--परमानंद पांडेय,
अध्यक्ष - अंतर्राष्ट्रीय भोजपुरी सेवा न्यास,
राष्ट्रीय संयोजक - मंजिल ग्रुप साहित्यिक मंच, उत्तर भारत।
■ सुप्रीम कोर्ट के निर्णय औऱ तल्ख टिप्पणियां
सुप्रीम कोर्ट ने एकनाथ शिंदे गुट के 39 विधायकों की याचिका पर विचार किया। कुछ अत्यावश्यक निर्णय लिए और तल्ख टिप्पणियां भी कीं।
डिप्टी स्पीकर के विरुद्ध दो निर्दलीय विधायकों ने अविश्वास प्रस्ताव लाने की सूचना दी थी। उसे डिप्टी स्पीकर ने स्वयं निरस्त कर दिया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की कि स्वयं इस मामले में वे जज कैसे बन गए?
डिप्टी स्पीकर ने शिंदे गुट के 16 विधायकों को नोटिस दी थी और जो समय दिए उनको अयोग्य ठहराने का मन बना लिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय लिया कि किसी विधायक पर कोई कार्रवाई 11 जुलाई तक नहीं की जा सकेगी। कोर्ट ने अगली सुनवायी की तिथि 11 जुलाई तय की है।
एकनाथ शिंदे को शिवसेना के विधायक दल के नेता पद से हटाए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने उद्भव ठाकरे से जवाब मांगा है। जिन्हें नेता और संकेतक बनाया गया है उन दोनों से भी जवाब मांगा गया हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को भी नोटिस देकर जवाब मांग है।
सभी सबन्धित लोगों से आठ दिनों के भीतर ऐफिडेविट और काउंटर ऐफिडेविट जमा करने को कहा है। इस प्रकर शिंदे गुट को इंसाफ मिला है और उनकी और उनके परिवारों की सुरक्षा के लिए महाराष्ट्र सरकार को स्पष्ट आदेश दिया है।
अब उद्भव सरकार चंद दिनों की मेहमान लग रहीं है। राज्यपाल भी स्वस्थ होकर आ गए हैं। अतः अब जल्द से जल्द नयी सरकार बन जाने की पूरी संभावना है।
देश की भ्रष्टतम राज्य सरकार जितनी जल्द चली जाए उतना ही कल्याण महाराष्ट्र का जल्द से जल्द होगा।