रूसा के तत्वावधान में हुआ राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन



मेदिनीपुर,
पश्चिम बंगाल,
इंडिया इनसाइड न्यूज़।

मेदिनीपुर स्थित स्वयंशासित महाविद्यालय में 17 व 18 सितम्बर को रूसा (राष्ट्रीय उच्च शिक्षा आयोग) के तत्वावधान में द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। "वर्तमानसमाजे संस्कृतवांगमयस्य प्रभावः" विषय पर आयोजित चर्चा सत्र में आमन्त्रित वक्ता के रूप में सह भागिता करते हुए स्नातकोत्तर संस्कृत विभाग, राजकीय महाविद्यालय, बून्दी के सह-आचार्य एवं विभागाध्यक्ष डा• पूर्ण चन्द्र उपाध्याय ने "अभिनवाचार्यराधावल्लभीयसामाजिकचेतनायाः समसामयिकता प्रासंगिकता च" शीर्षक पर अपना विद्वत् प्रशंसित शोधपत्र प्रस्तुत किया। साथ ही इस अवसर पर डा• उपाध्याय के पुस्तक "राधावल्लभीयसंस्कृतसाहित्ये पर्यावरण चेतना" का विमोचन किया गया।

इस दौरान डा• उपाध्याय ने शोधपत्र के प्रतिपाद्य- अर्वाचीन आचार्य लोक कवि राधाल्लभ त्रिपाठी द्वारा विरचित गद्य, पद्य व दृश्यात्मक संस्कृत रचनाओं में निहित सामाजिक चेतना के दर्शन की समसामयिक प्रासंगिकता पर विस्तार पूर्वक प्रकाश डालते हुये उद्धरण पूर्वक कहा कि प्रो• त्रिपाठी की कृतियों में साम्प्रतिक समाज में व्याप्त सांस्कृतिक पर्यावरण प्रदूषणात्मक विसंगतियों जैसे धर्माडमबरता, राजनीति पाखण्डता, धनलोलुपता, दारिद्रय पीड़ा, दलित पीड़ा, नारी निर्यातना, मनवीय संवेदना हीनता, कुशिक्षा, अशिक्षा व शिक्षा का व्यवसायीकरण तथा शिक्षा का अवमूल्यन, दाम्पत्य जीवन, पारिवारिक व सामाजिक समरसता की निरसता आदि तत्त्वों का प्रतिपादन के साथ राष्ट्रीय अस्मिता के संरक्षण निमित्त उपायों का जिक्र किया गया है जो आज के भौतिक वाद परक समाज के लिये अत्यन्त प्रासंगिक है। वस्तुतः आचार्य त्रिपाठी की सामाजिक चेतना मानवीय संवेदना के रूप में साक्षात मूर्तिमान है।

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