राणे ने नई पार्टी का किया गठन



--- जितेन्द्र मिश्रा, मुंबई।
राज्य के मुख्यमंत्री नारायण राणे ने नई पार्टी की घोषणा कर दी है जिसका नाम 'महाराष्ट्र स्वाभिमान पक्ष' रखा है। पार्टी का चुनाव चिन्ह अभी तय नहीं हो पाया है। नए राजनीतिक दल के गठन के बाद नारायण राणे ने कहा कि उनकी पार्टी समाज के कमजोर के तबकों और राज्य के किसानों के लिए काम करेगी। रविवार को यशवंतराव चव्हाण प्रतिष्ठान में पत्रकारों को संबोधित करते हुए राणे ने कहा कि पार्टी का चुनाव चिन्ह और झंडा अभी तय नहीं हो पाया है। जल्द ही यह भी तय कर लिया जाएगा।

सूत्रों का कहना है कि नई पार्टी के गठन के एक घंटे बाद ही राणे को एनडीए में शामिल होने का आफर मिला है जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के संभावित मंत्रिमंडल विस्तार में राणे को मंत्री पद मिलने की संभावना है। पार्टी का झंडा और चुनाव चिन्ह तय होने के बाद जल्द ही उनकी नवगठित पार्टी एनडीए का हिस्सा बन जायेगी। जल्द ही राणे पार्टी के प्रचार के लिए राज्य का दौरा करेंगे।

बीजेपी के साथ गठबंधन पर सवाल किया गया और पूछा गया कि क्या बीजेपी में आपके दोस्त हैं तो उन्होंने जवाब दिया कि मेरे दोस्त हर जगह है। शिवसेना में उद्धव को छोड़कर और कांग्रेस में अशोक चव्हाण को छोड़कर सब मेरे दोस्त हैं। राणे ने शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि शिवसेना सत्ता से बाहर नहीं होगी जब तक उसे निकाला न जाए। उद्धव का देश और राज्य के लिए क्या योगदान है जो वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर टिप्पड़ी करते हैं। उन्हें इसके बारे में आत्मनिरीक्षण करना चाहिए। नोटबंदी, जीएसटी और किसानों की कर्ज माफी के बारे शिवसेना के मंत्रियों ने कभी जुबान नहीं खोली। शिवसेना के मंत्रियों का योगदान शून्य है। उद्धव को भ्रष्टाचार पर बोलने का अधिकार नहीं है। मुंबई में मराठी व्यक्ति घर नहीं ले सकता इस बारे में उद्धव ने कभी जुबान नहीं खोली। मुंबई से मराठी व्यक्ति के बाहर होने के लिए शिवसेना जिम्मेदार है।
उन्होने कहा कि बीजेपी-शिवसेना की लड़ाई के कारण राज्य का विकास रुक गया है. शिवसेना में पद बेंचे जाते हैं। गौरतलब है कि राणे ने पिछले महीने ही कांग्रेस पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिए थे। पार्टी की प्राथमिक सदस्यता के साथ ही विधान परिषद सदस्यता से भी राणे ने इस्तीफा दे दिया था। जिसके बाद उनके बीजेपी में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही थीं। इस्तीफे के बाद राणे अमित शाह से भी मिले थे लेकिन बात नहीं बनने के बाद राणे ने अपनी नई पार्टी का गठन किया।

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