरा कहा। उन्हें भोजपुरी का शेक्सपियर कहा गया। भरतमुनि की परंपरा का कलाकार कहा गया। तुलसीदास और भारतेंदु हरिश्चंद कहा गया। यह भोजपुरी समाज के लिए गौरव की बात है। उनके नाटकों का प्रभाव बिहार ही नहीं, उत्तर प्रदेश, झारखंड, बंगाल, असम और ओडिशा पर भी पड़ा। सच तो यह है कि उनके नाटकों ने तत्कालीन समाज की दशा बदलने का काम किया। सही मायने में वे बड़े शब्द साधक थे। वे कम पढ़े जरूर थे लेकिन अनुभव में पूरी तरह कढ़े थे। उनकी परंपरा को आगे बढ़ाना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि देना होगा।
इस अवसर पर कालीचरण महाविद्यालय के प्रबंधक इंजी. विनोद कुमार मिश्र, सीमा राय द्विवेदी, कृष्णानंद राय, उपाध्यक्ष दिग्विजय मिश्र, सयुंक्त सचिव राधेश्याम पांडेय, रीता श्रीवास्तव, मधु श्रीवास्तव ने भी भिखारी ठाकुर पर विचार रखे।
इस अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय भोजपुरी सेवा न्यास के अध्यक्ष परमानंद पांडेय ने सबके प्रति आभार व्यक्त करते हुए भिखारी ठाकुर की प्रतिमा लखनऊ में लगाए जाने की सरकार से मांग की।
इस अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय भोजपुरी सेवा न्यास परिवार के उपाध्यक्ष दुर्गा प्रसाद दूबे, दिग्विजय मिश्र, सयुंक्त सचिव राधेश्याम पांडेय, जेपी सिंह, कोषाध्यक्ष प्रसून पांडेय, न्यासी सदस्य दशरथ महतो, नर्वदा श्रीवास्तव उर्फ मधु श्रीवास्तव, ब्रह्मानंद पांडेय, देवेश त्रिपाठी, नित्यानंद पांडेय, अखिलेश द्विवेदी, उमाकांत मिश्र, ऋषिकेश पांडेय, उषाकांत मिश्र, शाश्वत पाठक, रमेश मिश्र, शिवेंद्र पांडेय आदि उपस्थित रहे।