--परमानंद पांडेय,
अध्यक्ष - अंतर्राष्ट्रीय भोजपुरी सेवा न्यास,
राष्ट्रीय संयोजक - मंजिल ग्रुप साहित्यिक मंच, उत्तर भारत।
बाला साहब ठाकरे हिन्दू हृदय सम्राट थे। कट्टर राष्ट्रवादी थे। उन्होंने कांग्रेस की तानाशाही के आगे कभी अपने को नहीं झुकाया। अपने जीवन काल में अपने परिवार के किसी को सत्ता में एंट्री नही दी। किन्तु उन्होंने अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी अपने सक्षम भटकते राज ठाकरे को नहीं बनाकर अपने पुत्र उद्भव ठाकरे को बना दिया। हालांकि उद्भव को सत्ता प्रतिष्ठान में जगह नहीं दी।
यह तो शिवसेना के कट्टर शत्रु शरद पवार ने एक चक्रव्यूह रचकर शिवसेना को राजनीतिक रूप से समाप्त करने की योजना बनायी। शिवसेना को भाजपा से अलग किया। उद्भव जैसे अकर्मण्य राजनीतिक रूप से नासमझ को मुख्यमंत्री बनवाया। उसी मंत्रिमंडल में उद्भव के बेटे को मंत्री बनवाकर शिवसेना की जड़ खोद दी।
आज परिणाम सामने है। शिवसेना का कार्यकर्ता समूह आज ठाकरे परिवार से अलग हो गया है। एक समर्पित शिवसैनिक शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना बाला साहब ठाकरे की नीतियों को आगे रखकर नए रुप में आगे आ रही है। लग रहा है भाजपा के साथ पुनर्जीवित शिवसेना का गठबंधन या मिलन होगा।
एक नयी राष्ट्रवादी हिन्दुत्ववादी राजनीति का महारष्ट्र में उदय हो रहा है। स्वागत करते हैं महाराष्ट्र की इस नयी राजनीति का।